ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स में हरियाणा के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 11 मेडल अपने नाम किए हैं। इनमें 7 गोल्ड, 2 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज शामिल हैं। सबसे ज्यादा दबदबा बॉक्सिंग में रहा, जहां हरियाणा के खिलाड़ियों ने 6 गोल्ड और 1 सिल्वर जीता। वहीं, पैरा शॉटपुट में शर्मिला धनखड़ ने गोल्ड, डिस्कस थ्रो में सीमा कालीरमन और जैवलिन थ्रो में यशवीर सिंह ने ब्रॉन्ज, जबकि नीरज चोपड़ा ने सिल्वर मेडल जीता। शनिवार को प्रिया घनघस के धनाना गांव में ग्रामीणों ने उनके गोल्ड मेडल की खुशी में पटाखे फोड़े। वहीं, हिसार के भेरिया गांव में अंकुश पंघाल की जीत पर परिवार और ग्रामीणों ने जश्न मनाया। गोल्ड जीतने के बाद प्रिया ने कहा, “कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारी के दौरान मैंने वजन मेंटेन रखने के लिए मिठाई खाना छोड़ दिया था। अब घेवर का सीजन है, इसलिए मैं मिठाई खा पाऊंगी।” हरियाणा में जश्न की तस्वीरें… गोल्ड जीतने वाले बॉक्सरों ने क्या कहा… फाइनल में हारे नरेंद्र बेरवाल हांसी के बॉक्सर नरेंद्र बेरवाल का पुरुष +90 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में इंग्लैंड के डामर थॉमस से मुकाबला था। फाइनल में हारने के बाद नरेंद्र को सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा। अंकुश ने इंग्लैंड के बॉक्सर को हराकर जीता गोल्ड हिसार के भेरिया गांव निवासी अंकुश पंघाल ने 80 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में इंग्लैंड के डिमेजी शिट्टू को हराकर गोल्ड मेडल जीत लिया। दोनों के बीच मुकाबला काफी रोमांचक रहा, लेकिन आखिर में अंकुश ने बाजी मार ली। इससे पहले सेमीफाइनल में उन्होंने कनाडा के जोशुआ ओफोरी को 5-0 से हराकर फाइनल में जगह बनाई थी। अंकुश ने वर्ष 2017 में महज 11 साल की उम्र में बॉक्सिंग शुरू की थी। उनके पिता सुरेश उन्हें गांव से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित कोचिंग सेंटर में रोज प्रैक्टिस के लिए लेकर जाते थे। आखिरी क्षणों में पंच लगाकर जीते सचिन सिवाच सचिन सिवाच ने पुरुषों के 60 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में नामीबिया के मुक्केबाज को ट्राईगेन मॉर्निंग नडेवेलो को 3-2 से हराया। दूसरे राउंड में रेफरी ने सचिन पर एक अंक की पेनल्टी लगाई थी। ऐसे में आखिरी राउंड में उनका 4-1 से जीतना जरूरी हो गया था। आखिरी राउंड भी बराबरी पर था, लेकिन सचिन में आखिरी क्षणों में दमदार पंच लगाया, इससे नडेवेलो लड़खड़ा गए। इसी पंच ने सचिन की जीत तय कर दी। साक्षी के पिता बोले- एशियन गेम्स में भी गोल्ड जीतेगी साक्षी चौधरी ने यूनानिमस डिसीजन 5-0 से जीत हासिल की। साक्षी ने मुकाबले के दौरान बेहतरीन रणनीति अपनाई। उन्होंने बाएं हाथ से प्रतिद्वंद्वी के पंचों को रोका और दाएं हाथ से लगातार सटीक जवाबी हमले किए। उनके कई पंच सीधे प्रतिद्वंद्वी के चेहरे पर लगे, जिससे मुकाबले में उनकी पकड़ मजबूत होती गई। गोल्ड जीतने के बाद साक्षी चौधरी के पिता मनोज कुमार ने कहा- साक्षी ने पूरे देश का नाम रोशन किया है। साक्षी ने बहुत मेहनत की है। मुझे पूरा भरोसा है कि वह एशियन गेम्स और ओलिंपिक में भी गोल्ड मेडल जीतेगी। वहीं साक्षी की मां शीला ने कहा कि मैं आज बहुत खुश हूं। शुरू से साक्षी बहुत मेहनती थी। कभी कोई मुश्किल नहीं आई। उसके पापा सुबह और शाम प्रैक्टिस के लिए लेकर जाते थे। स्प्लिट डिसीजन से जीतीं प्रिया घनघस महिलाओं के 60kg फाइनल मुकाबले में प्रिया घनघस ने स्प्लिट डिसीजन (4-1) से जीत हासिल की। प्रिया ने मुकाबले की तेज शुरुआत की, लेकिन उनकी प्रतिद्वंद्वी अल-अहमदियेह ने भी कुछ सटीक पंच लगाकर जोरदार जवाब दिया। फाइनल राउंड में दोनों मुक्केबाजों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। प्रिया थकी हुई नजर आ रही थीं, लेकिन उन्होंने लगातार आक्रामक रुख बनाए रखा और दमदार पंच लगाती रहीं। प्रिया की मां मीरा ने कहा- मुझे बहुत खुशी है कि प्रिया ने देश के लिए मेडल जीता है। यह खुशी बहुत बड़ी है। उसके लौटने पर हम उसका जोरदार स्वागत करेंगे। 54 किलो भारवर्ग में प्रीति ने जीता गोल्ड प्रीति पंवार का फाइनल मुकाबला कनाडा की एस.एस. डेलगाडो से हुआ। प्रीति ने पहले राउंड से ही डेलगाडो पर बढ़त बना रखी थी। रैफरी ने उन्हें 5-0 से विजेता घोषित किया। इसके पहले सेमाफाइनल में उन्होंने जाम्बिया की कैथरीन म्वापे को 5-0 से हराया था। सेमाफाइल के तीनों राउंड में प्रीति के पंच कैथरीन पर हावी रहे। दूसरा राउंड शुरू होते ही उन्होंने अटैकिंग गेम खेलते हुए कई शानदार पंच लगाए थे। प्रीति की जीत के बाद पिता सोमबीर ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा, “स्कॉटलैंड रवाना होने से पहले उसने हमसे कहा था कि चाहे कुछ भी हो जाए, वह देश के लिए मेडल जरूर जीतकर आएगी। उसने अपना वादा पूरा कर दिखाया।” उनकी मां शलीन ने कहा- बेटी के घर आने पर चूरमा और खीर खिलाएंगी। जैस्मिन ने 5-0 से जीता फाइनल जैस्मिन लंबोरिया का फाइनल मुकाबला दोपहर 3:45 हुआ। अपोनेंट एम. वाल्स को उन्होंने 5-0 से हराकर ये मैच जीता। इससे पहले सेमीफाइनल में उन्होंने लेसोथो की रापेलैंग मासेलेला को RAC से हराया था। फाइनल के शुरुआती दो राउंड में जैस्मिन पूरी तरह से हावी रही। इसके बाद तीसरे राउंड में डिफेंसिव और अटैकिंग खेल दिखाया। जैस्मिन के गोल्ड मेडल जीतने के बाद उनके पिता जयवीर सिंह ने कहा- ‘हम बहुत खुश हैं, बेटी ने देश के लिए गोल्ड मेडल जीता है। पहले से ही जैस्मिन के जीतने की उम्मीद थी। मैच के बीच में थोड़ा नर्वसनेस जरूर थी। अब भिवानी आने पर बेटी का स्वागत करेंगे। —————– यह खबर भी पढ़ें… ‘तेज हवा के कारण पिछड़ा नीरज, सिल्वर जीतने पर खुशी’:पिता बोले- पिछले दिनों चोट लगी थी; 85.41M थ्रो कर भिवानी के यशवीर ने जीता ब्रॉन्ज ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में जैवलिन थ्रो में नीरज चोपड़ा ने सिल्वर मेडल जीता है। नीरज ने अपने दूसरे प्रयास में 85.83 मीटर का थ्रो कर अपना सीजन बेस्ट दिया। (पूरी खबर पढ़ें)
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