जयपुर की पूर्व राजमाता महारानी गायत्री देवी का 23 मई को जन्म हुआ था। भारत के इतिहास में जयपुर की महारानी गायत्री देवी का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। बताया जाता है महारानी गायत्री देवी ने सिर्फ 12 साल की उम्र में चीते का शिकार किया था। उनको लग्जरी कारों और शिकार का शौक था। इसके अलावा गायत्री देवी और इंदिरा गांधी की दुश्मनी के भी काफी चर्चे थे। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर गायत्री देवी के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में…
जन्म और परिवार
लंदन में 23 मई 1919 को पूर्व राजमाता महारानी गायत्री देवी का जन्म हुआ था। गायत्री देवी रबींद्रनाथ टैगोर द्वारा स्थापित शांतिनिकेतन के स्कूल पाठ भवन पढ़ती थीं। इसी में इंदिरा गांधी भी पढ़ती थी। गायत्री देवी बेहद खूबसूरत महिला थीं। बताया जाता है कि इंदिरा गांधी अपने से ज्यादा सुंदर और दर्शनीय महिला को बर्दाश्त नहीं कर सकती थीं।
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16 की उम्र में की थी शादी
महज 16 साल की उम्र में गायत्री देवी ने जयपुर के राजा सवाई मान सिंह से शादी रचाई थी। गायत्री देवी जयपुर के राजा सवाई मान सिंह की तीसरी पत्नी थी। महारानी गायत्री की खूबसूरती की चर्चा विदेशी मैगजीनों में होती थी।
इंदिरा और गायत्री की लड़ाई
गायत्री देवी और इंदिरा गांधी के बीच लड़ाई उस समय चर्चा में आई, जब साल 1962 में गायत्री देवी ने जयपुर से लोकसभा चुनाव लड़ने की ठानी और रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल की थी। इंदिरा चाहती थी कि वह कांग्रेस में शामिल हों, लेकिन उन्होंने स्वतंत्र पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था।
इमरजेंसी के दौरान गिरफ्तारी
देश में आपातकाल लगने के बाद 03 सितंबर 1975 को गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल में डाल दिया है। देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने के अपराध में गायत्री देवी को बंदी बना लिया गया था। लेकिन गिरफ्तारी के बाद सरकार में इसके पीछे अन्य कारण बताए जाते थे। उस दौरान तिहाड़ जेल में विपक्ष के तमाम बड़े नेताओं समेत विजय राजे सिंधिया बंद थीं।
राजनीति से सन्यास के लिए दबाव
जब महारानी गायत्री देवी को जब तिहाड़ जेल में ले जाया जा रहा था, तो उस समय वह काफी घबराई हुई थीं। गायत्री देवी को जेल के महिला वार्ड में कैदी नंबर 2265 दिया गया था। वह कई महीनों तक तिहाड़ जेल में बंद रहीं। सेहत खराब होने की वजह से सरकार ने उनको पैरोल पर रिहा किया गया था। महारानी गायत्री देवी पर दोस्तों और करीबियों की ओर से बार-बार दबाव बनाया जा रहा था कि वह राजनीति से संन्यास ले लें। वहीं बहन के कहने के बाद गायत्री देवी ने राजनीति से सन्यास ले लिया।
मृत्यु
वहीं 29 जुलाई 2009 को 90 साल की उम्र में गायत्री देवी का निधन हो गया था।
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