Google ने अमेरिका की दर्जनों बड़ी वित्तीय संस्थाओं और कंपनियों को चेतावनी दी है। दरअसल, हैकर्स फेक IT सपोर्ट फोन कॉल और फिशिंग वेबसाइट्स के जरिए इन्हें निशाना बना रहे हैं। गलती से भी यह कॉल उठाया तो कंपनियों को करोड़ों का चूना लग सकता है।
कर्मचारियों से हासिल करते हैं लॉगिन डिटेल्स
इस कैंपेन का मकसद कर्मचारियों को धोखा देकर उनके लॉगिन क्रेडेंशियल और मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) कोड हासिल करना था। खबरों के मुताबिक, इन हमलों में ब्लैकस्टोन, अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट, KKR, बेन कैपिटल, ब्रिजवाटर एसोसिएट्स, मूडीज और कई अन्य कंपनियों को निशाना बनाया गया; इसके लिए उन्हें जरूरी टेक्निकल सपोर्ट देने का झांसा दिया गया।
कैसे काम करता है यह स्कैम
रिपोर्ट के मुताबिक, हैकर्स कर्मचारियों से उनके पर्सनल मोबाइल फोन पर संपर्क करते हैं और खुद को उनकी कंपनी के IT हेल्प डेस्क का सदस्य बताते हैं। कुछ मामलों में, कॉल पर कंपनी का सही हेल्प डेस्क नंबर भी दिखता है, जिससे यह स्कैम असली लगता है।
कॉल करने वाले दावा करते हैं कि पासकी या मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन सेटिंग को अपडेट करने की तुरंत जरूरत है और वे पीड़ितों को ऐसी फेक वेबसाइट्स पर भेजते हैं जिनके नाम असली कंपनी के लॉगिन पेज जैसे लगते हैं। अगर कोई कर्मचारी अपना यूजरनेम, पासवर्ड और वेरिफिकेशन कोड डालता है, तो हैकर्स फोन कॉल खत्म होने से पहले ही तुरंत अकाउंट पर कब्जा कर सकते हैं।
विशेष रूप से, गूगल ने कैंपेन में कथित रूप से शामिल कई हैकर ग्रुप की पहचान की, जिनमें रेडैक्ट, पिंक, फाल्कन और हेलिक्स शामिल हैं।
हैकर्स के निशाने पर थी यह बड़ी कंपनियां
यह कैंपेन मुख्य रूप से बड़े वित्तीय ऑर्गेनाइजेशन्स और निजी इक्विटी फर्मों पर केंद्रित है। रॉयटर्स ने द्वारा देखें गए डेटा में जिन कंपनियों के नाम हैं, उनमें ब्लैकस्टोन, ब्रिजवाटर एसोसिएट्स, अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट, बेन कैपिटल, केकेआर, टीपीजी, सीएमई ग्रुप, क्लियरलेक कैपिटल और मूडीज जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं।
गूगल के थ्रेट इंटेलिजेंस ग्रुप में प्रिंसिपल थ्रेट एनालिस्ट ऑस्टिन लार्सन ने कहा कि इसके पीछे का मकसद सीधा-सा है। लार्सन ने कहा कि असल में यह बात पैसों की है। हैकर्स सोचते हैं कि कंपनियों के पास इतना संवेदनशील डेटा होता है कि अगर वह चोरी हो जाए, तो कंपनियां उसे बचाने के लिए पैसे देंगी। गूगल गूगल ने यह भी बताया कि हैकर्स ने कंपनी के लॉगिन पेज जैसे दर्जनों नकली वेबसाइट बनाईं।
यह कैंपेन वित्तीय फर्मों तक सीमित नहीं था। रॉयटर्स द्वारा समीक्षा किए गए आंकड़ों के अनुसार, हैकर्स ने पिछले पांच हफ्तों में 200 से अधिक कंपनियों के लिए फिशिंग वेबसाइटें बनाईं।
रिपोर्ट के अनुसार, अन्य ऑर्गेनाइजेशन्स में उबर, जिलो, लेवी स्ट्रॉस के साथ-साथ पॉल हेस्टिंग्स और ग्रीनबर्ग ट्रैउरिग जैसी लॉ फर्में भी निशाने पर थीं।
सुरक्षित रहने के लिए गूगल ने दी यह सलाह
गूगल सलाह देता है कि कंपनियां अपने कर्मचारियों को ट्रेनिंग दें, ताकि वे अचानक आने वाले IT रिक्वेस्ट को आधिकारिक चैनल से चेक करें। पासवर्ड या ऑथेंटिकेशन कोड फोन पर कभी न बताएं, भले ही कॉल करने वाला असली लगे।
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