केंद्र सरकार ने डीजल और विमान ईंधन यानी ATF के एक्सपोर्ट पर लगने वाली ड्यूटी में बढ़ोतरी की है। वहीं दूसरी तरफ पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर लगने वाले टैक्स को कम कर दिया है। डीजल के एक्सपोर्ट पर ड्यूटी ₹8.50 से बढ़ाकर ₹15.50 प्रति लीटर कर दी है। यानी इसमें प्रति लीटर 7 रुपए का इजाफा किया गया है। इसी तरह ATF यानी हवाई जहाज के ईंधन पर एक्सपोर्ट ड्यूटी ₹7.50 से बढ़ाकर ₹14.50 प्रति लीटर कर दी गई है। हालांकि, पेट्रोल एक्सपोर्टर्स को थोड़ी राहत देते हुए इस पर लगने वाली ड्यूटी को ₹4 से घटाकर ₹2.50 प्रति लीटर की है। ईंधन की ये नई दरें 16 जुलाई से देश भर में लागू हो गई हैं। हर 15 दिन में होती है समीक्षा सरकार का कहना है कि कच्चे तेल के संकट को देखते हुए देश के भीतर पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की कोई कमी न हो, इसलिए यह फैसला लिया गया है ताकि कंपनियां घरेलू बाजार की जगह बाहर तेल बेचने को तरजीह न दें। सरकार की ओर से हर 15 दिन में ड्यूटी यानी टैक्स की समीक्षा करती है। मार्च में लगा था टैक्स वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि 27 मार्च को सरकार ने स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) और रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस (RIC) के रूप में यह एक्सपोर्ट लेवी शुरू की थी। इसका मुख्य उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना था। पश्चिम एशिया संकट के चलते वैश्विक स्तर पर पैदा हुए हालात के बीच कंपनियां मुनाफे के लिए देश से बाहर ज्यादा तेल न भेजें, इसी को रोकने के लिए टैक्स लगाया गया था। हर 15 दिन में तय होती हैं कीमतें, पिछली समीक्षा 1 जुलाई को हुई थी मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एटीएफ की औसत अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर हर 15 दिन में इन ड्यूटी दरों की समीक्षा की जाती है। पिछली समीक्षा के बाद 1 जुलाई 2026 को नई दरें लागू की गई थीं, जिसके बाद अब 16 जुलाई से शुरू होने वाले पखवाड़े के लिए ये नए बदलाव किए गए हैं। इसका आम आदमी पर कोई असर नहीं चूंकि यह सिर्फ ‘एक्सपोर्ट’ यानी देश से बाहर भेजे जाने वाले ईंधन पर टैक्स है और घरेलू इंपोर्ट ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं हुआ है, इसलिए भारत के पेट्रोल पंपों पर आम ग्राहकों के लिए पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर इसका कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा।
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