एआई को लेकर दुनिया भर में एक सवाल काफी चर्चे में रहता है कि क्या आने वाले समय में AI इंसानों की नौकरियां कम कर देगा? क्योंकि कई क्षेत्रों में AI के बढ़ते प्रभाव के कारण कर्मचारियों के बीच नौकरी को लेकर चिंता भी देखी जा रही है।
ग्रामीण छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के अवसर जरूरी
इससे पहले करुप्पुर स्थित गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के डायमंड जुबली ईयर के ग्लोबल एलुमनी डे के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में कामकोटि ने उच्च शिक्षा को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सलेम और कोयंबटूर जैसे टियर-2 शहर ग्रामीण इलाकों से आने वाले छात्रों को शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध करा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत@2047’ विजन के प्रमुख फोकस क्षेत्रों में ग्रामीण छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना भी शामिल है।
कामकोटि ने कहा कि गांव से आने वाले छात्रों को उच्च शिक्षा तक पहुंच दिलाना देश के विकास के लिए बेहद जरूरी है। छोटे शहरों में बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध होने से ग्रामीण छात्रों को बड़े शहरों की ओर पलायन किए बिना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हासिल करने का मौका मिल सकता है।
तमिलनाडु का उच्च शिक्षा में GER 50 प्रतिशत
IIT मद्रास के निदेशक ने हायरएजुकेशन में नामांकन को लेकर तमिलनाडु और देश के आंकड़ों का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, तमिलनाडु में उच्च शिक्षा का सकल नामांकन अनुपात (GER) 50 प्रतिशत है, जबकि देशभर में यह करीब 30 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत 2035 तक देश में उच्च शिक्षा का सकल नामांकन अनुपात बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है।
संस्थान के विकास में पूर्व छात्रों की अहम भूमिका
कामकोटि ने किसी भी शिक्षण संस्थान के विकास में उसके पूर्व छात्रों यानी अलुमनी के योगदान को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने IIT मद्रास के करीब 60000 पूर्व छात्रों का जिक्र करते हुए बताया कि हाल ही में संस्थान के एक पूर्व छात्र ने IIT मद्रास को 238 करोड़ रुपये का अनुदान दिया है। उन्होंने कहा कि एलुमनी का योगदान केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है। पूर्व छात्र मेंटर्स के रूप में भी वर्तमान छात्रों का मार्गदर्शन करते हैं, जिससे उन्हें पढ़ाई, करियर और भविष्य की चुनौतियों को समझने में मदद मिलती है।
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