कहते हैं कि जहां चाह है वहां राह है। इस कहावत का सही उदाहरण हैं तेलंगाना के सरकारी स्कूल की टीचर बोम्पेल्ली भवानी। जिन्होंने पढ़ाने के तरीके से स्कूल में छात्रों की संख्या बढ़ाई है। उनके स्कूल में जहां पहले करीब 40 छात्र थे, वहीं अब यह संख्या करीब 130 तक पहुंच गई है।
कौन हैं बोम्पेल्ली भवानी?
बोम्पेल्ली भवानी तेलंगाना के कामारेड्डी जिले के एमपीपीएस गर्ल्स गंधारी स्कूल में टीचर हैं। उनका मकसद बच्चों के लिए पढ़ाई को आसान और रुचिकर बनाना रहा है। इसके लिए उन्होंने क्लास में खेल और टेक्नोलॉजी की मदद से पढ़ाने के तरीकों को अपनाया। पहले जब उन्होंने पढ़ाना शुरू किया था, तब कक्षा में करीब 40 बच्चे थे। लेकिन अपने अंदाज में पढ़ाने की वजह से यह संख्या बढ़कर 130 तक पहुंच गया। उन्होंने छोटे बच्चों की शुरुआती शिक्षा पर भी ध्यान दिया और ऐसा माहौल तैयार किया, जहां बच्चे खेल-खेल में सीख सकें।
गणित पढ़ाने का आसान तरीका
अमूमन मैथ को सबसे कठिन सब्जेक्ट माना जाता है। लेकिन उन्होंने बच्चों को लिए इस विषय को आसान बना दिया। वो गणिक के सवालों को सीधे फार्मूला से नहीं समझाती हैं, बल्कि पहले वास्तविक चीजों और फिर पिक्चर्स यानी चित्रों के जरिए समझाती हैं। इसके बाद उन्हें संख्या, चिन्ह और सूत्रों के जरिए सवाल हल करना सिखाया जाता है।
1,336 वीडियो और 57 करोड़ से ज्यादा व्यूज
भवानी की उपलब्धियों में डिजिटल एजुकेशन का भी बड़ा योगदान है। क्योंकि आज डिजिटल प्लेटफॉर्म की मदद से एक टीचर अपनी कक्षा में तैयार किया गया पाठ बहुत बड़े लेवल पर छात्रों तक पहुंचा सकता है। भवानी ने इसी अवसर का इस्तेमाल बच्चों की पढ़ाई को स्कूल की कक्षा से बाहर तक पहुंचाने के लिए किया। उन्होंने अब तक 1336 टीचिंग वीडियो बनाए हैं। इन वीडियो को कुल मिलाकर 57 करोड़ से अधिक व्यूज मिल चुके हैं।
इन वीडियो के जरिए उनकी पढ़ाई सिर्फ उनके स्कूल तक सीमित नहीं रही। इंटरनेट के माध्यम से उनकी तैयार की गई कंटेंट दूसरे बच्चों और शिक्षकों तक भी पहुंची।
बच्चों की पढ़ाई के साथ समुदाय के लिए भी काम
भवानी का काम सिर्फ कक्षा में पढ़ाने तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने अनाथ बच्चों के लिए नवजीवन फाउंडेशन की स्थापना की। इसके अलावा वह ग्रामीण छात्रों को राज्य के आवासीय स्कूलों की प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी में भी मदद करती रही हैं। उन्होंने बच्चों के साथ-साथ समुदाय को भी शिक्षा से जोड़ने की कोशिश की। उनका काम इस बात का उदाहरण है कि शिक्षक की भूमिका सिर्फ किताब पढ़ाने तक सीमित नहीं होती।
बच्चों को ‘गुड टच-बैड टच’ भी सिखाया
भवानी ने छोटे बच्चों को गुड टच और बैड टच जैसी जरूरी बातें समझाने के लिए कविताओं और राइम्स का सहारा लिया। बच्चों की उम्र और समझ को ध्यान में रखते हुए उन्होंने ऐसे तरीके अपनाए, जिससे वे जरूरी बातों को आसानी से समझ सकें।
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