इसी वजह से ईरान और अमेरिका के बीच हाल में जिनेवा में खत्म हुई बातचीत तनाव भरी रही. ईरान के विदेश मंत्री ने इस बातचीत को वाकई गंभीर बताया. अमेरिका ने ईरान के चारों ओर एक तरह से सैन्य जमावड़ा मजबूत कर दिया है. उसके तीन समुद्री बेडे पहुंच चुके हैं. कतर में अमेरिकी एयरबेस से सैनिकों को कहीं ओर भेजा जा रहा है. स्थिति गंभीर है. यानि एक तरह से अमेरिका लगातार उसके खिलाफ दबाव बढ़ने में लगा हुआ है.
ईरान ने अब तक की बातचीत में ये तो जाहिर किया है कि वो अपने परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगा देगा लेकिन मिसाइल प्रोग्राम को रोकने के लिए तो वो बिल्कुल तैयार नहीं है. ये बात समझी भी जा सकती है, क्योंकि आज की तारीख में मिसाइल ही ईरान को ताकत देते हैं. उसके एय़रडिफेंस को मजबूत बनाते हैं.
ईरान का मिसाइल प्रोग्राम क्या है और ये उसके लिए क्या मायने रखता है?
– ईरान का बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम मिडिल ईस्ट में सबसे बड़ा है. यह 1980 के दशक से विकसित हो रहा है, जब ईरान ने इराक युद्ध के दौरान मिसाइलों का इस्तेमाल किया. आज ईरान के पास हजारों बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें हैं, जो उत्तर कोरिया, रूस और चीन की तकनीक पर आधारित हैं. ईरान अब इनका अपने देश में ही बड़े पैमाने पर उत्पादन कर रहा है.
ईरान का मिसाइल प्रोग्राम उसकी रक्षा रणनीति का मुख्य हिस्सा है, जो हमले से बचाव और प्रतिक्रिया के लिए डिजाइन किया गया है. यह न्यूक्लियर हथियार ले जाने में सक्षम है, हालांकि ईरान न्यूक्लियर हथियारों का इनकार करता है. ये मिसाइलें सॉलिड और लिक्विड फ्यूल वाली हैं, जिसमें सॉलिड फ्यूल वाली मिसाइलें तेज लांच होती हैं और छिपाने में आसान.
ईरान की मिसाइलें क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित करती हैं, क्योंकि ये इजरायल, यूरोप के कुछ हिस्सों और अमेरिकी ठिकानों तक पहुंच सकती हैं. अपने पड़ोसी देशों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती हैं. संयुक्त राष्ट्र और अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ईरान ने इसे मजबूत बनाया है.
ईरान की मिसाइलों की अलग-अलग रेंज क्या हैं?
– ईरान की मिसाइलें विभिन्न रेंज की हैं, जो शॉर्ट-रेंज से मीडियम-रेंज तक फैली हुई हैं. शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें 1000 किमी से कम की रेंज वाली हैं, जैसे फतेह -110 (200-300 किमी), फतेह – 313 (500 किमी) और जोल्फागर (700 किमी). ये ज्यादातर सॉलिड फ्यूल वाली हैं. सटीक हमलों के लिए इस्तेमाल होती हैं, जैसे जहाजों या रडार पर.
मीडियम रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें 1000-3000 किमी की रेंज वाली हैं, जैसे शहाब – 3 (800-1200 किमी), इमाद (1700 किमी), गदर-1 (2000 किमी), सेज्जिल (2000 किमी) और खुर्रमशहर (2000 किमी). ये इजरायल और यूरोप के कुछ हिस्सों तक पहुंच सकती हैं. क्रूज मिसाइलें जैसे सोमर (700-1650 किमी) और फतेह-1 (1500 किमी) हाइपरसोनिक स्पीड वाली हैं, जो डिफेंस सिस्टम को चकमा दे सकती हैं. ईरान 3000 किमी से ज्यादा मार वाली मिसाइल विकसित करने की कोशिश कर रहा है. तो मिसाइलों की ये रेंज ईरान को बढ़त देती है.
ईरान की मिसाइलों से कुछ महीने पहले इजरायल को क्या नुकसान हुआ?
– जून 2025 में ईरान की मिसाइलों से इजरायल को बड़ा नुकसान हुआ. 12 दिनों के इस युद्ध में ईरान की मिसाइलों ने इजरायल के आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम को भी भेद दिया. ये मिसाइलें जहां गिरीं वहां भवन और लोग हताहत हुए. इसमें पहली बार ये दिखा कि ईरानी मिसाइलों ने इजरायल का बड़ा नुकसान किया. तब ईरान ने 550 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं. 1000 से ज्यादा ड्रोन दागे, जिससे इजरायल में 33 मौतें हुईं. 3500 घायल हुए औऱ 1.5 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ. मिसाइलें तेल अवीव और हाइफा पर गिरीं. अस्पताल और सैन्य साइट्स को नुकसान पहुंचाया.
ईरान का मिसाइल जखीरा कितना बड़ा है?
– ईरान के पास मिडिल ईस्ट में सबसे बड़ा मिसाइल स्टॉकपाइल है, अनुमानित 2000-3000 मिसाइलें, जिसमें से 2000 “हैवी” मध्यम रेंज की मिसाइलें हैं, जो इजरायल तक पहुंच सकती हैं. 2025 के युद्ध से पहले 2500-3000 मिसाइलें थीं, लेकिन युद्ध में 550 दागी गईं. इजरायल ने 1000 के आसपास नष्ट कीं. अब उसके पास 1000 से 1200 मिसाइलें बची हैं. लांचर्स की संख्या कम हुई. युद्ध से पहले 480 मोबाइल लॉन्चर्स थे, अब 100 बचे हैं. ईरान के पास 10 से ज्यादा तरह के मिसाइल सिस्टम हैं, जैसे 6-8 लिक्विड फ्यूल और 12 सॉलिड फ्यूल वाली.
ईरान की मिसाइल प्रोडक्शन लाइन कैसी है?
– ईरान घरेलू रूप से मिसाइलें बनाता है, जिसमें प्लैनेटरी मिक्सर्स का इस्तेमाल सॉलिड फ्यूल के लिए होता है. ये मिक्सर्स रासायनिक प्रक्रिया से फ्यूल बनाते हैं. 2024 में इजरायल ने इन मिक्सर्स को नष्ट किया, लेकिन ईरान ने पुराने तरीकों से उत्पादन जारी रखा. 2025 के युद्ध के बाद ईरान ने प्राचिन और शाहरुद फैक्ट्रीज को फिर से बनाया. अब उत्पादन दर 300 मिसाइलें प्रति माह है.
इजरायल ईरान की मिसाइलों पर रोक क्यों लगाना चाहता है?
– इजरायल ईरान की मिसाइलों को अस्तित्व का खतरा मानता है, क्योंकि ये न्यूक्लियर हथियार ले जाने में सक्षम हैं. इजरायल तक पहुंच सकती हैं. ईरान इजरायल को “छोटा शैतान” कहता है और प्रॉक्सी के जरिए हमले करता है. इजरायल चाहता है कि ईरान की मिसाइल रेंज 300 किमी तक सीमित हो, न्यूक्लियर डील में शामिल हो. 2025 के युद्ध में इजरायल ने ईरान की एयर डिफेंस और मिसाइल साइट्स को नष्ट किया, लेकिन ईरान की रीबिल्डिंग से चिंता बढ़ी है. इजरायल अमेरिका से मदद मांगता है, क्योंकि ईरान की मिसाइलें इजरायल की डिफेंस को नुकसान कर सकती हैं.
ईरान की मिसाइलें कितनी खतरनाक हैं?
– ईरान की मिसाइलें सटीक, तेज और बड़ी संख्या में हैं, जो डिफेंस सिस्टम को चुनौती देती हैं. हाइपरसोनिक मिसाइलें Mach 5+ स्पीड पर उड़ती हैं, चकमा देती हैं.2025 युद्ध में ये इजरायल का नुकसान कर चुकी हैं. ईरान की तकनीक सुधार रही है, जो क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित करती है.
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