रेटिंग: 3.5
ड्यूरेशन: 2 घंटे 25 मिनट
कास्टः इमरान हाशमी, दिशा पाटनी
डायरेक्टर: नितिन कक्कड़ 2007 की आवारापन अपने दर्द, मोहब्बत और संगीत की वजह से आज भी याद की जाती है। आवारापन 2 उसी भावनात्मक विरासत को आगे बढ़ाती है। इस बार शिवम की लड़ाई सिर्फ उसके अतीत से नहीं, बल्कि बच्चों की तस्करी के एक बड़े गिरोह से भी है। फिल्म में एक्शन और रोमांस है, लेकिन इसकी असली ताकत दर्द, रिश्तों और संगीत में है। कैसी है फिल्म की कहानी? कहानी पुराने आवारापन के फ्लैशबैक से शुरू होती है और फिर शिवम पंडित (इमरान हाशमी) की जिंदगी में लौटती है। शिवम एक अनाथालय चलाता है, जहां आलिया नाम की एक बच्ची रहती है। गोद लेने के बहाने कुछ लोग आलिया को अपने साथ ले जाते हैं और बाद में पता चलता है कि वह मानव तस्करी के गिरोह के हाथों पहुंच गई है। इसी बीच इंटरपोल का एक अधिकारी शिवम से संपर्क करता है और उसे बच्चों की तस्करी करने वाले गिरोह तक पहुंचने का मिशन देता है। शिवम बैंकॉक पहुंचता है, जहां उसका सामना पूरन गब्बी से होता है। इसी दौरान उसकी मुलाकात गैंगस्टर की बेटी दिशा (दिशा पाटनी) से होती है, जो आगे चलकर उसका साथ देती है। मिशन के साथ शिवम अपने पुराने दर्द और रिश्तों का भी सामना करता है। कैसी है कलाकारों की एक्टिंग? इमरान हाशमी पूरी फिल्म को अपने कंधों पर लेकर चलते हैं। शिवम के दर्द, गुस्से और अकेलेपन में वही पुरानी आवारापन वाली इंटेंसिटी दिखाई देती है। उनका बदला हुआ लुक और बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन भी किरदार पर खूब जंचता है। शबाना आजमी नफीसा के किरदार में बड़ा सरप्राइज हैं और अपने चेहरे और आवाज से खौफ पैदा करती हैं। दिशा पाटनी की स्क्रीन मौजूदगी अच्छी है, हालांकि उनके भाव कई जगह एक जैसे लगते हैं। पूरन गब्बी ठीक हैं, लेकिन इमरान हाशमी की इंटेंस मौजूदगी के सामने थोड़ा हल्का महसूस होते हैं। किरदार में थोड़ा और खौफ और वजन होता तो असर बढ़ सकता था। वहीं सुविंदर विक्की अपनी मौजूदगी से प्रभावित करते हैं। कैसा है फिल्म का म्यूजिक? नितिन कक्कड़ ने पुराने आवारापन की भावनात्मक दुनिया को नए एक्शन और अपराध की कहानी के साथ जोड़ने की कोशिश की है। शिवम के दर्द और उसके मिशन के बीच संतुलन अच्छा है। फिल्म का भावनात्मक पक्ष कई जगह असर करता है, हालांकि कुछ दृश्य लंबे लगते हैं और कहानी की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ती है। थोड़ी और कसावट इसे ज्यादा प्रभावी बना सकती थी। कैसे हैं फिल्म के टेक्निकल पहलु? विष्णु राव की सिनेमैटोग्राफी फिल्म के डार्क और गंभीर माहौल को अच्छी तरह पकड़ती है। बैंकॉक की लोकेशन, एक्शन और भावनात्मक सीन में विजुअल्स प्रभाव छोड़ते हैं। हालांकि कुछ जगह एक्शन और प्रोडक्शन के स्तर पर और बेहतर काम की गुंजाइश महसूस होती है। कैसा है फिल्म का म्यूजिक? फिल्म का संगीत इसकी बड़ी ताकत है। आवारापन की पुरानी यादों को बनाए रखते हुए नए गानों में भी दर्द, मोहब्बत और नॉस्टेल्जिया का रंग है। ‘वे जुनून’, ‘ये आवारापन’, ‘तेरा मेरा रिश्ता कंटीन्यूज’ और ‘तेरे लिए’ फिल्म के भावनात्मक हिस्से को मजबूत करते हैं। पुराने गानों वाली वही गहराई हर जगह नहीं मिलती, लेकिन संगीत फिल्म के मूड को जरूर पकड़ता है। फाइनल वर्डिक्ट: फिल्म देखें या नहीं? आवारापन 2 कहानी में बहुत नया नहीं देती, लेकिन इमरान हाशमी का दर्द, शबाना आजमी की दमदार मौजूदगी और संगीत इसे देखने लायक बनाते हैं। अगर पहली आवारापन का दर्द और संगीत आज भी याद है, तो यह फिल्म उस एहसास के करीब जरूर ले जाएगी। दर्द वही है, इश्क वही है, बस शिवम की लड़ाई इस बार बड़ी है।
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