बता दें कि अलेक्जेंडर ज्वेरेव लंबे समय से दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों में गिने जाते रहे हैं। उन्होंने कई प्रतिष्ठित प्रतियोगिताएं जीती हैं, जिनमें मास्टर्स स्तर की प्रतियोगिताएं, वर्षांत चैंपियनशिप और टोक्यो ओलंपिक का स्वर्ण पदक भी शामिल है। हालांकि ग्रैंड स्लैम खिताब लगातार उनसे दूर रहा था।
गौरतलब है कि पिछले दो दशकों में पुरुष टेनिस पर कुछ चुनिंदा खिलाड़ियों का दबदबा रहा है। रोजर फेडरर, राफेल नडाल, नोवाक जोकोविच, कार्लोस अल्कारेज और यानिक सिनर जैसे खिलाड़ियों ने मिलकर अधिकांश बड़े खिताब अपने नाम किए हैं। ऐसे दौर में किसी नए खिलाड़ी के लिए ग्रैंड स्लैम जीतना बेहद कठिन माना जाता है।
मौजूद जानकारी के अनुसार फ्रेंच ओपन 2026 में ज्वेरेव को कुछ परिस्थितियों का भी फायदा मिला। पिछले विजेता कार्लोस अल्कारेज चोट के कारण प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले सके। वहीं यानिक सिनर, जिन्हें खिताब का सबसे बड़ा दावेदार माना जा रहा था, दूसरे दौर में ही बाहर हो गए। अनुभवी खिलाड़ी नोवाक जोकोविच भी खिताब की दौड़ से बाहर हो गए थे।
ज्वेरेव ने फाइनल तक पहुंचने के दौरान कई खिलाड़ियों को हराया। उनके सामने रास्ते में कोई शीर्ष दस खिलाड़ी नहीं आया और फाइनल में उनका मुकाबला दुनिया के 14वें वरीय फ्लावियो कोबोली से हुआ, जो अपने पहले ग्रैंड स्लैम फाइनल में खेल रहे थे।
हालांकि फाइनल मुकाबला ज्वेरेव के लिए आसान नहीं रहा। उन्होंने शानदार शुरुआत करते हुए पहला सेट 6-1 से जीत लिया, लेकिन इसके बाद उनका खेल लड़खड़ाता नजर आया। कुछ समय के लिए ऐसा लगा कि वह एक बार फिर दबाव में बिखर सकते हैं। दूसरी ओर कोबोली ने भी शानदार संघर्ष किया और मुकाबले को निर्णायक सेट तक पहुंचा दिया।
मुकाबले के अंतिम चरण में हालांकि अनुभव ने बड़ा अंतर पैदा किया। कोबोली की ऊर्जा कम पड़ती दिखी और ज्वेरेव ने निर्णायक सेट 6-1 से जीतकर आखिरकार ट्रॉफी अपने नाम कर ली।
मैच के बाद भावुक ज्वेरेव ने कहा कि उन्होंने इसी कोर्ट पर अपने जीवन के सबसे अच्छे और सबसे कठिन पल देखे हैं। उन्होंने याद किया कि कुछ वर्ष पहले इसी मैदान पर गंभीर चोट लगी थी और एक ग्रैंड स्लैम फाइनल भी गंवाना पड़ा था। लेकिन अब अंत सुखद रहा है।
गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय टेनिस महासंघ की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में करोड़ों लोग टेनिस खेलते हैं, लेकिन ओपन युग में केवल 59 पुरुष खिलाड़ी ही ग्रैंड स्लैम एकल खिताब जीत पाए। ऐसे में ज्वेरेव का यह खिताब उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गया।
अब टेनिस जगत में चर्चा इस बात की है कि क्या यह जीत केवल एक विशेष अवसर थी या फिर ज्वेरेव आने वाले वर्षों में कार्लोस अल्कारेज और यानिक सिनर जैसे खिलाड़ियों को लगातार चुनौती देते हुए बड़े खिताबों की दौड़ में बने रहेंगे। फिलहाल इतना तय है कि उन्होंने अपने करियर की सबसे बड़ी बाधा को पार कर लिया है।
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