Dr. Amitu Singh Success Story : पलामू की डॉ. अमितु सिंह ने सामाजिक बंदिशों को तोड़कर RIMS रांची में सीनियर रेजिडेंट का पद हासिल किया है। वे डॉक्टरी के साथ कम खर्च में गरीबों का इलाज कर सेवा की मिसाल पेश कर रही हैं।
शुरुआती जीवन और शिक्षा का सफर
पलामू की माटी में पली-बढ़ीं डॉ. अमितु सिंह बचपन से ही पढ़ाई में होनहार थीं। छोटे शहर में संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। अपनी स्कूली शिक्षा और इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने मेडिकल की दुनिया में कदम रखा।
पारिवारिक रूढ़ियों को तोड़कर पाई सफलता
अमितु ने पारिवारिक बंदिशों और सख्त सामाजिक सोच के बावजूद डॉक्टर बनने की अपनी इच्छा को डिगने नहीं दिया। बेटियों के बाहर पढ़ने पर रोक के बीच जब उन्हें घर से 40 किमी दूर गढ़वा डेंटल कॉलेज में पढ़ने का मौका मिला, तो कड़ी निगरानी के बावजूद उन्होंने इसे अपना आधार बनाया। निरंतर मेहनत और बढ़ते आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने अपनी मंजिल हासिल की।
RIMS रांची में मिली बड़ी उपलब्धि
कड़ी मेहनत, परिवार के प्रोत्साहन और अपनी अटूट इच्छाशक्ति के दम पर डॉ. अमितु सिंह ने आखिरकार सफलता का परचम लहराया। उनका चयन रिम्स (RIMS) रांची के डेंटल इंस्टीट्यूट में हुआ। यहां वे न केवल मरीजों के बेहतर इलाज में अपना योगदान दे रही हैं, बल्कि संस्थान में आने वाले नए मेडिकल एस्पिरेंट्स और छात्रों को भी गाइड करती हैं।
इलाज और जनसेवा
सीनियर लेक्चरर रहते हुए डॉ. अमितु ने मेदिनीनगर में क्लिनिक खोला। उन्होंने डॉक्टरी को कमाई से ऊपर रखकर गरीबों का केवल 500 रुपये से 2,000 रुपये में इलाज किया और अत्यंत जरूरतमंदों को फ्री मेडिकल सुविधाएं देकर सेवाभाव की अनूठी मिसाल पेश की।
छात्रों के लिए प्रेरणा और संदेश
डॉ. अमिता सिंह की सफलता यह सिखाती है कि करियर में बड़ी ऊंचाइयां हासिल करने के लिए किसी बड़े मेट्रो शहर या सुविधाओं की जरूरत नहीं होती। आपकी मेहनत, खुद पर भरोसा और सही दिशा में प्रयास ही सबसे बड़ी ताकत होते हैं।
वे बताती हैं कि मेडिकल की पढ़ाई में लगातार पढ़ते रहना और धैर्य रखना सबसे महत्वपूर्ण है। असफलताओं या कठिनाइयों से घबराए बिना अगर आप अपने लक्ष्य पर टिके रहते हैं, तो सफलता एक न एक दिन जरूर मिलती है।
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