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दस्तावेज के मुताबिक भले ही राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग दुनिया के सामने दोस्ती दिखाते हैं लेकिन रूस को अंदर ही अंदर डर था कि चीन उसकी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है। आठ पन्नों के इस दस्तावेज में रूस ने चीन को दुश्मन तक कहा है। और अब रूस को चीन से जो डर था वो सच साबित हो गया है। चीन ने रूस के दक्षिणी और पूर्वी इलाके में घेराबंदी कर ली है। सबसे पहले देखिए कि रूस के पूर्वी इलाके में चीन ने क्या किया है। दरअसल चीन ने रूस के व्लादीक शहर और अमूर ओब्लास्ट इलाके के एक आइलैंड को अपना बता दिया है। चीन ने कहा है कि यह दोनों इलाके 150 साल पहले हमारे थे और अब हमें यह वापस चाहिए। 2023 में जब रूस यूक्रेन से भयंकर जंग लड़ रहा था, उसी बीच चीन के पर्यावरण मंत्रालय ने एक सरकारी नक्शा जारी किया था। इस नक्शे में रूस के कई शहरों को चीनी नामों के साथ दिखाने का निर्देश दिया गया था। इसी नक्शे में रूस का पूर्वी शहर व्लादिवोस्तोक भी शामिल था।
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आपको बता दें कि व्लादीक रूस का वो इलाका है जहां से एक कॉरिडोर बनाया गया है जो सीधे भारत के चेन्नई तक जुड़ रहा है। इस कॉरिडोर को व्लादीक चेन्नई कॉरिडोर कहा जाता है। आने वाले महीनों में रूस इसी कॉरिडोर के जरिए भारत को तेल और दूसरा सामान भेजने वाला था। लेकिन उससे पहले ही चीन ने इस इलाके पर दावा ठोक दिया है। आपको बता दें कि 2016 में पीएम मोदी पुतिन के साथ व्लादी स्टोक गए थे। उस समय भी रूस ने भारत को अपने इस डर के बारे में बताया था। रूस चाहता था कि व्लादीक में भारत की इन्वेस्टमेंट और हिस्सेदारी बढ़ जाए ताकि चीन इस इलाके पर कब्जा ना कर पाए। बहरहाल अब चीन के राष्ट्रवादी लोगों ने कहा है कि हमें रूस से यह इलाके छीनने होंगे। रूस के दक्षिणी इलाके पर चीन ने कैसा हमला किया है। पहली बार खुलासा हुआ है कि चीन ने सेंट्रल एशियाई देशों में ऐसी घुसपैठ की है जिसने मॉस्को को हिला दिया है।
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कभी सोवियत संघ का हिस्सा रहे कजाकिस्तान, किरगिस्तान, ताजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज़्बेकिस्तान में चीन ने रूस को पूरी तरह से धकेल दिया है। यह देश कभी रूस के पक्के दोस्त हुआ करते थे। रूस इस इलाके में वीटो पावर रखता था। मगर चीन ने यहां पर पूरा समीकरण बदल दिया है। रूस को उखाड़ फेंक चीन सेंट्रल एशिया में अब आर्थिक महाशक्ति बन गया है। चीन अपने हिसाब से यहां पर नियम और शर्तें तय कर रहा है। चीन इस इलाके में लॉजिस्टिक ऊर्जा, सप्लाई चेन, फाइनेंस और डिजिटल गवर्नेंस के अहम नेटवर्क सिस्टम्स को कंट्रोल कर रहा है। हैरानी की बात देखिए कि रूस सब कुछ जानते हुए भी कुछ नहीं कर पा रहा क्योंकि रूस भी अब आर्थिक रूप से चीन पर इतना ज्यादा निर्भर हो चुका है कि वह सेंट्रल एशिया में चीन की मनमानी को रोकने की स्थिति तक में नहीं है। रूस अगर समय रहते ही चीन से दूर नहीं होता तो आने वाले समय में उसके लिए बहुत बुरा होने वाला है।
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