एआई की दुनिया में हाल ही में हुई एक घटना ने भारत में तकनीकी आत्मनिर्भरता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अमेरिका सरकार के निर्देश के बाद अमेरिकी कंपनी एंथ्रॉपिक को अपने सबसे उन्नत एआई मॉडल विदेशी नागरिकों के लिए अस्थायी रूप से बंद करने पड़े। इस फैसले के बाद भारतीय तकनीकी जगत के कई प्रमुख नामों ने कहा है कि अब भारत को अपनी स्वतंत्र और स्वदेशी एआई क्षमता विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना होगा।
मौजूद जानकारी के अनुसार एंथ्रॉपिक को 12 जून को एक निर्यात नियंत्रण संबंधी निर्देश प्राप्त हुआ था। इसके तहत कंपनी को अपने दो प्रमुख मॉडल, फेबल 5 और मिथोस 5, विदेशी नागरिकों के लिए बंद करने पड़े। यह प्रतिबंध केवल अमेरिका के बाहर रहने वालों पर ही नहीं, बल्कि कंपनी में कार्यरत विदेशी कर्मचारियों पर भी लागू किया गया। हालांकि कंपनी की अन्य सेवाएं पहले की तरह उपलब्ध बनी हुई हैं।
गौरतलब है कि एंथ्रॉपिक ने इस कदम को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा फैसला बताया है। वहीं अमेरिकी प्रशासन के कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल मुद्रा मामलों के सलाहकार डेविड सैक्स ने कंपनी के दावों पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि एक सुरक्षा खामी की पहचान की गई थी, जिससे संवेदनशील क्षमताओं तक पहुंच संभव हो सकती थी। उनके अनुसार कंपनी को समस्या दूर करने या मॉडल वापस लेने का विकल्प दिया गया था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा संबंधी चिंताओं के समाधान के बाद प्रतिबंध हटाया जा सकता है।
इस घटनाक्रम ने भारत में तकनीकी संप्रभुता की आवश्यकता पर जोरदार चर्चा शुरू कर दी है। जोहो के संस्थापक श्रीधर वेम्बु ने कहा कि उन्नत तकनीक अब केवल व्यापार का विषय नहीं रह गई है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रीय संप्रभुता से भी जुड़ चुकी है। उन्होंने भारतीय संस्थानों से विदेशी मंचों पर निर्भरता कम करने और छोटे तथा मुक्त स्रोत आधारित भारतीय विकल्पों को अपनाने की अपील की है।
बता दें कि भारत सरकार पहले ही इस दिशा में कदम बढ़ा चुकी है। इस वर्ष भारत एआई मिशन के तहत 12 कंपनियों का चयन किया गया है, जिन्हें स्वदेशी आधारभूत मॉडल विकसित करने की जिम्मेदारी दी गई है। इनमें सर्वम एआई को सबसे प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा है।
सर्वम एआई के सह-संस्थापक प्रत्युष कुमार ने कहा कि किसी तकनीक तक पहुंच और उस तकनीक के स्वामित्व में बड़ा अंतर होता है। उनके अनुसार यदि किसी महत्वपूर्ण तकनीक पर बाहरी नियंत्रण बना रहे, तो उससे जुड़े देश और संस्थान हमेशा जोखिम में रहेंगे। उन्होंने कहा कि भारत में स्वदेशी एआई विकसित करने का विचार उनकी कंपनी की स्थापना का मूल आधार रहा है।
मौजूद जानकारी के अनुसार सर्वम एआई को लेकर निवेशकों की रुचि भी तेजी से बढ़ रही है। बताया जा रहा है कि एचसीएल टेक लगभग 150 मिलियन डॉलर का निवेश कर सकती है और 300 मिलियन डॉलर के निवेश दौर का नेतृत्व कर सकती है।
इस बीच लाइटस्पीड के हेमंत मोहापात्रा, एक्टिवेट के संस्थापक आक्रित वैश, आरिन कैपिटल के मोहनदास पई और कई अन्य उद्योग विशेषज्ञों ने भी कहा है कि यह घटना भारत के लिए चेतावनी है। उनका मानना है कि भविष्य में एआई उतनी ही महत्वपूर्ण बुनियादी व्यवस्था बन सकती है जितनी बिजली, दूरसंचार और परिवहन हैं।
मोहनदास पई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक बड़े राष्ट्रीय कार्यक्रम की मांग करते हुए कहा कि भारत को गहन तकनीक और एआई के लिए हर वर्ष 50 हजार करोड़ रुपये का विशेष कोष बनाना चाहिए। उनका मानना है कि मौजूदा प्रयास पर्याप्त नहीं हैं और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे रहने के लिए निवेश की गति बढ़ानी होगी।
गौरतलब है कि भारत के तकनीकी क्षेत्र में इस बात को लेकर भी मतभेद हैं कि देश को अपने बड़े मॉडल विकसित करने चाहिए या फिर मौजूदा तकनीकों के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों के लिए समाधान तैयार करने चाहिए। बावजूद इसके, हालिया घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में तकनीकी आत्मनिर्भरता और स्वदेशी एआई भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल रहने वाली हैं।
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