भारत की स्पेस एजेंसी ISRO में नौकरी पाना हर इंजीनियर का सपना होता है। जानिए इसरो में भर्ती की योग्यता, चयन प्रक्रिया, सैलरी, काम के घंटे और नए नियमों की पूरी जानकारी।
ISRO में एंट्री का पहला कदम
इसरो में आमतौर पर इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स को एंट्री लेवल पर ‘साइंटिस्ट/इंजीनियर एससी’ के पद पर रखा जाता है। यह कोई आम नौकरी नहीं है, बल्कि देश के सबसे अहम प्रोजेक्ट्स से जुड़ने का सीधा मौका है।
इसके लिए आपके पास इलेक्ट्रॉनिक्स, मैकेनिकल, कंप्यूटर साइंस, सिविल, इलेक्ट्रिकल, रेफ्रिजरेशन एंड एयर कंडीशनिंग या आर्किटेक्चर जैसी इंजीनियरिंग स्ट्रीम में बीई या बीटेक की डिग्री होनी चाहिए। भर्ती की पूरी जिम्मेदारी इसरो सेंट्रलाइज्ड रिक्रूटमेंट बोर्ड (आईसीआरबी) के कंधों पर होती है। समय समय पर इसरो के ऑफिशियल करियर पोर्टल पर इसके नोटिफिकेशन निकाले जाते हैं। इसलिए अगर आप इस फील्ड में जाना चाहते हैं, तो पोर्टल पर नजर बनाए रखना बहुत जरूरी है।
कैसी होती है चयन प्रक्रिया?
इसरो में नौकरी पाना कोई बच्चों का खेल नहीं है। यहां सिर्फ बेहतरीन टैलेंट को ही मौका मिलता है। सिलेक्शन का तरीका दो हिस्सों में बंटा होता है –
- पहला तरीका यह है कि आपको एक लिखित परीक्षा पास करनी होती है। जो उम्मीदवार इसे क्लियर कर लेते हैं, उन्हें सीधे इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है।
- दूसरा तरीका GATE स्कोर से जुड़ा है। कुछ खास पदों के लिए सीधे आपके गेट स्कोर के आधार पर शॉर्टलिस्टिंग होती है और फिर इंटरव्यू लिया जाता है।
- फाइनल मेरिट लिस्ट हमेशा विज्ञापन में बताए गए नियमों और आपके कुल प्रदर्शन के आधार पर ही तैयार की जाती है।
ISRO वैज्ञानिक को कितनी मिलती है सैलरी?
जब बात इतनी बड़ी सरकारी एजेंसी की हो, तो सैलरी और भत्ते भी उसी हिसाब से शानदार होते हैं। एक नए ‘साइंटिस्ट/इंजीनियर एससी’ को 7वें वेतन आयोग के पे मैट्रिक्स लेवल 10 के तहत रखा जाता है। इसमें शुरुआती बेसिक पे 56,100 रुपये महीना होता है। बात सिर्फ बेसिक पे पर खत्म नहीं होती। इसके अलावा महंगाई भत्ता (डीए), हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए), ट्रांसपोर्ट अलाउंस, मेडिकल सुविधाएं और लीव ट्रैवल कंसेशन (एलटीसी) भी मिलता है। ग्रुप इंश्योरेंस, हाउस बिल्डिंग एडवांस और सरकारी पेंशन स्कीम का फायदा भी इस नौकरी को बेहद सुरक्षित और आकर्षक बनाता है। आपके शहर और पोस्टिंग के हिसाब से इन हैंड सैलरी में थोड़ा बदलाव हो सकता है।
काम के घंटे और माहौल
अगर आप सोच रहे हैं कि यह कोई आम 9 से 5 की डेस्क जॉब है, तो ऐसा बिल्कुल नहीं है। वैसे तो इसरो में आमतौर पर सरकारी दफ्तरों वाले वक्त का ही पालन होता है, लेकिन असलियत इससे थोड़ी अलग है। सैटेलाइट लॉन्च, मिशन कंट्रोल या टेस्टिंग से जुड़े वैज्ञानिकों को अक्सर तय वक्त से ज्यादा काम करना पड़ता है। जब कोई बड़ा मिशन (जैसे गगनयान) चल रहा हो, तो टीमें शिफ्टों में और जरूरत के हिसाब से रात दिन लगातार काम करती हैं। यह जॉब फिक्स शिफ्ट के बजाय मिशन की डेडलाइन और प्रोजेक्ट की अहमियत के हिसाब से चलती है।
क्या ISRO वैज्ञानिक आसानी से नौकरी छोड़ सकते हैं?
हाल ही में 100 से ज्यादा वैज्ञानिकों के इस्तीफे की खबर ने डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस को चौंका दिया था। इसके बाद नियमों में कुछ सख्ती की गई है। वैसे तो इसरो वैज्ञानिक इस्तीफा दे सकते हैं या वीआरएस ले सकते हैं, लेकिन अब यह प्रक्रिया पहले जैसी आसान नहीं रही। गगनयान जैसे क्रिटिकल और राष्ट्रीय महत्व के प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे वैज्ञानिकों के इस्तीफे अब रूटीन तरीके से मंजूर नहीं किए जाएंगे। नए नियमों के मुताबिक, सेंटर डायरेक्टर्स को ऐसे मामलों की गहराई से जांच करनी होगी और अपनी सिफारिशों के साथ इसे सीधे डिपार्टमेंट ऑफ स्पेस को भेजना होगा। इसका सीधा सा मकसद यह है कि देश के अहम मिशन बीच में न अटकें और काम लगातार चलता रहे।
करियर की उड़ान के मौके
इसरो में आपका सफर सिर्फ एक पद तक सीमित नहीं रहता। आपके काम, तजुर्बे, इंटरनल असेसमेंट और परफॉर्मेंस के आधार पर आगे प्रमोशन मिलते हैं। आप अपने करियर के दौरान सैटेलाइट तकनीक, प्रोपल्शन सिस्टम, रिमोट सेंसिंग, कम्युनिकेशन और इंसानी स्पेसफ्लाइट जैसे शानदार प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बन सकते हैं। इसके अलावा, इसरो अपने लोगों को आगे की पढ़ाई, स्पेशल ट्रेनिंग और रिसर्च के बेहतरीन मौके भी देता है। तमाम चुनौतियों और नई पाबंदियों के बावजूद, देश की सेवा करने और विज्ञान की दुनिया में अपना नाम बनाने के लिए इसरो आज भी नौजवानों की पहली पसंद बना हुआ है।
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