इधर इजराइल अब पूरी तरह आक्रामक रणनीति पर उतर आया है। इजराइल के रक्षा मंत्री ने साफ कहा है कि दक्षिणी लेबनान में लितानी नदी तक पूरा इलाका उनके नियंत्रण में रहेगा। वहां से भागे करीब छह लाख लोगों को लौटने नहीं दिया जाएगा और सीमा के पास के घरों को पूरी तरह मिटा दिया जाएगा। यह बयान इस बात का संकेत है कि इजराइल जमीनी घुसपैठ की तैयारी में है।
इसे भी पढ़ें: हिम्मत दिखाओ, होर्मुज़ से अपना तेल खुद ले आओ, ईरान युद्ध में मदद न करने वाले देशों पर भड़के ट्रंप
इस बीच, अमेरिका की भूमिका भी बेहद आक्रामक होती जा रही है, लेकिन उसे हर मोर्चे पर समर्थन नहीं मिल रहा। इटली ने अपने सैन्य अड्डे पर अमेरिकी विमानों को उतरने से मना कर दिया, वहीं स्पेन ने भी अपने हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया है। यह साफ संकेत है कि पश्चिमी देशों के भीतर भी इस युद्ध को लेकर मतभेद गहराते जा रहे हैं।
उधर, जंग का असर अब खाड़ी क्षेत्र तक पहुंच चुका है। दुबई के पास एक तेल टैंकर पर ड्रोन हमला हुआ, जिसमें करीब बीस लाख बैरल तेल था। आग तो काबू में कर ली गई, लेकिन तेल आपूर्ति पर खतरा मंडरा रहा है। इसी कारण वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें उछल गई हैं और कई देशों में ईंधन महंगा हो गया है।
वहीं ईरान भी पीछे हटने के मूड में नहीं है। उसकी सेना ने खुले शब्दों में चेतावनी दी है कि जो भी देश जमीन पर हमला करेगा, उसके पैर काट दिए जाएंगे। इतना ही नहीं, रूस से जुड़े चेचन लड़ाके भी तैयार बताए जा रहे हैं, जो अमेरिका के जमीनी युद्ध में उतरते ही ईरान का साथ दे सकते हैं।
दूसरी ओर, स्थिति तब और भयावह हो गई जब ईरान ने अमेरिका के कई सैन्य ठिकानों पर एक साथ हमले करने का दावा किया। बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब में स्थित ठिकानों को निशाना बनाया गया। ड्रोन और सटीक मिसाइलों से कमांड सेंटर और रडार सिस्टम पर वार किए गए। यह कदम सीधे अमेरिका को युद्ध में खींचने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
उधर, इजराइल और अमेरिका ने ईरान के भीतर भी हमले तेज कर दिए हैं। इस्फहान में हथियार भंडार पर हमला किया गया, जबकि तेहरान में कई धमाके सुने गए और बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि एक दवा बनाने वाली बड़ी कंपनी भी हमले की चपेट में आ गई, जहां कैंसर और बेहोशी की दवाएं बनाई जाती थीं। इससे आम नागरिकों पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता बढ़ गई है।
इस बीच, ईरान के भीतर हालात और भी कठिन हो गए हैं। पिछले कई हफ्तों से इंटरनेट बंद है, जिससे लोग परेशान हैं। वहीं ईरान सरकार ने सख्त चेतावनी दी है कि अगर कोई भी व्यक्ति अमेरिका या इजराइल को जानकारी देता पकड़ा गया, तो उसे मौत की सजा दी जा सकती है।
उधर, हिजबुल्लाह ने भी मोर्चा खोल दिया है और इजराइली वायु रक्षा प्रणाली पर ड्रोन हमला करने का दावा किया है। हम आपको बता दें कि लेबनान सीमा पर तनाव चरम पर है और संयुक्त राष्ट्र के तीन शांति सैनिकों की मौत ने हालात को और गंभीर बना दिया है।
दूसरी ओर, राजनीतिक मोर्चे पर भी बयानबाजी तेज हो गई है। इजराइल के प्रधानमंत्री का कहना है कि युद्ध अपने लक्ष्यों के आधे से ज्यादा रास्ते पर पहुंच चुका है। वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री का दावा है कि उनके लक्ष्य कुछ ही हफ्तों में हासिल हो सकते हैं। लेकिन हकीकत यह है कि जंग जितनी लंबी खिंचेगी, उतना ही दुनिया के लिए खतरा बढ़ेगा।
इस बीच, यह भी खबर है कि ईरान के शहर करज में हजारों लोग सड़कों पर उतरकर सरकार और सेना के समर्थन में नारे लगा रहे हैं। इससे साफ है कि देश के भीतर भी युद्ध को लेकर जबरदस्त समर्थन मौजूद है।
बहरहाल, अब सवाल यह है कि क्या यह जंग तीसरे विश्व युद्ध की आहट है? देखा जाये तो तेल, सेना, राजनीति और वैश्विक गठजोड़ सब एक साथ उलझ चुके हैं। हालात जिस तेजी से बिगड़ रहे हैं, उससे साफ है कि आने वाले दिन दुनिया के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.