लंदन में इन दिनों आम लोगों, युवाओं और बच्चों से उनके खेलने की मुफ्त जगहें छीनी जा रही हैं। शहर के सार्वजनिक स्केटपार्क, बच्चों के खेल के मैदान और बास्केटबॉल कोर्ट को तेजी से महंगे ‘पैडल कोर्ट’ में बदला जा रहा है। पैडल, टेनिस से मिलता-जुलता एक रैकेट खेल है, जो ब्रिटेन में इन दिनों काफी ट्रेंड में है। लेकिन परेशानी की बात यह है कि ये नए पैडल कोर्ट ‘पे-टू-प्ले’ (पैसे देकर खेलने वाले) मॉडल पर आधारित हैं। स्थानीय लोग इसे पैसे वालों के लिए सुविधाएं विकसित करने का तरीका मान रहे हैं। इस ट्रेंड का सबसे ताजा शिकार बार्किंग स्केटपार्क बना है, जो लंदन का इकलौता फुल-साइज इनडोर स्केटपार्क था। इसे हाल ही में हमेशा के लिए बंद कर दिया गया ताकि वहां पैडल कोर्ट बनाया जा सके। आइवा सैटो जैसी कई मांएं इस फैसले से नाराज हैं। उनकी 11 साल की बेटी टोको राष्ट्रीय स्तर की स्केटबोर्डर है, लेकिन अब उसके पास अभ्यास करने के लिए कोई सुरक्षित इंडोर जगह नहीं बची है। एक जिम्नास्टिक सेंटर भी बंद करके उसे प्राइवेट पैडल क्लब में बदल दिया गया था। लोगों के गुस्से की असली वजह इन कोर्ट्स की भारी-भरकम फीस है। लंदन में एक घंटे के लिए पैडल कोर्ट बुक करने का औसत खर्च 51 पाउंड (करीब 5,400 रुपए) है। आर्थिक रूप से कमजोर इलाकों में रहने वाले परिवारों के लिए यह रकम बहुत ज्यादा है। यह खेल इतना महंगा है कि यह आम लोगों को उनके ही इलाके की सुविधाओं से दूर कर रहा है। जनता अब इसके खिलाफ लामबंद भी हो रही है। कैमडन इलाके में बच्चों के खेलने की मुफ्त जगह को तोड़कर पैडल कोर्ट बनाने का प्रस्ताव था, जिसे एक साल के भारी विरोध के बाद पिछले हफ्ते रद्द करना पड़ा। बार्किंग स्केटपार्क को बचाने के लिए भी 4,500 से ज्यादा लोगों ने ऑनलाइन याचिका साइन की है। प्रशासन और ऑपरेटर कंपनियों का तर्क है कि पुराने पार्क घाटे में चल रहे थे। लेकिन जनता का सवाल यही है कि क्या किसी नए खेल को बढ़ावा देने के लिए आम लोगों के हिस्से की मुफ्त सार्वजनिक जगहें छीनना जायज है? बढ़ता खेल: 6 साल में 87 से 2 हजार तक पहुंच गई कोर्ट्स की संख्या टेनिस और स्क्वॉश के मेल से बना यह खेल तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। ब्रिटेन में इसे खेलने वालों की संख्या 10 लाख पार कर चुकी है। दुनियाभर में इसके करीब 3.5 करोड़ खिलाड़ी हैं। लंदन में हाल ही में आयोजित प्रीमियर पैडल टूर्नामेंट के टिकट हाथों-हाथ बिक गए। साल 2020 में ब्रिटेन में पैडल के सिर्फ 87 कोर्ट थे, जबकि अब इनकी संख्या दो हजार से ज्यादा है।
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