सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें दावा किया जा रहा है कि आधा लीटर पानी से चूल्हा 6 महीने तक चल सकता है. वीडियो में पानी से हाइड्रोजन निकालकर गैस बनाने की बात कही जा रही है. लेकिन वैज्ञानिक सिद्धांतों के अनुसार यह दावा सही नहीं माना जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि पानी से हाइड्रोजन निकालने में जितनी ऊर्जा लगती है, उससे ज्यादा ऊर्जा वापस नहीं मिल सकती.
हाइड्रोजन को भविष्य के ईंधन के रूप में देखा जा रहा है.
यह वीडियो बेंगलुरु में स्थित आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के आश्रम से जुड़ा बताया जा रहा है, जहां एक व्यक्ति इस तकनीक का प्रदर्शन करता हुआ दिखाई दे रहा है. दावा यह है कि पानी से हाइड्रोजन बनाकर उसे ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है और बहुत कम पानी से लंबे समय तक गैस मिलती रहती है.
पानी से हाइड्रोजन निकालना आसान नहीं
विज्ञान के अनुसार पानी में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन दोनों तत्व होते हैं. लेकिन इन्हें अलग करने के लिए इलेक्ट्रोलिसिस नाम की प्रक्रिया करनी पड़ती है, जिसमें बिजली या बाहरी ऊर्जा की जरूरत होती है. विशेषज्ञों का कहना है कि पानी से हाइड्रोजन निकालने में जितनी ऊर्जा लगती है, उससे ज्यादा ऊर्जा उसे जलाने से नहीं मिल सकती. इसलिए केवल पानी डालकर बिना अतिरिक्त ऊर्जा के लंबे समय तक चूल्हा चलाना वैज्ञानिक नियमों के अनुरूप नहीं है.
ऊर्जा का साधारण गणित क्या कहता है
अगर आधा लीटर पानी से बनने वाली हाइड्रोजन की कुल ऊर्जा को जोड़ा जाए तो यह मात्रा बेहद सीमित होती है. एक सामान्य परिवार खाना बनाने के लिए हर महीने एलपीजी सिलेंडर से बहुत अधिक ऊर्जा का उपयोग करता है. ऐसे में केवल आधा लीटर पानी से कई महीनों तक गैस मिलती रहना ऊर्जा के साधारण गणित से भी मेल नहीं खाता. यही कारण है कि वैज्ञानिक इस दावे को संदेह के साथ देखते हैं.
दुनिया में हो रही है हाइड्रोजन तकनीक पर रिसर्च
दुनिया भर में हाइड्रोजन को भविष्य के ईंधन के रूप में देखा जा रहा है और कई देश इस पर काम कर रहे हैं. लेकिन मौजूदा तकनीक में हाइड्रोजन बनाने के लिए बड़े संयंत्र, बिजली और जटिल सिस्टम की जरूरत होती है. बिना किसी बाहरी ऊर्जा के केवल पानी से लगातार गैस बनती रहे और उससे महीनों तक चूल्हा चलता रहे, ऐसी तकनीक का अब तक कोई प्रमाणित उदाहरण सामने नहीं आया है.
वायरल वीडियो को लेकर सावधानी जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर अक्सर नई तकनीक के नाम पर कई दावे वायरल हो जाते हैं. लेकिन किसी भी दावे को सही मानने से पहले उसका वैज्ञानिक आधार और आधिकारिक पुष्टि होना जरूरी है. इस मामले में भी अभी तक किसी वैज्ञानिक संस्था या मान्यता प्राप्त तकनीकी एजेंसी ने इस तरह के चूल्हे की पुष्टि नहीं की है. इसलिए आधा लीटर पानी से छह महीने चूल्हा चलने का दावा फिलहाल वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं माना जा रहा है.
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जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे…और पढ़ें
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