मार्क कार्नी रविवार शाम दिल्ली पहुंचे. सोमवार को उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात हो सकती है. आपको याद होगा, कुछ समय पहले कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत के साथ कैसा बर्ताव किया था. उन्होंने निज्जर मर्डर केस में बिना सबूत भारत पर आरोप मढ़ दिए थे. इसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजदूतों को निकाल दिया था, वीज़ा बंद हो गए थे और रिश्ते पूरी तरह से गर्त में चले गए थे. लेकिन राजनीति में कोई सगा नहीं होता, सिर्फ फायदा देखा जाता है. जब ट्रूडो की कुर्सी गई और मार्क कार्नी नए प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने सबसे पहला काम क्या किया? उन्होंने पीएम मोदी को फोन घुमाया. पीएम मोदी ने भी पुरानी बातों पर मिट्टी डाली और दोस्ती का हाथ बढ़ा दिया. फिर क्या था रिश्ता चल निकला.
कनाडा को किस बात की टेंशन
कनाडा और अमेरिका पड़ोसी हैं. कनाडा अपना 75% से ज्यादा सामान और लगभग पूरी बिजली/गैस अमेरिका को बेचता है. जब तक वहां जो बाइडेन थे, सब ठीक था. लेकिन जैसे ही डोनाल्ड ट्रंप की वापसी हुई, उन्होंने पुराना वर्ल्ड ऑर्डर तोड़ दिया. ट्रंप ने कनाडाई सामानों पर भारी टैरिफ लगा दिया. कनाडा को समझ आ गया कि जिस अमेरिका के भरोसे वो अब तक था, उसने तो रातों-रात मुंह फेर लिया. अब अगर कनाडा को अपनी अर्थव्यवस्था बचानी है, तो उसे अमेरिका से अपनी निर्भरता खत्म करनी होगी. और इसके लिए उसे एक ऐसा देश चाहिए जो बहुत बड़ा हो, तेजी से तरक्की कर रहा हो और जो अमेरिका के दबाव में न आए. वो देश है- भारत.
क्यों भारत कनाडा के लिए यह विन विन सिचुएशन
कनाडा के पास क्या है, जो दे सकता है?
अब सवाल यह है कि भारत और कनाडा एक-दूसरे को क्या दे सकते हैं? तो बता दें कि कनाडा के पास बहुत सारा यूरेनियम है,जिससे न्यूक्लियर एनर्जी यानी बिजली बनती है.क्रिटिकल मिनरल्स हैं, जो मोबाइल और इलेक्ट्रिक कारों की बैटरी में लगते हैं. गैस (LNG) और बहुत सारा पैसा है, जो हमारे काम आ सकता है.
भारत को कनाडा से क्या चाहिए?
भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है. हमें अपनी फैक्ट्रियां चलाने के लिए गैस चाहिए, बिजली के लिए यूरेनियम चाहिए और देश में सड़कें-हाइवे बनाने के लिए विदेशी पैसा चाहिए.
कनाडा भारत दोनों के लिए कैसे फायदेमंद?
कनाडा को बेचने के लिए नया बाजार मिल गया और भारत को अपना विकास करने के लिए कच्चा माल और पैसा. कनाडा की बड़ी कंपनियों ने पहले ही भारत के एयरपोर्ट और हाइवे में करीब 100 बिलियन डॉलर यानी अरबों रुपये लगा रखे हैं. अब दोनों देश मिलकर अपने व्यापार को 30 बिलियन डॉलर से बढ़ाकर 70 बिलियन डॉलर तक ले जाने की तैयारी कर रहे हैं.
पीएम मोदी का ‘मास्टरस्ट्रोक’
इस पूरी कहानी में पीएम मोदी की पिछले 10 साल की कूटनीति ‘सुपरहिट’ साबित हुई है. जब रूस और यूक्रेन लड़ रहे थे, तो अमेरिका ने भारत पर दबाव बनाया कि रूस से तेल मत खरीदो. लेकिन मोदी ने साफ कह दिया, हम अपने लोगों का फायदा देखेंगे. भारत ने सस्ता रूसी तेल भी खरीदा और अमेरिका से भी दोस्ती पक्की रखी. इसे कहते हैं ‘स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी’ यानी यानी किसी गुट के साथ न जाना, अपने फैसले खुद लेना. आज जब ट्रंप की हरकतों से दुनिया के कई देश घबराए हुए हैं, तो उन्हें भारत में एक ‘भाई’ नजर आ रहा है.
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.