मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मजबूत वृद्धि
इलेक्ट्रिक सेक्टर में भी बड़ा सुधार
इलेक्ट्रिक सेक्टर में भी बड़ा सुधार देखने को मिला और इसकी ग्रोथ बढ़कर 8.9% हो गई, जबकि एक साल पहले यह सेक्टर 1.8% सिकुड़ा था। कंस्ट्रक्शन सेक्टर भी 7.7% बढ़ा, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में इसकी वृद्धि 5.2% थी। इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन में भी पहली तिमाही के दौरान औसत वृद्धि 5.7% रही, जो पिछली तिमाही के 3.8% से बेहतर है। घरेलू डिमांड का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि Q1 FY27 में पैसेंजर व्हीकल बिक्री औसतन 25.6% बढ़ी।
कृषि क्षेत्र की वृद्धि घटी
हालांकि, हर सेक्टर का प्रदर्शन मजबूत नहीं रहा। कृषि क्षेत्र की वृद्धि पिछले साल के 4.4% से घटकर 3.6% रह गई। सबसे बड़ा दबाव माइनिंग सेक्टर पर रहा, जिसमें 2.4% की गिरावट आई, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में इस सेक्टर ने 12.4% की शानदार वृद्धि दर्ज की थी। दूसरी ओर सर्विस सेक्टर लगातार अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बना हुआ है। वित्तीय, रियल एस्टेट और प्रोफेशनल सर्विसेज में करीब 12% की वृद्धि हुई। सर्विसेज एक्सपोर्ट की ग्रोथ भी पिछली तिमाही के 8.9% से बढ़कर 13.1% हो गई। पिछले साल GST दरों में कटौती और इनकम टैक्स में राहत से लोगों की डिस्पोजेबल इनकम और खर्च करने की क्षमता को भी समर्थन मिला।
85% से ज्यादा कच्चे तेल का आयात
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह तेज GDP ग्रोथ आगे भी जारी रहेगी। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि दूसरी और तीसरी तिमाही में कुछ सुस्ती आ सकती है। भारत अपनी जरूरत के 85% से ज्यादा कच्चे तेल का आयात करता है और अगर क्रूड की कीमतें लंबे समय तक 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहती हैं, तो महंगाई और उत्पादन लागत पर दबाव बढ़ सकता है। इसके बावजूद मजबूत घरेलू डिमांड, सरकारी निवेश, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर भारत के लिए सकारात्मक संकेत हैं।
भारत का लक्ष्य 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का है, लेकिन एक्सपर्ट के अनुसार इसके लिए मौजूदा 7-8% की रफ्तार से भी ज्यादा और लंबे समय तक तेज आर्थिक वृद्धि की जरूरत होगी। इसलिए 7.8% की GDP ग्रोथ निश्चित रूप से अच्छी खबर है, लेकिन 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य के लिए लगातार ऊंची विकास दर बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होगी।
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