हालांकि, SEBI की ओर से किए गए बैंक खातों के विश्लेषण में कथित तौर पर एक अलग तस्वीर सामने आई। नियामक के अनुसार, ₹1,000 करोड़ का कथित इनफ्लो वास्तव में ₹25 करोड़ की एक बेस रकम को संबंधित संस्थाओं के बैंक खातों के बीच बार-बार घुमाने से बनाया गया। SEBI ने यह भी कहा कि शुरुआती ₹25 करोड़ की रकम का स्रोत भी कुछ अन्य संबंधित संस्थाओं से जुड़े संदिग्ध फंड रोटेशन से जुड़ा हुआ दिखाई देता है। इसी फंड ट्रेल के आधार पर नियामक ने प्रथम दृष्टया माना कि कथित लोन वास्तविक आर्थिक लेनदेन नहीं थे।
SEBI ने कंपनी, कथित लेंडर्स और प्रेफरेंशियल अलॉटीज के बीच कई कनेक्शन भी पाए। इनमें एक जैसे पते, कॉमन डायरेक्टर, अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता, बैंक शाखाओं से जुड़े संबंध और क्रॉस-शेयरहोल्डिंग जैसी समानताएं शामिल थीं। आदेश के मुताबिक, ये संस्थाएं प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सुरेंद्र जैन और वीरेंद्र जैन के स्वामित्व, नियंत्रण या प्रबंधन से जुड़ी थीं। SEBI ने एक अलग मामले में सर्च और जब्ती के दौरान मिले चैट मैसेज और कॉल रिकॉर्ड को भी कथित नियंत्रण के संकेत के रूप में देखा। कंपनियों के रजिस्टर्ड ऑफिस की जांच में भी नियामक ने कथित तौर पर वास्तविक कारोबारी गतिविधि और पर्याप्त भौतिक मौजूदगी की कमी पाई।
इस कथित लेनदेन का असर कंपनी के बाजार मूल्य पर भी दिखाई दिया। SEBI के आदेश के अनुसार, जांच की अवधि के दौरान धेनु बिल्डकॉन (Dhenu Buildcon) का मार्केट कैप करीब ₹3 करोड़ से बढ़कर ₹4,925 करोड़ तक पहुंच गया। खास बात यह थी कि इस दौरान कंपनी के रेवेन्यू और मुनाफे में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ। नियामक के अनुसार, मार्केट वैल्यू में यह उछाल कथित लोन-टू-इक्विटी कन्वर्जन से जुड़ा था। SEBI ने आशंका जताई कि यदि प्रेफरेंशियल शेयर वास्तविक वित्तीय भुगतान के बिना हासिल किए गए थे, तो बाद में बाजार में इन शेयरों की बिक्री से संबंधित पक्षों को अनर्जित लाभ मिल सकता था।
मामले में SEBI ने 6 व्यक्तियों और संस्थाओं को धेनु बिल्डकॉन (Dhenu Buildcon) के शेयरों में कारोबार करने से रोक दिया है। कंपनी को भी कॉरपोरेट एक्शन करने से प्रतिबंधित किया गया है। सुरेंद्र कुमार जैन और वीरेंद्र जैन को सिक्योरिटीज खरीदने-बेचने या सिक्योरिटीज मार्केट से प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ने से रोका गया है। साथ ही SEBI ने स्टॉक एक्सचेंजों को संबंधित पक्षों की सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट्स (Regulation) Rules, 1957 और अन्य लागू कानूनों के अनुपालन की जांच करने का निर्देश दिया है। ये SEBI के अंतरिम आदेश में लगाए गए आरोप और प्रथम दृष्टया निष्कर्ष हैं; मामले का अंतिम निष्कर्ष आगे की कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
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