आजकल ज्यादातर लोग बिजी लाइफस्टाइल में दिनचर्या बीता रहे हैं। ऐसे में डिजिटल डिटॉक्स का शब्द काफी में चर्चा में है। डिजिटल डिटॉक्स का मतलब होता है कि मोबाइल, लैपटॉप और अन्य गैजेट्स से दूरी बना लेना। डिजिटल दौर में लोग ज्यादातर फोन में व्यस्त रहते हैं। काम के दौरान बार-बार फोन चेक करते रहना। धीरे-धीरे यह आदत लत बन जाती है और फिर बिना वजह भी फोन देखने की इच्छा अधिक हो जाती है। फिर ऐसा समय आता है कि खुद को गैजेट्स से अलग कर पाना काफी मुश्किल होता है। इन्हीं आदतों से छुटकारा पाना डिजिटल डिटॉक्स कहा जाता है। इसका अर्थ यह नहीं कि पूरी तरह से तकनीक को छोड़ देना, बल्कि तय समय तक इससे दूर रहना।
नींद न आने की समस्या हो सकती है दूर
कई रिसर्च से पता चला है कि कम से कम एक घंटा डिजिटल डिटॉक्स करना फायदेमंद होता है। इससे नींद की गुणवत्ता में काफी सुधार आता है। वहीं, शरीर में ज्यादा ऊर्जावन महससू करता है और रचनात्मकता भी बढ़ती है। लेकिन फिर भी कुछ लोग यह तय नहीं कर पाते हैं कि डिटॉक्स कब और कितनी देर किया जाए।
न्यूरोसाइंस के शोध बताते हैं कि मस्तिष्क को फिर से तरोताजा करने के लिए लंबे आराम की नहीं, बल्कि छोटे-छोटे ब्रेक की जरूरत होती है। जब व्यक्ति कुछ समय के लिए मोबाइल, टीवी और दूसरे डिजिटल गैजेट्स से दूरी बना लेता है, तो दिमाग को सुकून मिलता है। यह विराम केवल मानसिक थकावट को कम नहीं करता, बल्कि मस्तिष्क की नई कोशिकाओं के विकास में भी मददगार साबित होता है। इससे एकाग्रता, समझने की क्षमता और सोचने की शक्ति में सकारात्मक सुधार देखने को मिलता है।
कैसे करें डिजिटल डिटॉक्स
– लंबे समय तक डिटॉक्स रहने के लिए किसी के लिए इतना आसान नहीं है, इसलिए आप छोटे-छोटे ब्रेक ले सकते हैं। हफ्ते में एक दिन या प्रतिदिन एक घंटा का डिटॉक्स कर सकते हैं।
– डिजिटल डिटॉक्स की शुरुआत करने के लिए रविवार का दिन सबसे बढ़िया है। कोशिश करें कि सुबह से रात तक फोन बंद रखें या उसे दूसरे कमरे में रखें।
– फोन के ज्यादातर नोटिफिकेशन को बंद कर दें। केवल काल और जरूरी मैसेज ही चालू रखें।
– फोन की स्क्रीन को ब्लैक एडं व्हाइट मोड में रखें। क्योंकि रंगीन स्क्रीन ज्यादा आकर्षित करते हैं, जबकि सादा मोड डोपामाइन के प्रभाव को कम करता है।
– रील देखने के स्थान पर पेटिंग, डायरी लिखना या टहलना शुरु करें। वहीं, हेडफोन के जगह आसपास की प्राकृतिक आवाजों को सुनें।
– खाना खाते समय टीवी या फोन से दूरी बनाकर रखें। खाने के स्वाद और खुशबू को महसूस करें। यह एक प्रकार से मानसिक फास्टिंग है।
कौन-सी आदतें हैं?
– इमेल देखने और मनोरंजन के लिए फोन पर एक समय निर्धारित करें।
– लिविंग रुम, डाइनिंग टेबल और स्टडी टेबल को डिवाइस फ्री जोन रखें।
– डिजिटल ब्रेक जरुर लें, 50 मिनट काम करने के बाद 10 मिनट स्ट्रेचिंग या वाकिंग करें।
– मोबाइल देखने की जगह पर कोई किताब जरुर पढ़े।
– रविवार को 5 घंटे चक फोन से दूरी रखें, कोई सोशल मीडिया का इस्तेमाल ना करें।
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