70% गिर गया मुनाफा
कंपनी का नेट प्रॉफिट पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले 70% घटकर ₹41 करोड़ से ₹12 करोड़ रह गया। हालांकि, रेवेन्यू में 4.8% की मामूली बढ़ोतरी हुई और यह ₹621.6 करोड़ से बढ़कर ₹651.4 करोड़ हो गया। कंपनी का EBITDA (कमाई) 51% घटकर ₹69.33 करोड़ से ₹34.05 करोड़ पर आ गया, वहीं EBITDA मार्जिन भी 11.15% से घटकर 5.23% रह गया।
मार्जिन पर दबाव के पीछे के कारण
कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ सिंगल-डिजिट में ही रही और मार्जिन पिछले कम से कम तीन वर्षों में अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। कंपनी के अनुसार, इस तिमाही में मुनाफे पर कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव और कुछ पुराने ऑर्डरों पर बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों तक पहुंचाने में देरी का बुरा असर पड़ा।
ऑर्डर, बैकलॉग और डिमांड का हाल
मार्जिन पर दबाव होने के बावजूद, कंपनी की मांग को लेकर उम्मीदें बनी हुई हैं। इस तिमाही में कंपनी को ₹915 करोड़ के ऑर्डर मिले, जबकि उसके पास बकाया ऑर्डर यानी बैकलॉग ₹2,169 करोड़ का है, जो पिछले साल की तुलना में 32.7% अधिक है। साथ ही, कंपनी डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर जैसे नए और तेजी से बढ़ते क्षेत्रों से मजबूत मांग देखती रही है।
ब्रोकरेज फर्म ने कहा-खरीदो
ब्रोकरेज फर्म एम्बिट ने जुलाई में ही श्नाइडर इलेक्ट्रिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर ‘खरीदें’ रेटिंग के साथ अपनी रिपोर्ट शुरू की थी। एम्बिट इस कंपनी को आने वाले कई वर्षों तक चलने वाली डेटा-सेंटर वृद्धि की थीम के लिए एक मजबूत विकल्प मानता है।
एम्बिट का अनुमान है कि कंपनी का डेटा-सेंटर कारोबार वित्त वर्ष 2026 से 2029 के बीच 50% की सालाना चक्रवृद्धि दर (CAGR) से बढ़ेगा, जिससे कंपनी के कुल राजस्व में इस अवधि के दौरान 24% की सालाना वृद्धि दर आने में मदद मिलेगी।
(डिस्क्लेमर: एक्सपर्ट्स की सिफारिशें, सुझाव, विचार और राय उनके अपने हैं, लाइव हिन्दुस्तान के नहीं। शेयर मार्केट में निवेश जोखिमों के अधीन है और निवेश से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें।)
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