पश्चिम बंगाल की राजनीति के प्रमुख चेहरों में से एक और पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री मुकुल रॉय का निधन हो गया है. वे 71 वर्ष के थे. उनके बेटे शुभ्रांशु रॉय ने इसकी पुष्टि की. मुकुल रॉय ने रविवार रात करीब 1:30 बजे कोलकाता के अपोलो अस्पताल में अंतिम सांस ली. अस्पताल में भर्ती होने के बाद उनकी हालत लगातार नाजुक बनी हुई थी और कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे.
गंभीर बीमारियों से लड़ रहे थे मुकुल रॉय
पिछले कुछ सालों से मुकुल रॉय की तबीयत खराब चल रही थी. 2023 में डॉक्टरों ने पुष्टि की थी कि वे पार्किंसंस रोग और डिमेंशिया से पीड़ित हैं. ब्रेन में हाइड्रोसेफलस की समस्या के कारण ब्रेन सर्जरी भी हुई थी. 2024 में भी कई बार अस्पताल में भर्ती हुए, जिसमें सिर में चोट और अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याएं शामिल थीं. हाल ही में अस्पताल में भर्ती होने के बाद उनकी हालत क्रिटिकल बताई गई थी. बेटे शुभ्रांशु ने कहा, ‘वह कई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे थे.’
मुकुल रॉय का राजनीतिक सफर कैसा रहा था?
मुकुल रॉय का जन्म 17 अप्रैल 1954 को उत्तर 24 परगना जिले के कांचरापाड़ा में हुआ था. उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा यूथ कांग्रेस से शुरू की. 1998 में ममता बनर्जी के साथ मिलकर अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) की स्थापना में अहम भूमिका निभाई. वे ममता बनर्जी के सबसे करीबी सहयोगी रहे और TMC के महासचिव बने. 2006 में राज्यसभा सदस्य चुने गए.
- 2009 से 2012 तक राज्यसभा में TMC के नेता रहे.
- 2012 में मनमोहन सिंह सरकार में केंद्रीय रेल मंत्री बने.
- 2011 में TMC की सत्ता में आने के बाद उन्होंने पार्टी को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई.
- कई CPM और कांग्रेस नेताओं को TMC में लाने में सफल रहे.
2017 में TMC से अलग होकर नवंबर में बीजेपी में शामिल हो गए. बीजेपी में रहते हुए उन्होंने कई TMC नेताओं को पार्टी में लाने में मदद की, जिससे 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी को बंगाल में 18 सीटें मिलीं. 2021 विधानसभा चुनाव में बीजेपी के टिकट पर कृष्णानगर उत्तर सीट से जीते, लेकिन जून 2021 में फिर TMC में लौट आए. 13 नवंबर 2025 को कलकाता हाईकोर्ट ने दल-बदल कानून के तहत उन्हें विधायक पद से अयोग्य घोषित कर दिया था.
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