बारिश के सीजन में डेंगू का खतरा बढ़ जाता है। आसपास कई मामले डेंगू के मरीजों के मिलना शुरू हो गए है। ऐसे में मच्छरों से बचाव के साथ ही डेंगू के लक्षणों को जानना जरूरी है। बुखार के साथ इनमे से कोई भी लक्षण दिखें तो फौरन डॉक्टर से संपंर्क करें।
जानें डेंगू के लक्षण
तेज बुखार
डेंगू का सबसे पहला और बिल्कुल आम लक्षण बुखार होना है। ये बुखार काफी तेज होता है और बच्चों में तो 102, 104 डिग्री फॉरेनहाइट तक चढ़ जाता है। बुखार की दवा देने के बाद भी शरीर का तापमान कम नहीं हो रहा, बुखार के साथ ठंड लग रही और बेचैनी महसूस हो रही तो ये डेंगू बुखार हो सकता है।
मांसपेशियों और शरीर में दर्द
शरीर की मांसपेशियों में दर्द महसूस होता है, कमजोरी लगती है। बच्चा अगर खेल नहीं रहा और रो रहा तो सतर्क हो जाएं। वहीं बड़ों में बुखार के साथ शरीर में दर्द महसूस हो तो इसे हल्के में ना लें। डेंगू के बुखार में होने वाले दर्द की वजह से इसे ‘हाड़-तोड़’ बुखार भी बोला जाता है।
सिर दर्द, आंखों के पीछे दर्द
बुखार के साथ ही सिर में तेज दर्द महसूस हो रहा या आंखों में दर्द हो रहा, तेज लाइट अच्छी नहीं लगती।
उल्टी और मिचली लगना
भूख नहीं लगती, उल्टी और मिचली जैसा महसूस होता रहता है।
थकान महसूस होना
शरीर बेहद कमजोर लगता है और थकान महसूस होती रहती है।
स्किन पर रैशेज
अगर बुखार के कुछ दिनों बाद स्किन पर रैशेज या लालिमा दिख रही है तो ये डेंगू के लक्षण हो सकते हैं। शुरुआत में ये रैशेज सीने पर दिखते हैं और फिर दूसरे बॉडी पार्टस में भी नजर आने लगते हैं।
ब्लीडिंग
कुछ लोगों को मसूड़ों में ब्लीडिंग, नाक से ब्लीडिंग या फिर हल्की सी चोड लगने पर ब्लीडिंग स्टार्ट हो जाती है।
डेंगू के कुछ गंभीर लक्षण
डेंगू होने पर बुखार और ऊपर लिखे लक्षणों के अलावा कुछ गंभीर लक्षण नजर आएं तो फौरन डॉक्टर से इलाज के लिए जाना चाहिए। ये लक्षण डेंगू के गंभीर लक्षण माने जाते हैं और इन्हें डेंगू शॉक सिंड्रोम भी बोला जाता है।
- पेट में तेज दर्द हो रहा जिससे आराम नहीं मिल रहा।
- लगातार उल्टी हो रही और अगर उल्टी के साथ ब्लड आ गया है।
- सांस तेज-तेज लेना, सीने में फ्लूइड इकट्ठा होने की वजह से सांस बहुत तेजी से लेने लगता है मरीज।
- ब्लीडिंग नाक, मसूड़े या स्किन से ब्लीडिंग हो रही तो ये गंभीर लक्षण है।
- बेचैनी मरीज को बहुत ज्यादा बेचैनी महसूस हो रही और उसके व्यवहार में अंतर दिख रहा तो ये डेंगू के गंभीर लक्षण हो सकते हैं।
- घर या आसपास जानने वाले में किसी को बुखार के साथ इसमे से किसी भी तरह के लक्षण दिख रहे तो बिना देर किए अस्पताल में इलाज शुरू करवाना चाहिए।
डेंगू का बुखार कितने दिन रहता है
डेंगू के 3 फेज होते हैं
1- फेब्राइल फेज- ये शुरुआती स्टेज होता है और करीब 2-7 दिन तक रहता है। इसमे ही मरीज को बुखार के साथ दूसरे लक्षण नजर आते हैं।
2- क्रिटिकल फेज- डेंगू के लक्षण दिखने के बाद ये फेज 2-4 दिन का होता है। कुछ लोगों में ये फेज 3-7 दिन का भी हो जाता है। इस दौरान बुखार भले ही थोड़ा कम हो जाए लेकिन प्लाज्मा लीकेज और इंटरनल ब्लीडिंग जैसी समस्या होती है।
3-रिकवरी फेज- अगर क्रिटिकल फेज में इलाज सही मिल जाता है तो रिकवरी फेज स्टार्ट होता है और लक्षण धीरे-धीरे कम होने लगते हैं। बुखार खत्म हो जाता है और ब्लड काउंट बढ़ने लगता है। रिकवरी होने में कई हफ्ते लग जाते हैं।
डेंगू के बचाव क्या है
डेंगू से बचाव का एक ही तरीका है कि आसपास मच्छरों की पैदावार को कम किया जाए। डेंगू एडीज मच्छरों के काटने से फैलता है और इसके काटने पर डेंगू का खतरा रहता है। जिसकी पहचान समय पर बेहद जरूरी होती है। डेंगू से बचाव के लिए इन उपायों को जरूर अपनाएं।
- बच्चों और बड़ों को मच्छरों के काटने से खुद को बचाना चाहिए।
- घर और आसपास पानी ना जमा होने दें। गमले, कूलर, पुराने डिब्बे, कूलर की ट्रे, घर के अंदर रखें प्लांट्स में पानी ना इकट्ठा होने दें।
- मच्छर मारने वाले धुएं घर में करें। साथ ही बच्चों को स्किन सेफ मच्छर दूर रखने वाली क्रीम लगाएं।
- मच्छरदानी लगाकर सोएं, छोटे बच्चे हैं तो उन्हें दिन में भी मच्छरदानी के अंदर ही सुलाएं।
- खिड़की-दरवाजों पर जाली लगाएं जिससे मच्छर घर के अंदर ना आ सकें।
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