तेजी के पीछे कारण
अमेरिकी बॉन्ड बाजार की हलचल ने भी सोने को सपोर्ट दिया है। हाल में लंबी अवधि वाले अमेरिकी सरकारी बॉन्ड में तेज बिकवाली के कारण 30 साल के Treasury Yield के करीब 5.33 फीसदी तक पहुंचने की बात सामने आई। बढ़ता अमेरिकी सरकारी कर्ज, लगातार राजकोषीय घाटा, महंगाई की आशंका और भारी मात्रा में Treasury जारी होने से निवेशक लंबी अवधि के बॉन्ड रखने के लिए ज्यादा जोखिम प्रीमियम मांग रहे हैं। सामान्य तौर पर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से सोने पर दबाव पड़ता है, क्योंकि सोना ब्याज नहीं देता। लेकिन अगर यील्ड में बढ़ोतरी सरकारी कर्ज और महंगाई जैसे जोखिमों के कारण हो रही हो, तो निवेशक सोने को वैकल्पिक सुरक्षित संपत्ति के तौर पर खरीद सकते हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सोने की तेजी अमेरिकी फेड के ब्याज दर फैसले को प्रभावित करेगी? एक्सपर्ट की नजर फेड चेयर के आगामी जैक्सन होल संबोधन पर है। अगर फेड की भाषा नरम या संतुलित रहती है और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद मजबूत होती है, तो डॉलर पर दबाव आ सकता है और सोने को आगे भी फायदा मिल सकता है। वहीं, अगर फेड महंगाई को लेकर सख्त रुख अपनाता है और ब्याज दरों में कटौती की संभावना कमजोर होती है, तो डॉलर मजबूत हो सकता है, जिससे सोने की तेजी पर कुछ दबाव आ सकता है।
भारतीय बाजार में रुपये की चाल भी सोने की कीमत के लिए महत्वपूर्ण है। डॉलर के मुकाबले रुपये की मजबूती से अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमत का घरेलू असर कुछ कम हो सकता है। एक्सपर्ट के मुताबिक रुपये के लिए 95.75-95.80 का रेंज महत्वपूर्ण है, जबकि 95.6-95.5 के आसपास सपोर्ट देखा जा रहा है। सोने के तकनीकी स्तरों की बात करें तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में $4,620-$4,630 प्रति औंस का रेंज अहम रेजिस्टेंस माना जा रहा है। इसके ऊपर निर्णायक ब्रेकआउट मिलने पर मध्यम अवधि में कीमत करीब $4,900 तक जाने की संभावना जताई गई है।
घरेलू बाजार में ₹1,54,000 प्रति 10 ग्राम महत्वपूर्ण सपोर्ट है। वहीं, ₹1,62,700 के ऊपर टिकाऊ ब्रेकआउट आने पर सोना आने वाले महीनों में ₹1.70 लाख-₹1.72 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर तक पहुंच सकता है। हालांकि, ये एक्सपर्ट के अनुमान हैं, निश्चित भविष्यवाणी नहीं, इसलिए निवेशकों को बाजार के जोखिम और अपनी निवेश क्षमता को ध्यान में रखकर फैसला लेना चाहिए।
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