गाजियाबाद की दरोगा अस्मिता डे ने कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 में गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने जूडो में कनाडा की खिलाड़ी को मात दी। दैनिक भास्कर से बातचीत में अस्मिता डे ने कहा- पापा साइकिल मैकेनिक थे, उसी से घर चलता था। मैंने जीवन में पापा को बहुत संघर्ष करते
एक समय सप्लीमेंट के लिए पैसे नहीं होते थे। पापा ने दूसरों से उधार पैसे मांगकर मुझे आगे बढ़ाया। अब आगे मुझे मम्मी के लिए यूपी में घर बनाना है। पापा तो नहीं रहे, लेकिन ये उन्हीं का सपना है, जिसे मैं पूरा करूंगी। अभी हम किराए पर रहते हैं। पढ़िए सवाल-जवाब…
2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में जाने से पहले गाजियाबाद पुलिस कमिश्नर जे. रविंदर गौड ने शुभकामनाएं देकर हौसला बढ़ाया था।
सवाल: क्या आपने सोचा था कि गोल्ड मिलेगा? जवाब: जब मैं कॉमनवेल्थ के लिए रवाना हुई। तब मैंने सोचा था कि हां बिल्कुल गोल्ड जीतूंगी। मैंने सोचा था कि गोल्ड लेकर ही जाना है। अगर नहीं सोचती, तो मुझे गोल्ड नहीं मिलता। गाजियाबाद में मेरी 28 जुलाई, 2023 को कॉन्स्टेबल के पद पर जॉइनिंग हुई थी। पुलिस लाइन में पोस्टिंग मिली। नेशनल में गोल्ड जीतने के बाद आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन दिया गया। 23 मार्च, 2026 को दरोगा बनी।
सवाल: गोल्ड मेडल जीतने का श्रेय किसे देना चाहती हैं? जवाब: गोल्ड मेडल का श्रेय मैं अपने मम्मी-पापा और सीनियर को देना चाहती हूं। यूपी पुलिस ने मेरी बहुत हेल्प की है। अगर सीएम योगी मुझे नौकरी नहीं देते, तो मेरे लिए यह आसान नहीं था। सीएम का बहुत-बहुत धन्यवाद। यूपी में मुझे जॉब मिली और फिर प्रमोशन दिया गया। सोचा नहीं था कि इतना जल्दी प्रमोशन मिलेगा। सोचा था कि गोल्ड जीतेंगे, तब जाकर प्रमोशन मिलेगा। तब ही डीएसपी या तहसीलदार वगैरह बनेंगे। अब भगवान जो भी दे देंगे, वही मुझे मंजूर है।

अस्मिता डे के पिता अर्जुन कुमार डे का निधन दिसंबर 2023 में हो गया था।
सवाल: जीवन में कौन-सा दौर सबसे संघर्ष वाला रहा? जवाब: अक्टूबर- 2023 में जब मेरे घुटने में चोट लगी, उसके 2 महीने बाद पापा की मौत हो गई। पापा और मम्मी ने मुझे बहुत आगे बढ़ाया। पापा हमेशा सपोर्ट करते थे। मैं कई बार हार जाती थी। उसके बाद भी वह सपोर्ट करते थे कि हार गई तो कोई बात नहीं, जीत भी होगी। हारने पर भी पापा ने कभी निराश नहीं होने दिया, उनका सपोर्ट ही मुझे यहां तक लाया। मम्मी-पापा ने मुझे हमेशा आगे बढ़ाया। मम्मी को स्पोर्ट्स के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। अभी परिवार में मम्मी, मैं, एक भाई और बड़ी बहन हैं। बहन की शादी हो चुकी है।

बेटी के गोल्ड मेडल जीतने के बाद अस्मिता डे की मां भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि अगर आज अस्मिता के पिता जीवित होते, तो अपनी बेटी की इस ऐतिहासिक जीत पर सबसे ज्यादा गर्व उन्हें ही होता।
सवाल: बचपन में किस तरह से तैयारियां कीं, शुरुआत कैसे हुई? जवाब: जब मैं छोटी थी, तब हम त्रिपुरा में अपने गांव में रहते थे। मेरे पापा ही मुझे स्कूल छोड़ने जाते थे। मैं बचपन में दौड़ की तैयारी करती थी। जिला स्तर पर भी बहुत मेडल लाए। उसके बाद पापा भी हौसला बढ़ाते गए कि और मेहनत करो, आगे बढ़ो। लेकिन, बाद में मैंने जूडो चुना। मैंने स्टेट में जीत हासिल की तो परिवार में खुशी आई।
सवाल: वेट कंट्रोल के लिए क्या भूखे रहना पड़ा? जवाब: मुझे बहुत भूखा रहना पड़ा। मीठा भी छोड़ना पड़ा। जब दिल्ली में थी, तब कोच ने कहा कि अब गोल्ड आने के बाद ही मीठा खाना। महज 2 चम्मच चावल खाने पड़ते थे। गेम्स के 10 दिन पहले खाना छोड़ना पड़ा। पानी भी बहुत कम पीना पड़ता था। वेट कंट्रोल करने के लिए बहुत कुछ छोड़ना पड़ा। वर्कआउट अधिक करना पड़ा। क्योंकि रैंडम वेट-इन (वजन जांच) में तय वजन 50 किलो से कम होना चाहिए। मेरा वजन 50 किला 300 ग्राम था। काफी वर्कआउट के बाद वजन कम किया।

अस्मिता डे ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिलाओं के 48 किग्रा जूडो इवेंट में कनाडा की हेइडी क्वाच को हराकर गोल्ड जीता।
सवाल: स्पोर्ट्स के लिए संघर्ष कैसा रहा? जवाब: दिसंबर- 2025 में ब्रेन स्ट्रोक से पापा का निधन हो गया। कभी सोचा नहीं था, पापा की ऐसे डेथ हो जाएगी। पिता के जाने के बाद मुझे लगा कि सब कुछ खत्म हो गया है। लेकिन, 2 महीने बाद एशियन गेम्स के ट्रायल्स हुए, जिसमें मैं नेशनल स्तर पर पहले स्थान पर रही।

अस्मिता को काशी की मिठाई बहुत पसंद है
अस्मिता डे का बनारस से भी लगाव है। खाली समय में वह बनारस में अपने दोस्त और जूडो खिलाड़ी विजय यादव के साथ सिगरा स्टेडियम में अभ्यास करती हैं। विजय चोलापुर के सुलेमापुर गांव के रहने वाले हैं। इस समय लखनऊ में बीकेडी तहसील में नायब तहसीलदार के पद पर तैनात हैं। विजय ने बताया- अस्मिता 15 दिन बाद बनारस आएंगी। अस्मिता को बनारस की मिठाई बहुत पसंद है। वह यहां जब आती हैं, तो मिठाई रोज खाती हैं।
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गाजियाबाद की दरोगा अस्मिता डे ने शुक्रवार को कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 में गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने जूडो में कनाडा की खिलाड़ी को मात दी। गोल्ड जीतने के बाद वह भावुक हो गईं। उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। पढ़ें पूरी खबर…
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