टाटा संस के दो प्रमुख ट्रस्ट शेयरधारकों में से एक सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने बोर्ड को पत्र लिखकर चंद्रशेखरन के फैसले को नोट करने और उनके उत्तराधिकारी की तलाश के लिए चयन समिति बनाने की प्रक्रिया शुरू करने का सुझाव दिया है।
ट्रस्ट से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक, जब चेयरमैन खुद दोबारा नियुक्ति नहीं लेने की इच्छा बता चुके हैं तो अब बोर्ड की प्राथमिकता उत्तराधिकार की योजना पर होनी चाहिए।
बोर्ड में वोटिंग को लेकर असमंजस
टाटा संस के बोर्ड में छह निदेशक हैं। इनमें ट्रस्ट के नामित निदेशक और चेयरमैन शामिल हैं। चंद्रशेखरन के जाने के मुद्दे पर बोर्ड में वोटिंग को लेकर राय बंटी हुई है। कुछ लोगों का मानना है कि उन्हें दोबारा कार्यकाल लेने के लिए मनाने की कोशिश की जानी चाहिए। वहीं, दूसरे पक्ष का कहना है कि दोबारा नियुक्ति नहीं लेने का फैसला उनका व्यक्तिगत निर्णय है और ऐसे मामले में वोटिंग की कोई जरूरत नहीं है।
कानूनी विशेषज्ञ आशीष के. सिंह के अनुसार, अगर कंपनी के आर्टिकल्स में विशेष प्रावधान नहीं है तो कंपनी कानून के तहत चंद्रशेखरन के दोबारा नियुक्ति नहीं लेने के फैसले को स्वीकार करने के अलावा बोर्ड के पास बहुत सीमित विकल्प हैं।
आज टाटा संस की AGM, कोरम पर संकट
टाटा संस की वार्षिक आम बैठक 18 अगस्त को प्रस्तावित है। हालांकि, बैठक में अन्य शेयरधारक ऑनलाइन शामिल हो सकते हैं, लेकिन सर रतन टाटा ट्रस्ट की ओर से प्रतिनिधि नामित न किए जाने के कारण कोरम पूरा होने पर सवाल खड़ा हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, अगर बैठक कोरम के अभाव में रद्द होती है तो यह टाटा संस के इतिहास में पहली ऐसी घटना हो सकती है।
चंद्रशेखरन ने क्यों लिया पीछे हटने का फैसला?
चंद्रशेखरन ने बोर्ड को बताया था कि वह दोबारा नियुक्ति के लिए आवश्यक सर्वसम्मत समर्थन नहीं मिलने की स्थिति में दूसरा कार्यकाल नहीं लेना चाहते। उनके तीसरे पांच साल के कार्यकाल को लेकर काफी समय से मतभेद चलने की बात सामने आ रही थी। ऐसे में उनका अचानक पीछे हटने का फैसला टाटा संस के कुछ बोर्ड सदस्यों के लिए अप्रत्याशित माना जा रहा है।
क्या चंद्रशेखरन अपने फैसले पर पुनर्विचार करेंगे
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या चंद्रशेखरन अपने फैसले पर पुनर्विचार करेंगे या टाटा संस नए चेयरमैन की तलाश शुरू करेगा। फिलहाल दो बातें साफ हैं। पहली चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी को लेकर प्रक्रिया शुरू करने की जरूरत सामने आ गई है और दूसरी बोर्ड के भीतर इस नेतृत्व परिवर्तन को लेकर पूरी तरह सहमति नहीं दिख रही है। हालांकि, चंद्रशेखरन के कार्यकाल, उत्तराधिकारी या संभावित नए चेयरमैन को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
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