भारत की GDP ग्रोथ करीब 6.4% रहने का अनुमान
देश की आर्थिक मजबूती आगे बढ़ने की उम्मीद
फिच (Fitch) का कहना है कि भारत में मैक्रोइकोनॉमिक स्थिरता देने का रिकॉर्ड मजबूत हुआ है और सरकार की नीतियों की विश्वसनीयता में भी सुधार आया है। इन दोनों कारणों से देश की आर्थिक मजबूती आगे बढ़ने की उम्मीद है। इसका सीधा मतलब यह है कि यदि महंगाई, राजकोषीय घाटा और बाहरी जोखिमों को नियंत्रण में रखा जाता है, तो भारत की ग्रोथ को लंबे समय तक सपोर्ट मिल सकता है। तेज आर्थिक वृद्धि का एक और फायदा सरकारी कर्ज के स्तर पर पड़ सकता है। फिच (Fitch) के मुताबिक, अगर भारत की GDP लगातार मजबूत गति से बढ़ती है, तो GDP के मुकाबले सरकारी कर्ज का अनुपात धीरे-धीरे कम हो सकता है। इससे देश की क्रेडिट प्रोफाइल में भी सुधार की गुंजाइश बनेगी।
सरकार ने FY27 के बजट में भारत का Debt-to-GDP रेशियो 55.6% रहने का अनुमान लगाया है, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में यह करीब 56.1% था, यानी सरकार को उम्मीद है कि आर्थिक वृद्धि और राजकोषीय अनुशासन के चलते कर्ज का अनुपात धीरे-धीरे नीचे आएगा। सरकार ने मार्च 2031 तक Debt-to-GDP Ratio को 50% तक लाने का लक्ष्य भी रखा है। अगर यह लक्ष्य हासिल होता है, तो भारत की वित्तीय स्थिति को लेकर निवेशकों और अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों का भरोसा और मजबूत हो सकता है।
हालांकि, BBB- भारत के लिए सबसे ऊंची क्रेडिट रेटिंग नहीं है। यह निवेश योग्य रेटिंग की निचली सीमा मानी जाती है। इसका मतलब है कि फिच (Fitch) भारत की अर्थव्यवस्था और उसकी भुगतान क्षमता को निवेश योग्य मानता है, लेकिन साथ ही कुछ जोखिमों को भी महत्वपूर्ण मानता है। इनमें सरकारी कर्ज का अपेक्षाकृत ऊंचा स्तर, प्रति व्यक्ति आय का कम होना और बाहरी झटकों के प्रति संवेदनशीलता जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं। ऐसे में स्टेबल आउटलुक (Stable Outlook) का मतलब यह नहीं है कि भारत की रेटिंग निश्चित रूप से आगे बढ़ेगी, बल्कि यह संकेत है कि फिलहाल, फिच (Fitch) को रेटिंग में बड़े बदलाव की तत्काल जरूरत नहीं दिख रही है।
निवेशकों के लिए फिच (Fitch) का यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसी देश की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग विदेशी निवेश, बॉन्ड यील्ड, सरकार और कंपनियों की विदेशों से फंडिंग लागत तथा अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के भरोसे को प्रभावित कर सकती है। भारत की रेटिंग को स्थिर बनाए रखना यह संकेत देता है कि वैश्विक जोखिमों के बावजूद देश की आर्थिक स्थिति को लेकर बड़ा नकारात्मक बदलाव नहीं हुआ है। हालांकि, आगे भारत की रेटिंग में सुधार की राह GDP ग्रोथ, सरकारी कर्ज में कमी, राजकोषीय अनुशासन, महंगाई नियंत्रण और बाहरी जोखिमों से निपटने की क्षमता पर निर्भर करेगी। कुल मिलाकर फिच (Fitch) का BBB- Stable फैसला भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है, लेकिन इसे रेटिंग अपग्रेड नहीं समझना चाहिए। यह ज्यादा सही तरीके से भारत की मौजूदा आर्थिक मजबूती और स्थिर आउटलुक की पुष्टि है।
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