यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि EPS-95 राष्ट्रीय आंदोलन समिति (National Agitation Committee) लगातार न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग कर रही है। 5 अगस्त को नई दिल्ली में EPS-95 पेंशनर्स ने प्रदर्शन भी किया था। पेंशनर्स की मुख्य मांग है कि न्यूनतम मासिक पेंशन को ₹7,500 किया जाए और इसके साथ महंगाई भत्ते का लाभ भी दिया जाए। उनका तर्क है कि मौजूदा समय में ₹1,000 की मासिक पेंशन बेहद कम है और दवाइयों, भोजन, किराए तथा अन्य जरूरी खर्चों को देखते हुए इसमें पर्याप्त बढ़ोतरी की जरूरत है।
सरकार के ताजा जवाब से यह भी स्पष्ट होता है कि ₹7,500 की राशि अभी सिर्फ मांग है, नई न्यूनतम पेंशन नहीं। सरकार ने पेंशन फंड की आर्थिक स्थिति और भविष्य की देनदारियों को ध्यान में रखने की बात कही है। EPS के तहत पेंशन फंड में नियोक्ता की ओर से वेतन का 8.33 प्रतिशत योगदान और केंद्र सरकार की ओर से 1.16 प्रतिशत योगदान शामिल होता है। हालांकि, इन योगदानों पर ₹15,000 प्रति माह की वेतन सीमा लागू है। सरकार ने कहा है कि EPS के तहत मिलने वाले लाभ इसी फंड में जमा राशि से दिए जाते हैं और पेंशन फंड का मूल्यांकन हर साल EPS-1995 के प्रावधानों के अनुसार किया जाता है।
मौजूदा ₹1,000 की न्यूनतम पेंशन को बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार अतिरिक्त बजटीय सहायता भी उपलब्ध कराती है, यानी सरकार की 1.16 प्रतिशत हिस्सेदारी के अलावा न्यूनतम पेंशन सुनिश्चित करने के लिए अलग से सरकारी सहायता दी जा रही है। सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य EPFO सदस्यों को मजबूत सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है, लेकिन इसके साथ पेंशन फंड की लंबे समय तक टिकाऊ वित्तीय स्थिति और भविष्य की देनदारियों को भी ध्यान में रखना जरूरी है। यही वजह है कि फिलहाल ₹7,500 की न्यूनतम पेंशन पर कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है।
आंकड़ों की बात करें तो 31 मार्च 2026 तक 85,84,604 पेंशनर्स EPS के तहत हर महीने पेंशन प्राप्त कर रहे थे। सरकार के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक EPS के तहत कुल ₹15,819.28 करोड़ की पेंशन राशि वितरित की जा चुकी थी। इतने बड़े पेंशनर्स आधार को देखते हुए न्यूनतम पेंशन में बड़ी बढ़ोतरी का सरकार के वित्तीय बोझ पर भी सीधा असर पड़ेगा। इसलिए पेंशनर्स की मांग और सरकार की वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाना इस मामले में सबसे बड़ी चुनौती है।
EPS-95 से जुड़ा एक दूसरा महत्वपूर्ण मुद्दा उच्च वेतन पर पेंशन का भी है। सुप्रीम कोर्ट ने 4 नवंबर 2022 के अपने फैसले में पात्र कर्मचारियों को वेतन सीमा से अधिक वास्तविक बेसिक सैलरी पर पेंशन के लिए विकल्प चुनने की अनुमति दी थी। हालांकि, इसके लिए निर्धारित शर्तों को पूरा करना जरूरी है। इसके बाद EPFO ने पात्र कर्मचारियों और नियोक्ताओं को संयुक्त विकल्प जमा करने की प्रक्रिया उपलब्ध कराई। सरकार के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद रिटायर हो चुके पात्र आवेदकों के लिए 1,49,806 PPOs (Pension Payment Orders) उच्च वेतन पर पेंशन के लिए जारी किए जा चुके हैं।
इसका मतलब साफ है कि फिलहाल EPS-95 की न्यूनतम पेंशन ₹1,000 प्रति माह ही है। ₹7,500 की मांग पर सरकार ने लोकसभा में कोई मंजूरी या निश्चित तारीख नहीं बताई है। आने वाले समय में अगर सरकार पेंशन फंड की स्थिति, वित्तीय बोझ और पेंशनर्स की मांग को ध्यान में रखते हुए कोई निर्णय लेती है, तभी न्यूनतम पेंशन में बदलाव होगा। इसलिए EPS-95 पेंशनर्स को फिलहाल सोशल मीडिया या अन्य जगहों पर चल रही ₹7,500 पेंशन की खबरों को आधिकारिक घोषणा समझने से बचना चाहिए। अभी ₹7,500 पेंशन लागू नहीं हुई है और ₹1,000 की न्यूनतम मासिक पेंशन ही प्रभावी है।
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