मौजूद जानकारी के अनुसार, तवेंग्वा मुकुहलानी क्रिकेट प्रशासन में लंबे समय से सक्रिय हैं और जिम्बाब्वे क्रिकेट के नेतृत्व की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। आईसीसी से जुड़ी कई अहम समितियों में भी उनकी भूमिका है। वह वित्त और वाणिज्यिक मामलों की समिति तथा नामांकन समिति के सदस्य हैं, जबकि मानव संसाधन और वेतन से जुड़ी समिति की अध्यक्षता भी करते हैं।
मुकुहलानी की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब अफ्रीकी क्रिकेट के लिए आने वाले कुछ साल बेहद अहम माने जा रहे हैं। जिम्बाब्वे 2027 के पुरुष क्रिकेट विश्व कप की मेजबानी दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया के साथ मिलकर करने वाला है। ऐसे में आईसीसी के उपाध्यक्ष के रूप में मुकुहलानी के सामने अपने क्षेत्र के क्रिकेट के विकास से जुड़ी कई अहम जिम्मेदारियां भी रहेंगी।
गौरतलब है कि 2027 का विश्व कप 24 साल बाद अफ्रीका में वापसी करेगा। इससे पहले 2003 में दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और केन्या ने मिलकर विश्व कप की मेजबानी की थी। इस बार भी अफ्रीकी देशों को क्रिकेट के सबसे बड़े आयोजनों में से एक की मेजबानी मिलने से महाद्वीप में खेल के विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। जिम्बाब्वे, दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया के सामने टूर्नामेंट के आयोजन के साथ-साथ क्रिकेट को नए दर्शकों और खिलाड़ियों तक पहुंचाने की चुनौती भी रहेगी।
आईसीसी के अध्यक्ष जय शाह ने तवेंग्वा मुकुहलानी को नई जिम्मेदारी मिलने पर बधाई दी है। उन्होंने कहा कि मुकुहलानी का क्रिकेट प्रशासन का अनुभव, वैश्विक खेल की समझ और क्रिकेट के विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता आईसीसी बोर्ड के लिए उपयोगी साबित होगी। जय शाह ने यह भी कहा कि मुकुहलानी को उनके साथी निदेशकों का भरोसा मिला है और वह उनके साथ मिलकर क्रिकेट को और मजबूत करने की दिशा में काम करने को लेकर उत्साहित हैं।
जय शाह ने मुकुहलानी की नियुक्ति को जिम्बाब्वे के लिए भी खास उपलब्धि बताया है। वह आईसीसी के उपाध्यक्ष बनने वाले पहले जिम्बाब्वे के व्यक्ति हैं। उन्होंने कहा कि क्रिकेट लगातार नए देशों और नए दर्शकों तक पहुंच रहा है और खेल की ओलंपिक में वापसी भी होने जा रही है। ऐसे समय में मजबूत प्रशासन और नेतृत्व की जरूरत और बढ़ जाती है।
नई जिम्मेदारी मिलने के बाद तवेंग्वा मुकुहलानी ने भी आईसीसी बोर्ड के सदस्यों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि उपाध्यक्ष के रूप में काम करने का मौका उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने जय शाह के साथ मिलकर काम करने की बात कही और कहा कि आईसीसी का मुख्य लक्ष्य क्रिकेट को आगे बढ़ाना, सदस्य देशों के लिए नए अवसर पैदा करना और नए दर्शकों तक खेल को पहुंचाना होना चाहिए।
मुकुहलानी ने क्रिकेट की वैश्विक पहुंच बढ़ने और ओलंपिक खेलों में इसकी वापसी को भी अहम बताया। बता दें कि क्रिकेट को 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक में फिर से शामिल किया गया है। इस वापसी से क्रिकेट को उन देशों में भी विस्तार का मौका मिलेगा जहां यह खेल अभी ज्यादा लोकप्रिय नहीं है। ऐसे में आईसीसी के सामने खेल को वैश्विक स्तर पर बढ़ाने के साथ अलग-अलग क्षेत्रों के क्रिकेट ढांचे को मजबूत करने की जिम्मेदारी भी है।
मौजूदा समय में मुकुहलानी की नई भूमिका अफ्रीकी क्रिकेट के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अगले कुछ वर्षों में महाद्वीप में बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों और क्रिकेट के विस्तार पर खास ध्यान रहने वाला है। 2027 विश्व कप की तैयारियों के बीच आईसीसी में उनकी मौजूदगी से क्षेत्रीय मुद्दों और विकास की जरूरतों को वैश्विक स्तर पर रखने का एक महत्वपूर्ण मंच भी मिलेगा। आईसीसी बोर्ड में उनकी नई जिम्मेदारी नवंबर 2027 तक जारी रहने वाली है।
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