नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा के डीपफेक वीडियो को लेकर बड़ा आदेश दिया है।
कोर्ट ने Meta Inc और Google Inc को उन कई फेसबुक पेज और यूट्यूब चैनलों को हटाने का निर्देश दिया है, जहां रजत शर्मा के डीपफेक वीडियो पोस्ट किए गए थे। यह आदेश 24 अगस्त 2026 को हाई कोर्ट की जस्टिस ज्योति सिंह द्वारा जारी स्थायी रोक (Permanent Injunction) के आदेश के तहत दिया गया।
जस्टिस ज्योति सिंह ने अपने आदेश में कहा कि Meta और Google को संबंधित शिकायत या अनुरोध मिलने के 24 घंटे के भीतर उसे स्वीकार करना होगा। इसके बाद उन्हें 36 घंटे के भीतर जरूरी कार्रवाई करनी होगी।
कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर संबंधित कंपनियां अनुरोध पर कार्रवाई नहीं करती हैं तो रजत शर्मा और इंडिया टीवी को उचित निर्देश के लिए दोबारा कोर्ट का रुख करने की आजादी होगी। कोर्ट के आदेश में जिन फेसबुक पेजों का नाम आया है, वे हैं:
- TAMARA DOC
- Indian Medical Association
- New Convivio
- Travinin
- The Hope of Your Joints
- LEGEND MAP 62
- MESONERO SOTO
वहीं, जिन YouTube चैनलों पर कार्रवाई का निर्देश दिया गया है, उनमें THE INDIAN NEWS TODAY और Sone Chandi Ka Bhav शामिल हैं।
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि रजत शर्मा प्रसिद्ध पत्रकार हैं, जो दो दशक से ज्यादा समय से भारतीय टेलीविजन का जाना-पहचाना चेहरा हैं और जिनकी भारत के साथ-साथ विदेशों में भी प्रतिष्ठा है। कोर्ट ने कहा कि पत्रकारिता के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें कई पुरस्कार मिल चुके हैं। इनमें 2015 में मिला पद्म भूषण भी शामिल है। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि रजत शर्मा पिछले 29 वर्षों से ‘आप की अदालत’ जैसे देश के सबसे सफल और लंबे समय से चल रहे टेलीविजन कार्यक्रम की मेजबानी कर रहे हैं। इसके अलावा उन्होंने कई अन्य लोकप्रिय टीवी कार्यक्रम भी किए हैं।
कोर्ट ने कहा कि आरोपित पक्षों की ओर से बड़े पैमाने पर गलत जानकारी फैलाने का काम किया जा रहा था। इसमें AI तकनीक का गलत इस्तेमाल करके रजत शर्मा के ऐसे डीपफेक वीडियो तैयार किए गए, जिनमें उनकी तस्वीर, आवाज और व्यक्तित्व से जुड़ी दूसरी विशेषताओं को बदलकर या छेड़छाड़ करके पेश किया गया। कोर्ट के आदेश में कहा गया कि, इस मामले में INDIA TV के रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क का बिना अनुमति इस्तेमाल और उल्लंघन तथा कॉपीराइट का उल्लंघन भी शामिल है। कोर्ट ने कहा कि रजत शर्मा और इंडिया टीवी ने इस मामले में मुकदमा दायर किया था। इसके बाद 18 दिसंबर 2024 के अंतरिम आदेश के जरिए शुरुआती आठ प्रतिवादियों को ऐसी सामग्री के संबंध में रोक दिया गया था।
मुकदमे के दौरान चार और YouTube चैनलों को मामले में पक्ष बनाया गया। इनमें THE REAL REPORT, THE INDIAN NEWS TODAY, JSR NEWS और Sone Chandi Ka Bhav शामिल थे। कोर्ट के आदेश में कहा गया कि ये YouTube चैनल रजत शर्मा की पहचान और व्यक्तित्व से जुड़ी अलग-अलग विशेषताओं का बिना अनुमति इस्तेमाल करते हुए डीपफेक वीडियो प्रसारित कर रहे थे। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, 7 नवंबर 2025 को Google Inc की ओर से अदालत में बताया गया था कि उसने 30 अक्टूबर 2024 को शिकायत मिलने और संबंधित YouTube चैनलों के खातों की समीक्षा के बाद The Real Report और JSR News के अकाउंट बंद कर दिए थे। वहीं The Indian News Today और Sone Chandi Ka Bhav के अकाउंट उस समय समीक्षा के अधीन थे।
इसके बाद कोर्ट ने Google को इन दोनों YouTube चैनलों को आदेश अपलोड होने के 36 घंटे के भीतर हटाने का निर्देश दिया। साथ ही Google को उपलब्ध BSI यानी बेसिक सब्सक्राइबर जानकारी, IP लॉग और दूसरे एक्सेस या संपर्क से जुड़े विवरण भी उपलब्ध कराने को कहा गया। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि ज्यादातर प्रतिवादियों को मामले की जानकारी और नोटिस दिए गए थे, लेकिन उन्होंने लिखित जवाब दाखिल नहीं किया। इसके बाद 15 जुलाई 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट के संयुक्त रजिस्ट्रार ने उनके लिखित जवाब दाखिल करने के अधिकार को बंद कर दिया।
हाई कोर्ट ने रजत शर्मा और इंडिया टीवी को भविष्य में सामने आने वाले ऐसे URLs या कंटेंट के संबंध में Meta Platforms Inc और Google LLC से संपर्क करने की भी छूट दी है, जो इस मामले से जुड़े हों। अगर किसी नए लिंक या कंटेंट में रजत शर्मा के नाम, चेहरे, तस्वीर, आवाज, वीडियो या उनकी पहचान से जुड़े किसी अन्य पहलू का सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से गलत इस्तेमाल होता है और इससे उनके व्यक्तित्व, पब्लिसिटी राइट्स, कॉपीराइट या ट्रेडमार्क का उल्लंघन होता है, तो वे संबंधित कंपनियों से उसे हटाने की मांग कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें संबंधित सामग्री का विवरण और जरूरी दस्तावेज हलफनामे के जरिए उपलब्ध कराने होंगे।
कोर्ट ने रजत शर्मा और इंडिया टीवी को भविष्य में अलग मुकदमे के जरिए INDIA TV के ट्रेडमार्क को 1999 के कानून की धारा 2(1)(zg) के तहत ‘Well-Known Trademark’ घोषित कराने की मांग करने की भी स्वतंत्रता दी है। इस आदेश के जरिए दिल्ली हाई कोर्ट ने AI से तैयार किए गए डीपफेक कंटेंट, किसी व्यक्ति की पहचान और आवाज के गलत इस्तेमाल तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ऐसे कंटेंट के प्रसार को लेकर स्पष्ट कानूनी रुख सामने रखा है।
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