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Brahmaputra Underwater Tunnel: असम में ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे देश की पहली रोड-कम-रेल अंडरवाटर टनल बनने जा रही है. यह 33.7 किलोमीटर लंबी सुरंग गोहपुर और नुमालीगढ़ को जोड़ेगी और यात्रा समय को छह घंटे से घटाकर 30 मिनट कर देगी. आधुनिक तकनीक से बनने वाली यह टनल पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी और सुरक्षा को नई मजबूती देगी. शनिवार को इसके बारे में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी. मोदी सरकार ने ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे 18,662 करोड़ की ट्विन-ट्यूब टनल को मंजूरी दी. मोदी सरकार की कैबिनेट फैसले के बाद अब इसकी तुलना यूरोप में बनी समुद्र के नीचे चैनल टनल से की जा रही है. तो आइए देखते हैं भारत की पहली रोड-कम-रेल अंडरवाटर टनल बनने के बाद कैसी दिखेगी.
भारत अब इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में नई ऊंचाइयों को छू रहा है. सड़क, रेल, समंदर और नदी हर क्षेत्र में देश बड़े और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम कर रहा है. इसी कड़ी में केंद्र सरकार ने असम में ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनने वाली ट्विन-ट्यूब अंडरवाटर टनल को मंजूरी देकर इतिहास रच दिया है. मोदी सरकार ने ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे 18,662 करोड़ की ट्विन-ट्यूब टनल को मंजूरी दी है. यह प्रोजेक्ट इतना खास है कि इसकी तुलना यूरोप की मशहूर अंडरसी टनल से होने लगी है. यही वजह है कि इसे भारत की ‘वंडर टनल’ कहा जा रहा है. यह टनल न सिर्फ तकनीकी चमत्कार होगी, बल्कि पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी को पूरी तरह बदल देगी. (फोटो AI)

सरकार के इस फैसले ने यह संकेत दे दिया है कि भारत अब वैश्विक स्तर के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में कम्पटीशन करने को तैयार है. इकॉनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार असम में गोहपुर और नुमालीगढ़ को जोड़ने वाली यह 33.7 किलोमीटर लंबी टनल देश की पहली रोड-कम-रेल अंडरवाटर सुरंग होगी. इस परियोजना के जरिए यात्रा समय में भारी कटौती होगी और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी. इसीलिए इस टनल को भविष्य की इंजीनियरिंग उपलब्धियों में गिना जा रहा है. (फोटो AI)

ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनने वाली यह टनल करीब 15.79 किलोमीटर तक पानी के भीतर फैली होगी. आधुनिक टनल बोरिंग मशीन के जरिए इसका निर्माण किया जाएगा. इससे सुरक्षा और निर्माण की गति दोनों सुनिश्चित होंगी. हर 500 मीटर पर क्रॉस पैसेज बनाए जाएंगे, ताकि आपात स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके. अभी गोहपुर से नुमालीगढ़ तक का सफर करीब 240 किलोमीटर लंबा और छह घंटे का है. लेकिन टनल बनने के बाद यह दूरी घटकर लगभग 34 किलोमीटर रह जाएगी और यात्रा सिर्फ 20 से 30 मिनट में पूरी हो सकेगी. (फोटो AI)
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इस प्रोजेक्ट की तुलना यूरोप में बनी समुद्र के नीचे सुरंग चैनल टनल से की जा रही है. इसने फ्रांस और इंग्लैंड के बीच यात्रा को बेहद आसान बना दिया था. उसी तरह ब्रह्मपुत्र टनल भी ट्विन-ट्यूब डिजाइन पर आधारित होगी. इसमें एक ट्यूब में चार लेन वाली सड़क होगी और दूसरी ट्यूब में रेलवे ट्रैक बनाया जाएगा. दोनों ट्यूब्स में अत्याधुनिक वेंटिलेशन, लाइटिंग और सेफ्टी सिस्टम लगाए जाएंगे. इससे यात्रियों को सुरक्षित और आरामदायक एक्सपीरियंस मिलेगा. (फोटो Reuters)

भारत में पानी के नीचे इंफ्रास्ट्रक्चर का यह पहला प्रयास नहीं है. इससे पहले कोलकाता में हुगली नदी के नीचे मेट्रो सुरंग बनाकर देश ने तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन किया था. हालांकि वह परियोजना केवल मेट्रो ट्रेन के लिए थी. ब्रह्मपुत्र टनल पहली ऐसी सुरंग होगी जिसमें सड़क और रेलवे दोनों एक साथ संचालित होंगे. इसके अलावा देश में बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत भी अंडरसी टनल का निर्माण चल रहा है, जो भारत के बढ़ते तकनीकी आत्मविश्वास को दर्शाता है. (फोटो PTI)

अगर इस टनल की संरचना की कल्पना की जाए तो यह आधुनिक इंजीनियरिंग का शानदार उदाहरण होगी. लंबी सुरंग के अंदर एलईडी लाइट्स से रोशनी होगी. मजबूत कंक्रीट और स्टील की दीवारें पानी के दबाव को झेलने में सक्षम होंगी. सुरंग के प्रवेश द्वार पर आधुनिक टोल प्लाजा और सुरक्षा जांच व्यवस्था होगी. अंदर वेंटिलेशन सिस्टम यात्रियों को लगातार ताजी हवा उपलब्ध कराएगा. यह प्रोजेक्ट सिर्फ यात्रा को आसान नहीं बनाएगा, बल्कि पर्यटन के लिए भी बड़ा आकर्षण बन सकता है. (फोटो AI)

इस प्रोजेक्ट से असम अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड जैसे राज्यों को बड़ा लाभ मिलेगा. माल ढुलाई आसान होगी और लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी. काजीरंगा जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच बेहतर होगी. सीमा क्षेत्रों में तेज कनेक्टिविटी से सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत होगी. निर्माण कार्य के दौरान लाखों मानव-दिवस रोजगार के अवसर पैदा होंगे. यह परियोजना पूर्वोत्तर भारत को एक्ट ईस्ट नीति का मजबूत आधार बनाने में मदद करेगी. (फोटो AI)

इस परियोजना को मंजूरी केंद्र सरकार की कैबिनेट बैठक में दी गई और इसकी जानकारी केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शेयर की. यह टनल भविष्य में भारत के आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की पहचान बनेगी. ब्रह्मपुत्र नदी की सतह के नीचे विकसित यह आधुनिक मार्ग देश की तकनीकी प्रगति और विकास की नई कहानी लिखेगा. यह परियोजना पूर्वोत्तर भारत को मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाएगी. (फोटो AI)
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