कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में वंदे मातरम् को लेकर लिए गए फैसले ने सरकार और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव की नई लाइन खींच दी है। कांग्रेस ने तय किया है कि वह वंदे मातरम् के शुरुआती दो पैरे ही गाएगी, जैसा 1937 से होता आया है। पार्टी ने इसके पीछे जवाहरलाल नेहरू, राजेंद्र प्रसाद, रवींद्रनाथ टैगोर और सरदार वल्लभभाई पटेल के फैसले का हवाला दिया है। इसी मुद्दे पर इंडिया टीवी के लोकप्रिय शो Coffee Par Kurukshetra में चर्चा हुई। इस चर्चा में शो के एंकर और इंडिया टीवी के सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर सौरव शर्मा, पॉलिटिकल एडिटर देवेंद्र पाराशर के साथ-साथ गेस्ट के रूप में प्रदीप सिंह और आलोक मेहता मौजूद रहे।
अमित शाह ने कांग्रेस के इस रुख पर तीखा हमला बोला। उनका कहना है कि 1937 में वंदे मातरम् को लेकर किया गया फैसला देश के विभाजन के बीज बोने वाली तुष्टीकरण की राजनीति से जुड़ा था और सरकार उस गलती को ठीक करने का प्रयास कर रही है। चर्चा में इसे कांग्रेस का बड़ा ‘सेल्फ गोल’ बताया गया और कहा गया कि इससे बीजेपी को अपने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के मुद्दे को आगे बढ़ाने का मौका मिला है।
डीलिमिटेशन पर कांग्रेस अलग-थलग
महिला आरक्षण और लोकसभा सीटों के परिसीमन के मुद्दे पर भी विपक्ष की मुश्किलें बढ़ती दिखीं। कांग्रेस की मांग है कि मौजूदा 543 लोकसभा सीटों पर ही महिला आरक्षण लागू किया जाए और सीटों की संख्या पर 25 साल तक रोक रहे। इसके विपरीत तमिलनाडु के विजय ने दक्षिणी राज्यों की लोकसभा सीटों के अनुपात में कमी न होने की गारंटी मांगी है, लेकिन 543 सीटों को फ्रीज करने की मांग नहीं उठाई।
चर्चा में इसे कांग्रेस के लिए बड़ा झटका बताया गया। इससे डीएमके पर भी दबाव कम होने की बात कही गई। तर्क दिया गया कि सीटें बढ़ने के साथ महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ेगा और कांग्रेस के मौजूदा रुख को महिला विरोधी नैरेटिव के रूप में पेश किया जा सकता है।
जातीय जनगणना पर अभी तस्वीर साफ नहीं
जातीय जनगणना के मुद्दे पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सरकार पर हमलावर हैं। कांग्रेस ने 2011 की सामाजिक-आर्थिक जनगणना का हवाला देते हुए सरकार के मौजूदा प्रारूप पर सवाल उठाया है। उसका कहना है कि उस समय बड़ी संख्या में जातियों और उपजातियों के नाम सामने आए थे और अब भी वही समस्या बनी हुई है।
बहस इस बात पर है कि जाति की पहचान कौन तय करेगा और अलग-अलग राज्यों की सूचियों को राष्ट्रीय स्तर पर कैसे जोड़ा जाएगा। सरकार का रुख है कि जातीय जनगणना कराई जाएगी, लेकिन इसके तरीके को लेकर अभी सवाल बने हुए हैं।
यूजीसी गाइडलाइंस पर सरकार ने छोड़ा संकेत
यूजीसी की गाइडलाइंस से जुड़े मामले में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि वह इस पर पुनर्विचार कर रही है। चर्चा में इसे अगड़ी जातियों की चिंताओं को दूर करने की दिशा में संभावित कदम माना गया, हालांकि सरकार ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि आगे क्या बदलाव किए जाएंगे।
डिटेल में पूरी चर्चा देखने के लिए सबसे ऊपर दिये गये वीडियो पर क्लिक करें।
(डिस्क्लेमरः यह आर्टिकल कार्यक्रम में हुई चर्चा पर आधारित है और कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए गए विचार मेहमानों के निजी विचार हैं।)
function loadFacebookScript(){
!function (f, b, e, v, n, t, s) {
if (f.fbq)
return;
n = f.fbq = function () {
n.callMethod ? n.callMethod.apply(n, arguments) : n.queue.push(arguments);
};
if (!f._fbq)
f._fbq = n;
n.push = n;
n.loaded = !0;
n.version = ‘2.0’;
n.queue = [];
t = b.createElement(e);
t.async = !0;
t.src = v;
s = b.getElementsByTagName(e)[0];
s.parentNode.insertBefore(t, s);
}(window, document, ‘script’, ‘//connect.facebook.net/en_US/fbevents.js’);
fbq(‘init’, ‘1684841475119151’);
fbq(‘track’, “PageView”);
}
window.addEventListener(‘load’, (event) => {
setTimeout(function(){
loadFacebookScript();
}, 7000);
});
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.