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राहुल गांधी ने नए वोटरों के रजिस्ट्रेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले ऑनलाइन फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि फॉर्म-6 में अवैध तरीके से बदलाव किया गया। राहुल ने पूछा कि टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) को बदलाव करने का आदेश किसने दिया और कंपनी में इसे किसने मंजूरी दी। उन्होंने सवाल किया कि क्या TCS पर कोई दबाव था।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में फॉर्म-6 में अतिरिक्त जानकारी जोड़ने और SIR से जुड़े फैसलों पर 14 बार आपत्ति जताई। उनका कहना था कि नियम बदले बिना फॉर्म में नया हिस्सा जोड़ा गया।
हालांकि, चुनाव आयोग ने बुधवार को SIR पूरा हो चुके राज्यों में फॉर्म-6 में से अतिरिक्त घोषणा-पत्र हटा दिया था। अब SIR में नाम कटने के बाद दोबारा नाम जुड़वाने के लिए 2003 की वोटर लिस्ट की जानकारी नहीं देनी होगी।

रमेश बोले- CEC का मकसद Gen-Z मतदाताओं को वोटर लिस्ट हटाना
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दावा किया कि जुलाई 2026 में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने फॉर्म-6 में असंवैधानिक तरीके से बदलाव किए। उन्होंने आरोप लगाया कि इसका मकसद Gen-Z मतदाताओं को वोटर लिस्ट से हटाना था। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया था।
चुनाव आयोग और SIR के मुद्दे पर बुधवार को INDIA ब्लॉक की बैठक हुई थी। इसमें विपक्षी दलों ने 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग तक मार्च करने और वोटर लिस्ट से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रपति के सामने उठाने का फैसला किया है।
विपक्षी गठबंधन ने आगामी चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग भी की और SIR से जुड़े मामलों की जल्द सुनवाई की अपील की। गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की है।

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चुनाव आयोग ने SIR पूरा हो चुके राज्यों में फॉर्म-6 में बड़ा बदलाव किया है। अब SIR में नाम कटने के बाद दोबारा नाम जुड़वाने के लिए 2003 की वोटर लिस्ट की जानकारी नहीं देनी होगी। पूरी खबर पढ़ें…
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