आयरन ओर सेक्टर का शानदार प्रदर्शन
फर्टिलाइजर सेक्टर में सबसे बड़ी गिरावट
हालांकि, ऊर्जा और फर्टिलाइजर से जुड़े आंकड़ों ने चिंता बढ़ाई। जुलाई में कच्चे तेल का उत्पादन 5.3% घट गया, जबकि प्राकृतिक गैस उत्पादन में 3.7% की गिरावट दर्ज हुई। सबसे बड़ी गिरावट फर्टिलाइजर सेक्टर में रही, जहां उत्पादन 8% कम हुआ। इन कमजोर आंकड़ों का असर कुल कोर सेक्टर ग्रोथ पर पड़ा। खासकर कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस जैसे ऊर्जा क्षेत्र देश की औद्योगिक गतिविधियों और आयात जरूरतों से सीधे जुड़े होते हैं।
कोर सेक्टर में कुल 8 प्रमुख उद्योग
कोर सेक्टर में कुल 8 प्रमुख उद्योग कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, फर्टिलाइजर, स्टील, सीमेंट और बिजली शामिल होते हैं। इनका महत्व इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि ये मिलकर देश के IIP (Index of Industrial Production) में शामिल वस्तुओं के कुल भार का करीब 40.27% हिस्सा रखते हैं। इसलिए कोर सेक्टर के आंकड़ों को अक्सर औद्योगिक गतिविधियों का शुरुआती संकेत माना जाता है। अगर इन सेक्टर्स में उत्पादन मजबूत रहता है, तो आगे चलकर फैक्ट्री आउटपुट और आर्थिक गतिविधियों में भी इसका असर दिखाई दे सकता है।
8 प्रमुख सेक्टरों का कुल उत्पादन 4.3% बढ़ा
महीने-दर-महीने ग्रोथ में भले ही थोड़ी कमी आई हो, लेकिन वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती 4 महीनों यानी अप्रैल से जुलाई के दौरान तस्वीर बेहतर रही। इस अवधि में 8 प्रमुख सेक्टरों का कुल उत्पादन 4.3% बढ़ा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में सिर्फ 1.5% की वृद्धि दर्ज हुई थी, यानी सालाना आधार पर इस वित्त वर्ष के शुरुआती महीनों में कोर इंडस्ट्रीज की स्थिति पहले से मजबूत दिखाई दे रही है।
इस बीच जून के आंकड़ों में भी बदलाव किया गया है। जून का अंतिम इंडेक्स 119.6 से बढ़ाकर 120.7 कर दिया गया, जिसके चलते जून की सालाना ग्रोथ पहले के 5% के अनुमान से बढ़कर 6% हो गई। जुलाई के आंकड़े अभी शुरुआती यानी प्रोविजनल हैं और आगे मिलने वाले आंकड़ों के आधार पर इनमें बदलाव हो सकता है। अगस्त 2026 के कोर सेक्टर के आंकड़े 21 सितंबर को जारी किए जाने हैं। ऐसे में अब बाजार और अर्थव्यवस्था पर नजर रखने वालों की निगाह इस बात पर रहेगी कि अगस्त में कच्चे तेल, गैस और फर्टिलाइजर की कमजोरी कम होती है या नहीं और क्या सीमेंट, बिजली तथा आयरन ओर जैसे सेक्टर अपनी तेज रफ्तार बनाए रख पाते हैं।
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