वियरेबल डिवाइस का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। स्मार्टवॉच, स्मार्ट रिंग और स्मार्ट बैंड के बाद अब ऐसे उपकरणों पर काम हो रहा है, जिन्हें शरीर में इंप्लांट किया जा सके। बांह में बटन के आकार का यह डिवाइस लगातार ब्लडप्रेशर, तापमान, दिल की गतिविधि और सेहत से जुड़े दूसरे मानकों की निगरानी कर सकेगा। इन उपकरणों से शरीर में किसी गड़बड़ी का तुरंत पता लगाया जा सकता है। व्यक्तिगत एआई सिस्टम संभावित बीमारी के संकेत मिलने पर इसकी जानकारी सीधे डॉक्टर को भेज सकता है। इससे बीमारी का शुरुआती चरण में पता लगने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को भी सुविधाजनक बनाने की उम्मीद है। वर्तमान में वियरेबल डिवाइस का बाजार कारोबार 4.2 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो चुका है। भविष्य में मरीजों को बीमारी की जांच के लिए हर बार अस्पताल जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वियरेबल डिवाइस से जुटाया गया सेहत से जुड़ा डेटा पहले ही डॉक्टर तक पहुंच जाएगा। इससे डॉक्टर मरीज की स्थिति पर दूर से नजर रख सकेंगे और जरूरत के अनुसार जांच या इलाज की सलाह दे सकेंगे। 2009 में फिटबिट ट्रैकर लॉन्च होने के बाद वियरेबल डिवाइस में लोगों की रुचि तेजी से बढ़ी है। वेंचर कैपिटल फर्मों के साथ एपल, सैमसंग और गूगल जैसी बड़ी टेक कंपनियां भी इस क्षेत्र में निवेश कर रही हैं। टेक्नोलॉजी रिसर्च कंपनी आईडीसी के विश्लेषक जितेश उबरानी के मुताबिक, वियरेबल डिवाइस का अंतिम लक्ष्य हेल्थ सिस्टम का हिस्सा बनना है। इस क्षेत्र में कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा भी बढ़ रही है। स्मार्ट रिंग कंपनी औरा ने पेटेंट उल्लंघन के आरोप में सात प्रतिस्पर्धियों के खिलाफ मुकदमे किए हैं। कंपनी तीन मामलों में जीत चुकी है, जबकि चार मामले लंबित हैं। एक तिमाही में 80 लाख एपल वॉच बेचने वाली एपल भी कम से कम दो पेटेंट मामलों का सामना कर रही है। कंपनियां अब अस्पतालों और हेल्थ सर्विस प्रोवाइडर्स के साथ साझेदारी बढ़ा रही हैं। एपल ने हेल्थ डेटा कंपनी एपिक सिस्टम्स के साथ साझेदारी की है। औरा ने लगातार ग्लूकोज मॉनिटर बनाने वाली डेक्सकॉ के साथ गठजोड़ किया है। मई में गूगल ने गूगल हेल्थ पेश किया, जबकि सैमसंग ने पिछले साल जील्थ का अधिग्रहण किया था। मायो क्लिनिक हेल्थ सिस्टम के डॉ. एंड्रयू जैगिम के मुताबिक, वियरेबल डिवाइस की मदद से दुनिया में कहीं भी और किसी भी समय मरीज की निगरानी संभव होगी। इनका इस्तेमाल स्वास्थ्य के अलावा डिजिटल चाबी की तरह भी बढ़ रहा है। एपल वॉच से मैक अपने आप अनलॉक किया जा सकता है। भविष्य में चलने का तरीका, दिल की धड़कन और दूसरे बायोमेट्रिक्स सिस्टम में लॉगिन, इमारतों में प्रवेश और ऑनलाइन खरीदारी की मंजूरी के लिए इस्तेमाल हो सकते हैं। वियरेबल्स अब अधिक सक्रिय भी हो रहे हैं। वे केवल स्वास्थ्य और फिटनेस डेटा को ट्रैक करने के बजाय यह भी बताते हैं कि क्या किया जाए, कब और कैसे एक्सरसाइज करें, कब सोएं और कितना खाएं। इंडस्ट्री एनालिस्ट बेन अर्नोल्ड के अनुसार यहीं पर एपल और गूगल जैसे अधिक स्थापित ब्रांडों को बढ़त मिल सकती है। ये कंपनियां अपने इकोसिस्टम के अन्य उत्पादों से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
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