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- EMI Loan Explained; Equated Monthly Installment Pre Payments | Balance Transfer Benefits
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आजकल लोन आसानी से मिल जाता है, लेकिन उसकी EMI (इक्वेटेड मंथली इंस्टॉलमेंट) का बोझ कुछ लोगों के लिए ‘सिरदर्द’ बन जाता है। अक्सर लोग कम EMI के लालच में लंबा टेन्योर चुन लेते हैं या बिना पूरी जानकारी के लोन ले लेते हैं, जिसका असर उनकी जेब पर सालों तक पड़ता है।
सही प्लानिंग न होने पर ब्याज का बोझ बढ़ता जाता है और कर्ज खत्म करना मुश्किल हो जाता है। अगर कुछ स्मार्ट फाइनेंशियल फैसले लें तो लोन जल्दी खत्म कर सकते हैं।
इसलिए आज ‘आपका पैसा’ कॉलम में EMI की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- लोन जल्दी कैसे चुकाएं?
- EMI से जुड़ी क्या गलतियां नहीं करनी चाहिए?

सवाल- EMI क्या है और ये कैसे तय होती है?
जवाब- EMI वह फिक्स अमाउंट है, जो बैंक से लिए लोन पर हर महीने चुकाना होता है। इसमें दो चीजें शामिल होती हैं-
- मूलधन- जितना पैसा उधार लिया।
- ब्याज- उस कर्ज पर लगा शुल्क।
EMI कैसे तय होती है?
EMI तीन मुख्य चीजों पर निर्भर करती है-
- लोन अमाउंट
- ब्याज दर
- लोन टेन्योर
टेन्योर बदलने पर क्या होता है?
- लंबी अवधि में EMI कम होगी, लेकिन कुल ब्याज ज्यादा होगा।
- छोटी अवधि में EMI ज्यादा होगी, लेकिन कुल ब्याज कम होगा।
सवाल- लोग EMI से जुड़ी क्या कॉमन गलतियां करते हैं?
जवाब- EMI पर लोन लेना आसान है, लेकिन इन कॉमन गलतियों से भारी नुकसान हो सकता है-

सवाल- लोन की EMI ज्यादा होने के फायदे और नुकसान क्या हैं?
जवाब- लोन EMI ज्यादा होने के फायदे-
- लोन जल्दी खत्म होता है।
- कुल ब्याज कम देना पड़ता है।
- मानसिक राहत मिलती है।
- क्रेडिट स्कोर बेहतर हो सकता है।
नुकसान
- मंथली बजट खराब हो सकता है।
- इमरजेंसी में दिक्कत हो सकती है।
- सेविंग और इन्वेस्टमेंट कम हो जाते हैं।
- स्ट्रेस बढ़ सकता है।
- नौकरी या इनकम बदलने पर रिस्क होता है।
सवाल- EMI कम होने के फायदे और नुकसान क्या हैं?
जवाब- EMI कम होने के फायदे-
- मंथली कैश फ्लो अच्छा रहता है।
- फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी मिलती है।
- इनकम कम बोझ नहीं पड़ता है।
- इन्वेस्टमेंट का मौका मिलता है।
- लाइफस्टाइल में कटौती नहीं करनी पड़ती है।
नुकसान
- कुल ब्याज ज्यादा देना पड़ता है।
- लोन बहुत लंबा चलता है।
- संपत्ति पर पूरा अधिकार देर से मिलता है।
- फ्लोटिंग रेट में खर्च बढ़ सकता है।
सवाल- EMI का बोझ कम करने के लिए क्या करें?
जवाब- इसे नीचे पॉइंट्स से समझिए-
1. प्री-पेमेंट करते रहें
जब भी आपके पास एक्स्ट्रा पैसा आए, उसे लोन में प्री-पेमेंट के रूप में जमा करें। इससे कुल ब्याज में कमी आएगी।
2. टेन्योर सही चुनें
लोन लेते समय बहुत लंबा टेन्योर न चुनें। ऐसा बैलेंस रखें, जिससे EMI भी संभले और ब्याज भी ज्यादा न बढ़े।
3. कम इंटरेस्ट रेट वाला लोन चुनें
लोन लेने से पहले अलग-अलग बैंकों की ब्याज दरों की तुलना करें और कम इंटरेस्ट रेट वाला विकल्प चुनें।
4. बैलेंस ट्रांसफर का इस्तेमाल करें
अगर कहीं और कम ब्याज मिल रहा है, तो अपने लोन को दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने पर विचार करें।
5. डाउन पेमेंट ज्यादा करें
शुरुआत में ज्यादा डाउन पेमेंट देने से लोन की राशि कम हो जाती है, जिससे EMI का बोझ घटता है।
6. अनावश्यक EMI से बचें
हर चीज को EMI पर लेने से बचें और केवल जरूरी खर्चों के लिए ही लोन लें।
7. इनकम बढ़ने पर EMI बढ़ाएं
जब आपकी इनकम बढ़े, तो EMI या प्रीपेमेंट बढ़ाकर लोन को जल्दी खत्म करने की कोशिश करें।
8. खर्चों पर कंट्रोल रखें
अपने रोजमर्रा के खर्चों को कंट्रोल रखें, ताकि EMI भरना आसान हो और फाइनेंशियल प्रेशर कम रहे।
सवाल- अगर लोन जल्दी खत्म करना है तो इसके क्या तरीके हैं?
जवाब- इसके लिए सबसे जरूरी है कि डिसिप्लिन्ड तरीके से समय पर EMI भरें। सभी तरीके ग्राफिक में देखिए-

सवाल- लोन प्री-पेमेंट क्या होता है और इसके क्या फायदे हैं?
जवाब- लोन प्री-पेमेंट का मतलब है- ‘तय EMI के अलावा एक्स्ट्रा पैसे देकर लोन का कुछ हिस्सा पहले ही चुका दिया जाए।’ इससे बकाया लोन कम हो जाता है।
प्री-पेमेंट के फायदे
- जितनी जल्दी पैसा लौटाएंगे, उतना कम ब्याज देना पड़ेगा।
- प्री-पेमेंट करने से टेन्योर घट जाती है।
- इससे EMI कम कर सकते हैं या टेन्योर घटा सकते हैं।
- जल्दी कर्ज खत्म होने से मन की शांति मिलती है।
- कम कर्ज होने से सेविंग और इन्वेस्टमेंट बढ़ाना आसान हो जाता है।
सवाल- क्या हर लोन का प्री-पेमेंट करना सही है? किन बातों का ध्यान रखें?
जवाब- नहीं, हर लोन में प्री-पेमेंट करना हमेशा सही नहीं होता। यह लोन के प्रकार, ब्याज दर और फाइनेंशियल कंडीशन पर निर्भर करता है।
इन बातों का ध्यान रखें-
- प्री-पेमेंट चार्ज जरूर चेक करें। कुछ लोन में प्री-पेमेंट पर पेनल्टी लगती है।
- ब्याज दर चेक करें, अगर लोन का इंटरेस्ट ज्यादा है तो प्री-पेमेंट फायदेमंद है।
- इमरजेंसी फंड जरूर रखें, सारे पैसों से लोन न भरें।
सवाल- बैलेंस ट्रांसफर क्या है और इसका फायदा कब उठाना चाहिए?
जवाब- बैलेंस ट्रांसफर का मतलब है कि मौजूदा लोन एक बैंक से दूसरे बैंक में शिफ्ट कर दिया जाए, जहां कम इंटरेस्ट रेट या बेहतर शर्तें मिलें। इसे ग्राफिक से समझिए-

सवाल- EMI कम करने के लिए लोन टेन्योर बढ़ाना सही है या नहीं?
जवाब- टेन्योर बढ़ाने से EMI जरूर कम हो जाती है, लेकिन यह हमेशा सही फैसला नहीं होता। यह आपकी जरूरत और स्थिति पर निर्भर करता है।
कब सही है?
- अगर मंथली खर्च संभालने में दिक्कत हो रही है।
- अस्थायी रूप से राहत चाहते हैं।
- टेन्योर बढ़ाकर EMI कम की जा सकती है।
कब सही नहीं है?
- अगर कुल ब्याज बचाना चाहते हैं।
- अगर इनकम स्टेबल और अच्छी हो।
- लंबे समय तक कर्ज नहीं रखना चाहते।
सवाल- एक से ज्यादा लोन होने पर किसे पहले चुकाना चाहिए?
जवाब- ऐसी कंडीशन में सही स्ट्रैटेजी अपनाना बहुत जरूरी है, ताकि कर्ज से जल्दी बाहर निकल सकें। इसे ग्राफिक से समझिए-

सवाल- लोन जल्दी चुकाने से क्रेडिट स्कोर पर क्या असर पड़ता है?
जवाब- इसका असर पॉइंटर्स से समझिए-
- इससे क्रेडिट प्रोफाइल मजबूत होती है।
- टाइमली या जल्दी पेमेंट से स्कोर सुधर सकता है।
- लोन जल्दी भरने से क्रेडिट हिस्ट्री छोटी हो सकती है।
- अलग-अलग तरह के लोन कम होने से स्कोर थोड़ा कम हो सकता है।
- कुल मिलाकर असर न्यूट्रल से पॉजिटिव होता है।
सवाल- क्या हमेशा जल्दी लोन खत्म करना ही सही रणनीति है?
जवाब- नहीं, हर बार जल्दी लोन खत्म करना जरूरी नहीं होता। यह फाइनेंशियल कंडीशन और लोन की शर्तों पर निर्भर करता है।
कब सही होता है?
- अगर इंटरेस्ट रेट ज्यादा हो।
- अगर आपके पास एक्स्ट्रा पैसे हों।
- अगर कर्ज से जल्दी छुटकारा चाहते हैं।
कब सही नहीं होता?
- जब इंटरेस्ट रेट कम हो।
- जब इमरजेंसी फंड न हो।
- जब कैश फ्लो टाइट हो जाए।
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