वहीं, पट्टा व्यवस्था में जमीन का स्वामित्व दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) जैसी सरकारी संस्था के पास रहता है और पट्टाधारक को केवल उसके इस्तेमाल का अधिकार मिलता है। मास्टर प्लान के अनुसार, पूरे टीओडी क्षेत्र को विकास क्षेत्र घोषित किया जाएगा, जिससे इस गलियारे में परियोजनाओं की मंजूरी प्रक्रिया में तेजी आएगी। दिल्ली मास्टर प्लान -2047 में कहा गया, ‘‘समेकित टीओडी भूखंड का हिस्सा पट्टे के आधार रहने वाले व्यक्तिगत भूखंड सभी बकाया राशि के भुगतान और मंजूरी की शर्त पर फ्रीहोल्ड माने जाएंगे।
हालांकि, पट्टे पर दिए गए संस्थागत भूखंडों को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा।’’
मास्टर प्लान के अनुसार, टीओडी परियोजनाओं की मंजूरी और भवन योजनाओं को स्वीकृति डीडीए नोडल एजेंसी देंगी। दिल्ली में वर्तमान में कई संपत्तियां पट्टा व्यवस्था के तहत हैं, जिसमें जमीन का स्वामित्व डीडीए के पास रहता है। लेकिन दिल्ली मास्टर प्लान-2047 पट्टा व्यवस्था से मुक्त होकर फ्रीहोल्ड स्वामित्व का रास्ता तैयार करता है।
डीडीए ने शनिवार को जारी बयान में कहा, ‘‘दिल्ली मास्टर प्लान-2047 में 30 मीटर या उससे अधिक चौड़ी सड़कों को अधिसूचित कर उनका विकास सीधे डीडीए करेगा। नए शहरी क्षेत्रों को आत्मनिर्भर पड़ोस के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां स्कूल, स्वास्थ्य सुविधाएं, पार्क, हरित क्षेत्र, व्यावसायिक केंद्र और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
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