कितने छात्रों को मिली डिग्री?
इस समारोह में कुल 1,20,408 छात्रों को डिग्री दी गई. इनमें रेगुलर छात्रों के साथ-साथ नॉन-कॉलेजिएट वुमन एजुकेशन बोर्ड (NCWEB) और स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (SOL) के छात्र भी शामिल थे. कुल छात्रों में 59,435 पुरुष और 60,973 महिला छात्राएं थीं. रेगुलर छात्रों में 50,780 डिग्री दी गईं, जिनमें 24,748 पुरुष और 26,032 महिलाएं थीं. इसके अलावा 5,008 छात्राएं NCWEB से और 64,620 छात्र SOL से थीं.
PhD की डिग्री और मेडल भी किए गए प्रदान
समारोह में 734 छात्रों को PhD की डिग्री भी दी गई. इनमें 385 महिलाएं और 349 पुरुष शामिल थे. सबसे ज्यादा PhD आर्ट्स फैकल्टी (236) में दी गईं. इसके बाद साइंस फैकल्टी (139) और सोशल साइंस फैकल्टी (119) का स्थान रहा. इसके अलावा 132 गोल्ड और सिल्वर मेडल तथा पुरस्कार भी दिए गए. इनमें से 112 गोल्ड मेडल और 1 सिल्वर मेडल अंडरग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों को मिले. इस साल गोल्ड मेडल पाने वालों में 70 प्रतिशत से ज्यादा महिलाएं थीं.
कितने अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट छात्र शामिल हुए?
दीक्षांत समारोह में 1,09,003 अंडरग्रेजुएट (UG) छात्र, 11,362 पोस्ट ग्रेजुएट (PG) छात्र और 43 चार वर्षीय अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम (FYUP) के छात्रों को डिग्री प्रदान की गई. इसके अलावा विश्वविद्यालय ने 20 ‘सेंटेनरी चांस डिग्री’ भी दीं. यह योजना विश्वविद्यालय के 100 साल पूरे होने पर शुरू की गई थी, ताकि जो छात्र पहले अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए थे, वे अब अपनी डिग्री पूरी कर सकें.
उपराष्ट्रपति ने क्या कहा?
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने छात्रों को ‘विकसित भारत’ का निर्माता बताया. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को ऐसा रिसर्च और इनोवेशन करना चाहिए, जो भारतीय जरूरतों से जुड़ा हो और साथ ही वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सके.
उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली विश्वविद्यालय की शुरुआत सिर्फ 3 कॉलेज, 2 फैकल्टी, 8 विभाग और 750 छात्रों के साथ हुई थी. आज यहां 16 फैकल्टी, 86 विभाग, 90 कॉलेज, 20 हॉल और हॉस्टल, 30 से ज्यादा केंद्र और संस्थान, 34 लाइब्रेरी और 6 लाख से अधिक छात्र हैं.
ग्लोबल रैंकिंग में आगे बढ़ने का लक्ष्य
उपराष्ट्रपति ने कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय पहले से ही देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में शामिल है, लेकिन इसे वैश्विक रैंकिंग में और ऊपर जाना चाहिए. उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले दो साल में विश्वविद्यालय दुनिया की टॉप 300, फिर टॉप 200 और आगे चलकर टॉप 100 में शामिल हो सकता है. उनका लक्ष्य है कि एक दिन दिल्ली विश्वविद्यालय दुनिया का नंबर-1 विश्वविद्यालय बने.
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