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यह चेतावनी चीन के नए एंट्री और एग्ज़िट नियमों के लागू होने से पहले दी गई है, जो 15 सितंबर से प्रभावी होने वाले हैं। MAC ने कहा कि इन उपायों से मौजूदा नियंत्रण और औपचारिक हो जाएंगे, जबकि महत्वपूर्ण प्रावधानों को मोटे तौर पर परिभाषित किया जाएगा, जिससे चीनी अधिकारियों को इन्हें लागू करने में काफ़ी हद तक अपनी मर्ज़ी से फ़ैसला लेने की गुंजाइश मिल सकती है। काउंसिल ने चेतावनी दी कि ‘ताइवान कॉम्पैट्रियट परमिट’ रखने वाले ताइवानी यात्रियों को भी नए नियमों के तहत जांच का सामना करना पड़ सकता है। उसने बताया कि चीनी अधिकारियों ने पहले भी ऐसे लोगों को निशाना बनाया है जिन्होंने सालों पहले राजनीतिक या अधिकारों से जुड़ी गतिविधियां की थीं, भले ही वे बाद में दूसरे क्षेत्रों में चले गए हों।
यह ताज़ा मामला तब सामने आया जब सोशल मीडिया पर एक ताइवानी व्यक्ति ने बताया कि शंघाई में बिज़नेस के सिलसिले में यात्रा करते समय चीनी कस्टम अधिकारियों ने उसके बेटे को रोक लिया था।
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‘द ताइपे टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, सादे कपड़ों में आए तीन अधिकारियों ने कथित तौर पर उससे एमनेस्टी इंटरनेशनल में उसके पिछले काम के बारे में पूछताछ की। इसमें संस्था की फंडिंग, चीन, हांगकांग, शिनजियांग और तिब्बत से जुड़ी गतिविधियां और एक्टिविस्ट व राजनीतिक हस्तियों के साथ उसके संपर्क शामिल थे। अधिकारियों ने कथित तौर पर उस व्यक्ति पर अपना सेलफोन अनलॉक करने का दबाव डाला और उसके मैसेज, तस्वीरें, ईमेल और काम से जुड़ी फाइलें देखीं।
आखिरकार उसने चीन में प्रवेश करने का अपना आवेदन वापस ले लिया और सुरक्षित ताइवान लौट आया। MAC ने कहा कि यह घटना अधिकारियों द्वारा पहले दर्ज की गई ऐसी ही घटनाओं से मेल खाती है, हालांकि परिवार ने इस मामले की औपचारिक रूप से रिपोर्ट नहीं की थी, जैसा कि ‘द ताइपे टाइम्स’ ने बताया है।
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