Lung Function Tests: फेफड़ों की मजबूती जानने के लिए स्पाइरोमेट्री टेस्ट किया जाता है. इससे फेफड़ों की क्षमता मापी जाती है. अगर किसी व्यक्ति की सांस फूल रही है, खांसी और सीने में जकड़न है, तो यह कमजोर फेफड़ों के संकेत हो सकते हैं. डॉक्टर की मानें तो धूम्रपान से दूरी, नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और स्वच्छ हवा फेफड़ों को स्वस्थ रखने में मददगार है.
स्पाइरोमेट्री टेस्ट से फेफड़ों की मजबूती का पता लगाया जा सकता है.
नई दिल्ली के मूलचंद हॉस्पिटल के पूर्व पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. भगवान मंत्री ने News18 को बताया कि फेफड़े हमारे शरीर के सबसे जरूरी ऑर्गन्स में शुमार होते हैं, लेकिन अक्सर लोग तब तक फेफड़ों पर ध्यान नहीं देते, जब तक सांस लेने में तकलीफ, खांसी या थकान जैसी समस्याएं सामने नहीं आती हैं. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आपके फेफड़े कितने मजबूत हैं. फेफड़ों की क्षमता और कार्यक्षमता जांचने के लिए सबसे सामान्य और विश्वसनीय टेस्ट स्पाइरोमेट्री (Spirometry) है. इसे लंग फंक्शन टेस्ट भी कहा जाता है. इस टेस्ट में व्यक्ति को एक मशीन में गहरी सांस लेकर जोर से छोड़नी होती है. इससे यह मापा जाता है कि फेफड़े कितनी हवा अंदर ले सकते हैं और कितनी तेजी से बाहर निकाल सकते हैं. यह टेस्ट अस्थमा, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) जैसी बीमारियों की पहचान में बेहद उपयोगी है.
डॉक्टर ने बताया कि अगर किसी मरीज को फेफड़ों से जुड़ी समस्या होती है, तब पीक फ्लो मीटर टेस्ट और गैस डिफ्यूजन टेस्ट भी किए जाते हैं. अगर स्पाइरोमेट्री के परिणाम सामान्य से कम आते हैं, तो यह फेफड़ों की कमजोरी या किसी अवरोध का संकेत हो सकता है. लंबे समय तक स्मोकिंग करने वालों में फेफड़ों की क्षमता धीरे-धीरे घट सकती है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के अनुसार वायु प्रदूषण भी फेफड़ों की कार्यक्षमता को कम करने का बड़ा कारण है. फेफड़ों की मजबूती केवल सांस लेने की क्षमता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपकी ओवरऑल हेल्थ से जुड़ी है. अगर आपको बार-बार खांसी, सांस फूलना, सीने में जकड़न या असामान्य थकान महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें और आवश्यक जांच कराएं.
एक्सपर्ट की मानें तो फेफड़ों को हेल्दी और मजबूत रखने के लिए लाइफस्टाइल में बदलाव बेहद जरूरी है. सबसे पहले स्मोकिंग और तंबाकू से पूरी तरह दूरी बनानी चाहिए. नियमित एरोबिक एक्सरसाइज जैसे तेज चलना, दौड़ना, तैराकी या साइक्लिंग फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने में मदद करती हैं. गहरी सांस लेने के अभ्यास और प्राणायाम से भी श्वसन मांसपेशियां मजबूत होती हैं. घर और कार्यस्थल पर स्वच्छ हवा बनाए रखना, धूल और धुएं से बचना और जरूरत पड़ने पर मास्क का उपयोग करना भी फायदेमंद है. बैलेंस्ड डाइट भी फेफड़ों की सेहत में अहम भूमिका निभाती है. एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फल और सब्जियां जैसे संतरा, बेरीज, पालक और गाजर फेफड़ों की कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में मदद करती हैं.
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अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें
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