बॉलीवुड में इन दिनों सीक्वल और पुरानी हिट फ्रैंचाइज़ी के रिवाइवल का दौर जारी है। जब बात बिना लॉजिक वाली, हल्की-फुल्की और ज़ोरदार सिचुएशनल कॉमेडी की आती है, तो ‘धमाल’ फ्रैंचाइज़ी का नाम सबसे पहले ज़हन में आता है। वर्ष 2007 में आई ओरिजिनल फिल्म के लगभग दो दशक बाद, निर्देशक इंद्र कुमार इस फ्रैंचाइज़ी की चौथी किस्त ‘धमाल 4’ लेकर आए हैं। बॉक्स ऑफिस पर बीते 10 दिनों से शानदार प्रदर्शन कर रही यह फिल्म दर्शकों को थिएटर तक खींचने में कामयाब रही है। अगर आप इस वीकेंड अपने परिवार के साथ बिना ज़्यादा दिमाग लगाए सिर्फ हंसने-मुस्कुराने का प्लान बना रहे हैं, तो यह फिल्म आपके लिए एक सही विकल्प साबित हो सकती है।
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आइए जानते हैं ‘धमाल 4’ की कहानी, इसकी खूबियाँ और इसे देखने के 10 प्रमुख कारण:
खजाने की खोज और रहस्यमयी द्वीप की कहानी
‘धमाल 4’ की कहानी फ्रैंचाइज़ी के आज़माए हुए फॉर्मूले पर ही टिकी है—सौ साल पुराने छिपे हुए खजाने की आपाधापी। इस बार खजाना एक रहस्यमयी द्वीप पर छिपा है, जिसका सुराग ‘पृथ्वी’ (उपेंद्र लिमये) की याददाश्त में बंद है।
इस खजाने को पाने के लिए तीन विरोधी टीमें दौड़ में शामिल होती हैं: –
गुड्डू (अजय देवगन) और उनके वफ़ादार साथी जॉनी (संजय मिश्रा), साथ में आलिया (ईशा गुप्ता)।
फ्रैंचाइज़ी की आइकॉनिक जोड़ी आदि (अरशद वारसी) और मानव (जावेद जाफ़री), जिनके साथ इस बार आदि की पत्नी (संजीदा शेख़) भी शामिल हैं।
लल्लन (रितेश देशमुख) और उनकी पत्नी पारो (अंजलि आनंद)।
इनके अलावा कहानी में तड़का लगाने के लिए ‘अधूरा’ (रवि किशन) नाम का एक अजीब और खतरनाक समुद्री डाकू भी मैदान में है।
फिल्म देखने के 10 बड़े कारण (Key Highlights)
अजय देवगन का सहज कॉमिक अवतार: अजय देवगन एक बार फिर कॉमेडी जॉनर में आसानी से ढल गए हैं। वे इस पूरी अफरातफरी के बीच फिल्म के एंकर का काम करते हैं।
आदि और मानव की आइकॉनिक जोड़ी: अरशद वारसी और जावेद जाफ़री की केमिस्ट्री और टाइमिंग आज भी इस फ्रैंचाइज़ी की सबसे बड़ी रीढ़ है।
सरप्राइज़ पैकेज—रवि किशन: एक अजीब विलेन और समुद्री डाकू के रूप में रवि किशन के डायलॉग डिलीवरी और हाव-भाव फिल्म के सबसे मनोरंजक पलों में से एक हैं।
अंजलि आनंद और रितेश की देसी कॉमेडी: लल्लन के रूप में रितेश देशमुख और उनकी पत्नी के किरदार में अंजलि आनंद ने बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग दिखाई है।
संजय मिश्रा के वन-लाइनर्स: अपनी खास कॉमिक टाइमिंग से संजय मिश्रा एक बार फिर दर्शकों को हंसाने में सफल रहते हैं।
पूरी तरह से फैमिली एंटरटेनर: एडल्ट ह्यूमर से दूर रहकर इंद्र कुमार ने इसे बच्चों और पूरे परिवार के साथ देखने योग्य सिचुएशनल व फिजिकल कॉमेडी बनाया है।
नॉस्टेल्जिया और रेफरेंस: पुरानी ‘धमाल’ फिल्मों और 90 के दशक की कॉमेडी शैली की यादें पुराने फैंस के चेहरे पर मुस्कान लाती हैं।
शानदार सिनेमैटोग्राफी: सुधीर कुमार चौधरी द्वारा शूट किए गए द्वीप, समुद्र और जंगलों के विज़ुअल्स फिल्म को एक भव्य सिनेमाई लुक देते हैं।
हाई-एनर्जी म्यूज़िक: ‘बेला चाओ’ का रीमेक और ‘साड़ी’ व ‘चटनी’ जैसे जोश भरे गाने थिएटर के माहौल को मनोरंजक बनाते हैं।
खूबसूरत इमोशनल सीख: फिल्म के अंत में पंचतंत्र जैसी एक सीख दी गई है कि लालच से मुसीबत आती है और परिवार व अपनों का साथ ही सबसे बड़ी संपत्ति है।
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कमज़ोर कड़ियाँ: जहाँ फिल्म मात खाती है
फिल्म में कुछ कमियाँ भी हैं जो ध्यान खींचती हैं:
पुराने जोक्स: कुछ मज़ाक 90 के दशक की शैली के लगते हैं, जो आज के दर्शकों को थोड़े पुराने ज़माने के लग सकते हैं।
कमज़ोर VFX: शेर, मगरमच्छ और तूफ़ान वाले दृश्यों में ग्रीन स्क्रीन और विज़ुअल इफ़ेक्ट्स काफी बनावटी और औसत दर्जे के लगते हैं।
धीमी रफ़्तार: सेकंड हाफ में खजाने की खोज के कई सीन ज़रूरत से ज़्यादा लंबे खिंचे हुए महसूस होते हैं।
अंतिम निर्णय (Verdict)
‘धमाल 4’ खुद को कोई गहरी या बौद्धिक कॉमेडी होने का दावा नहीं करती। यह एक विशुद्ध पॉपकॉर्न एंटरटेनर है। अगर आप लॉजिक को एक तरफ रखकर केवल हंसना चाहते हैं, तो यह स्टार-स्टडेड फिल्म आपको निराश नहीं करेगी।
रेटिंग: 3 / 5 स्टार
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