ड्राफ्ट के तहत, टू-व्हीलर सड़क एम्बुलेंस की खास फिटनेस जांच होगी। इसमें पेशेंट यूनिट की बनावट की मजबूती, टायर और पहिए, इमरजेंसी वॉर्निंग लाइट, स्ट्रेचर लगाने और लॉक करने का सिस्टम, मरीज को सुरक्षित रखने वाली बेल्ट, स्ट्रेचर लोड करने का सिस्टम और सही फायर एक्सटिंग्विशर की मौजूदगी की जांच शामिल होगी।
ड्राफ्ट नियमों में क्या प्रस्ताव हैं?
संशोधन के ड्राफ्ट के तहत, टू-व्हीलर सड़क एम्बुलेंस की खास फिटनेस जांच होगी। इसमें पेशेंट यूनिट की बनावट की मजबूती, टायर और पहिए, इमरजेंसी वॉर्निंग लाइट, स्ट्रेचर लगाने और लॉक करने का सिस्टम, मरीज को सुरक्षित रखने वाली बेल्ट, स्ट्रेचर लोड करने का सिस्टम और सही फायर एक्सटिंग्विशर की मौजूदगी की जांच शामिल होगी। इस प्रस्ताव में इन व्हीकल के लिए रिन्यू किए गए फिटनेस सर्टिफिकेट की वैलिडिटी भी 2 साल तय की गई है।
टू-व्हीलर एम्बुलेंस से जुड़ीं 8 मुख्य बातें
1. टू-व्हीलर एंबुलेंस से पेशेंट यूनिट या साइड यूनिट मजबूती से जुड़ी होनी चाहिए।
2. टायर सही हवा और अच्छी स्थिति में हों, उनमें कोई कट या घिसाव न हो।
3. एंबुलेंस पर लगी इमरजेंसी वॉर्निंग लाइट्स जैसे फ्लैशर या बीकन लैंप सही ढंग से काम कर रहे हों।
4. स्ट्रैचर सुरक्षित रूप से लगा हो और मजबूत हो।
5. सफर के दौरान स्ट्रेचर हिले नहीं, इसके लिए लॉकिंग मैकेनिज्म सही होना चाहिए।
6. मरीज को बांधने वाली सेफ्टी बेल्ट्स चालू हालत में होनी चाहिए।
7. मरीज को चढ़ाने-उतारने का सिस्टम सही तरह से काम करता हुआ होना चाहिए।
8. एंबुलेंस में चालू हालत का अग्निशामक यंत्र भी लगा होना चाहिए।
नियम लागू होने की समय-सीमा
MoRTH ने प्रस्ताव दिया है कि टू-व्हीकल एम्बुलेंस पर लगी टॉप-माउंटेड वॉर्निंग लाइट 1 अक्टूबर, 2026 से AIS:209 (पार्ट 1) के नियमों का पालन करें। 1 अक्टूबर, 2027 से नई बनी सभी L2-कैटेगरी की टू-व्हीलर एम्बुलेंस को AIS:209 के सभी स्टैंडर्ड को पूरा करना होगा। इन व्हीकल को सिर्फ संबंधित राज्य सरकारों द्वारा नोटिफाई किए गए इलाकों में ही चलाने की इजाजत होगी।
टू-व्हीलर एंबुलेंस क्या है?
टू-व्हीलर एंबुलेंस एक खास तौर से मोटरसाइकिल के साथ तैयार की गई एंबुलेंस है। जिसमें पोर्टेबल ऑक्सीजन सिलेंडर, फर्स्ट-एड किट और लाइफ सेफ्टी इक्युपमेंट लगे होते हैं। यह भारी ट्रैफिक या संकरी गलियों में फंसे मरीज तक तुरंत पहुंचकर शुरुआती इलाज (फर्स्ट-एड) देने का काम करती है। उम्मीद है कि इस तरह की एंबुलेंस से मरीज को जल्द अस्पताल पहुंचाया जा सकेगा।
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