गौतम गंभीर का मानना है कि टीमों के बीच तीन मैचों की टेस्ट सीरीज होनी चाहिए, जिससे पहला मैच हारने वाली टीम को वापसी करने का बराबरी का मौका मिले।
सीरीज जीतने का कोई मौका नहीं रहता
मैच से पहले संवाददाता सम्मेलन में गंभीर ने कहा, “आदर्श रूप से मैं तीन टेस्ट मैचों की सीरीज चाहूंगा। मेरा हमेशा से मानना रहा है कि जो टीम पहला टेस्ट हारती है, उसके पास वापसी करके सीरीज जीतने का मौका होना चाहिए।” उन्होंने कहा, “दो टेस्ट की सीरीज में अगर आप पहला मैच हार जाते हैं तो दूसरी टीम के पास वापसी करके सीरीज जीतने का कोई मौका नहीं रहता। अधिकतम आप सीरीज ड्रॉ कराने की कोशिश कर सकते हैं।”
गंभीर ने 2001 की भारत-ऑस्ट्रेलिया टेस्ट सीरीज को याद करते हुए कहा, “मुझे आज भी भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच वह सीरीज याद है, जिसमें भारत 0-1 से पिछड़ गया था, लेकिन उसने शानदार वापसी करते हुए सीरीज 2-1 से जीत ली थी।”
जानते हैं कि शरीर को कैसे संभालना है
दो टेस्ट मैचों की सीरीज में अक्सर दोनों मुकाबलों के बीच आराम का समय कम होता है। हालांकि, गंभीर ने इसे लेकर चिंता नहीं जताई। उन्होंने कहा, “कम अंतराल। यह ठीक है। दूसरी टीमें भी ऐसा कर रही हैं। एक पेशेवर क्रिकेटर के तौर पर हम जानते हैं कि अपने शरीर को कैसे संभालना है। यही कारण है कि कुछ दिन हम खिलाड़ियों को वैकल्पिक अभ्यास की अनुमति देते हैं।”
मेरा काम ट्रॉफियां जीतना है
उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में अनुभवी खिलाड़ियों के लिए लगातार खेलना मुश्किल हो सकता है और इसलिए टीम प्रबंधन उनके कार्यभार को संभालने की कोशिश करता है। गंभीर के मुख्य कोच बनने के बाद भारत को न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू टेस्ट श्रृंखला में हार का सामना करना पड़ा, जबकि ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भी टीम को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। इंग्लैंड के खिलाफ उसकी धरती पर 2-2 से टेस्ट श्रृंखला ड्रॉ करना उनके कार्यकाल में एक सकारात्मक पहलू रहा है।
रविवार से श्रीलंका के खिलाफ शुरू होने वाले दूसरे टेस्ट से एक दिन पहले गंभीर से जब उनकी आलोचनाओं के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ”आलोचना? मेरा काम ट्रॉफियां जीतना है। मैं सिर्फ इसी में विश्वास करता हूं और इसी की परवाह करता हूं। यही मेरे और बाकी लोगों के बीच अंतर है। मुझे विचारों या ‘लाइक्स’ की चिंता नहीं है।”
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