पेशाब में ये 1 बदलाव किडनी डैमेज का शुरुआती संकेत हो सकता है। इस बारे में डॉ विपुल कहते हैं कि अगर आप शुगर या बीपी के मरीज हैं तो आपको खास ध्यान रखने की जरूरत है। उन्होंने के जरूरी टेस्ट भी बताया है, जिससे किडनी डैमेज को शुरुआती फेज में ही पता किया जा सकता है।
पेशाब में ये 1 बदलाव हो सकता है किडनी डैमेज का संकेत
डॉ विपुल कहते हैं कि अगर आपकी किडनी पर किसी तरह का लोड पड़ रहा है, या बीपी और शुगर के लगातार बढ़े रहने की वजह से किडनी डैमेज होना शुरू हो गई है तो ये एक बदलाव आपको जरूर नोटिस करना चाहिए। इसका पहला संकेत होता है कि पेशाब में झाग यानी फोम बनना शुरू हो जाता है। डॉक्टर कहते हैं इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि किडनी डैमेज का ये सबसे पहला और बेसिक संकेत होता है।
आखिर क्यों आने लगता है पेशाब में झाग?
डॉक्टर बताते हैं कि अगर किडनी पर लोड बढ़ रहा हो या किडनी डैमेज होना शुरू हो गई हो, तो पेशाब में एक तरह का प्रोटीन लीक करने लगता है, जिसे एल्बुमिन कहा जाता है। इसकी वजह से ही पेशाब में झाग आना शुरू हो जाते हैं। डॉ विपुल कहते हैं कि ये डायबिटीज के मरीजों में काफी कॉमन देखा जाता है।
डॉक्टर बोले- ‘किडनी की जांच काफी नहीं है’
डॉ विपुल कहते हैं कि अक्सर लोग रूटीन चेकअप में अपनी किडनी की जांच कराते हैं, जिसमें क्रिएटिनिन लेवल नॉर्मल देखकर उन्हें लगता है कि किडनी को कोई डैमेज नहीं हो रहा है। जबकि ये समझना जरूरी है कि क्रिएटिनिन लेवल बढ़ा हुआ तब आता है, जब 90 प्रतिशत तक किडनी डैमेज हो चुकी होती है। आसान शब्दों में समझें तो किडनी डैमेज का शुरुआती संकेत यूरिन में झाग बनना होता है, लेकिन अगर आप उसे दो-तीन साल तक नजरंदाज करें तो किडनी खराब होने लगती है और रिपोर्ट में क्रिएटिनिन बढ़ा हुआ आता है।
बीपी और शुगर के मरीज ये आसान टेस्ट जरूर कराएं
डॉक्टर सलाह देते हैं कि बीपी और शुगर के मरीजों को हर साल एक टेस्ट जरूर कराना चाहिए, ताकि किडनी डैमेज का पता शुरुआती फेज में ही चल सके। ये टेस्ट है यूरिन एल्बुमिन क्रिएटिनिन रेशियो (Urine Albumin- Creatinine Ratio)। इस टेस्ट से पूरी तरह पता चल जाता है कि यूरिन में प्रोटीन लीक कर रहा है या नहीं। इसकी नॉर्मल वैल्यू 30 mg/g से कम होनी चाहिए।
शुरुआत में पता चलना है बहुत जरूरी
डॉक्टर कहते हैं कि अगर शुरुआती फेज में ही किडनी डैमेज का पता चल जाए तो पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। लेकिन एक बार क्रिएटिनिन लेवल बढ़ने के बाद इसका इलाज नहीं किया जा सकता है। इसलिए छोटे-छोटे संकेतों को नजरअंदाज ना करे और नियमित जांच कराना ना भूलें।
नोट: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसे किसी भी तरह से पेशेवर मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या मेडिकल कंडीशन से जुड़े सवालों के लिए हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.