- भारत के तेल आयात की लागत बढ़ने की प्रबल संभावना है।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और तनाव के साथ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में लगी नाकेबंदी से परेशान भारत की मुश्किलें अब और ज्यादा बढ़ने वाली हैं. दरअसल, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारत समेत कुछ अन्य देशों को रूस से कच्चा तेल आयात करने की दी गई छूट की डेडलाइन 48 घंटे बाद यानी शनिवार (16 मई, 2026) को खत्म होने वाली है. ऐसे में भारत की तेल रिफाइनरी कंपनियां की टेंशन काफी ज्यादा बढ़ गई है.
जैसे-जैसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दी गई डेडलाइन अपने अंत की तरफ बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस बात की चिंता भी बढ़ रही है कि अगर अमेरिका की तरफ से दी गई इस छूट को और आगे नहीं बढ़ाया जाता है, तो इससे भारत की तेल रिफाइनरियों को रूस से कच्चे तेल के आयात को कम करना पड़ सकता है और उन्हें दूसरे देशों से ऊंची कीमतों पर कच्चे तेल के कार्गों खरीदने पड़ सकते हैं. जिसके कारण भारत की तेल खरीद की लागत में भी इजाफा हो सकता है.
रूसी तेल आयात रूकी, तो भारत की बढ़ेंगी मुश्किलें
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कैप्लर के आंकड़ों के मुताबिक, भारत का मई महीने में अब तक रूसी कच्चा तेल आयात 23 लाख बैरल प्रतिदिन के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है, क्योंकि अमेरिका की तरफ से दी गई छूट के तहत पहले से लोड किए गए रूसी कच्चे तेल के कार्गो भारत में काफी जल्दी पहुंच गए. हालांकि, 16 मई को इस डेडलाइन के खत्म होने के बाद अगर रूस से कच्चे तेल लदे नए जहाज भारत के लिए रवाना नहीं होते हैं, तो पूरे महीने का औसत आयात का आंकड़ा घटकर 19 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच सकता है.
ईरान-अमेरिका युद्ध की वजह से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संकट
मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष और तनाव की वजह से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर संकट छा गया है. दुनिया के कई देशों में तेल की कीमतों में रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ोत्तरी की गई है. वहीं, भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है. ऐसे में फारस की खाड़ी से भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों को होने वाली तेल आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित हुई है.
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