उम्र के साथ कमजोर होता है दिमाग
हमारे मस्तिष्क की सुरक्षा के लिए एक खास परत होती है, जिसको ब्लड ब्रेन बैरियर कहा जाता है। यह ब्लड वाहिकाओं का एक जटिल जाल है, जो सामान्य तौर पर खून में मौजूद हानिकारक पदार्थों को दिमाग में जाने से रोकता है।
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लेकिन जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, यह सुरक्षा कवच कमजोर पड़ने लगता है और इसमें रिसाव होने लगता है। इस रिसाव की वजह से खून से हानिकारक प्रोटीन मस्तिष्क के ऊतकों में आसानी से प्रवेश कर जाते हैं। यह हानिकारक प्रोटीन दिमाग में सूजन पैदा करते हैं। जोकि सीधे रूप में बौद्धिक क्षमता में गिरावट और अल्जाइमर जैसी बीमारियों से जुड़ा होता है।
मस्तिष्क की मरम्मत करता है व्यायाम
व्यायाम एक जादू की तरह काम करता है। शोध के मुताबिक फिजिकल एक्टिविटी मस्तिष्क के इस अंतर्निहित रक्षा तंत्र को मजबूत करती है। जब आप व्यायाम करते हैं, तो हमारा शरीर लिवर को एक खास एंजाइम छोड़ने के लिए प्रेरित करता है। यह एंजाइम उन हानिकारक प्रोटीनों को नष्ट कर देता है, जो दिमाग को नुकसान पहुंचाते हैं। वहीं व्यायाम मस्तिष्क की इस सुरक्षात्मक परत की मरम्मत करके दिमाग को तेज करता है। इससे बढ़ती उम्र के साथ दिमाग के कमजोर होने का प्रोसेस भी धीमा हो जाता है।
भविष्य के लिए उम्मीद
इस प्रोसेस को समझने के लिए शोधकर्ताओं ने चूहों पर अध्ययन किया। इसमें पाया गया कि जब शरीर में हानिकारक प्रोटीन की मात्रा को कम किया गया, तो चूहों के दिमाग की सूजन कम हो गई। उनकी याददाश्त में भी काफी सुधार हुआ। यह महत्वपूर्ण खोज है, क्योंकि इसके माध्यम से अल्जाइमर और उम्र के साथ होने वाली दिमागी समस्याओं के लिए नए और बेहतर उपचार ढूंढने में मदद मिल सकती है।
डिस्क्लेमर: इस लेख के सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन सुझावों और जानकारी को किसी डॉक्टर या मेडिकल प्रोफेशनल की सलाह के तौर पर न लें। किसी भी बीमारी के लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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