गर्मी के मौसम में त्वचा पर बिना किसी स्पष्ट कारण के नीले या बैंगनी रंग के निशान दिखाई देना कई लोगों को परेशान कर सकता है। अक्सर इसे सामान्य मौसमी प्रभाव मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन हर बार ऐसा होना केवल बढ़ते तापमान से जुड़ा नहीं होता। कुछ मामलों में ये निशान शरीर में पोषक तत्वों की कमी, रक्त संबंधी समस्याओं या अन्य स्वास्थ्य स्थितियों की ओर भी इशारा कर सकते हैं। इसलिए त्वचा पर अचानक उभरने वाले ऐसे बदलावों पर ध्यान देना और उनके कारण को समझना महत्वपूर्ण है।
साइनोसिस क्या है ?
साइनोसिस का मतलब है त्वचा का नीला पड़ जाता है। यह तब होता है जब खून में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। खासकर होंठ, उंगलियों के सिरे, नाखूनों के नीचे की त्वचा या कभी-कभी पूरा शरीर हल्का नीला दिखाई देने लगता है। वैसे यह स्थिति आमतौर पर सामान्य नहीं मानी जाती है। इसका सीधा संबंध दिल या फेफड़ों की बीमारी से हो सकता है।
आपको बता दें कि, गर्मी पड़ने से सायनोसिस नहीं होता। लेकिन बहुत ज्यादा डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी होने से रक्त संचार प्रभावित हो सकता है और समस्या दिखाई देने लगती है।
त्वचा पर क्यों पड़ते नीलें निशान
चोट के निशान- कई बार बिना चोट याद आए भी शरीर पर नीले निशान दिखाई दे सकते हैं। चोट के निशान यानी ब्रूज होते हैं। जब त्वचा के नीचे की छोटी रक्त वाहिकाएं टूट जाती है, तब थोड़ा खून आसपास के ऊतकों में फैल जाता है और त्वचा नीली या बैंगनी दिखने लगते हैं। देखा गया है कि चोट बहुत हल्के होते हैं और व्यक्ति को याद भी नहीं रहता कि चोट कब लगी थी।
दवाइयां – कई लोगों के शरीर पर बिना चोट लगे भी बार-बार नीले या बैंगनी रंग के निशान दिखाई देने लगते हैं। ऐसे निशानों के पीछे कई अलग-अलग वजहें हो सकती हैं। विशेष रूप से रक्त को पतला करने वाली कुछ दवाओं का सेवन करने से त्वचा के नीचे मौजूद छोटी रक्त वाहिकाएं आसानी से प्रभावित हो जाती हैं, जिससे मामूली दबाव या हल्के स्पर्श पर भी नील पड़ सकते हैं।
विटामिन की कमी- विटामिन सी और विटामिन- K कीकमी के कारण त्वचा पर नीले निशान पड़ जाते हैं। बढ़ती उम्र में त्वचा और रक्त वाहिकाएं कमजोर हो जाती है, इसलिए बुजुर्गों में यह समस्या काफी देखी गई है। कई बार खून की कमी से यह बीमारियां भी जिम्मेदार हो सकती हैं।
नीले पड़ने और रक्तस्राव में क्या अंतर है
गौरतलब है कि नील पड़ने और रक्तस्राव में काफी अंतर होता है। चोट लगने पर त्वचा पर थोड़ा खून जम जाता है, जिसको नील कहते हैं। वैसे यह धीरे-धीरे खत्म होता है। हालांकि रक्तस्राव में लगातार खून बहता है। असल में यह शरीर के बाहर या अंदर कहीं भी हो सकता है और कई बार यह स्थिति बन जाता है।
नीले निशान को लेकर कब चिंता करें
अगर शरीर पर बिना किसी चोट के कारण बार-बार नीले धब्बे उभरने लगें, उनका रंग गहरा होता जाए या आकार लगातार बढ़ने लगे, तो इसे सामान्य मानकर अनदेखा नहीं करना चाहिए। विशेष रूप से जब इसके साथ मसूड़ों से रक्तस्राव, बार-बार नकसीर, अत्यधिक कमजोरी, चक्कर आने या लगातार थकावट जैसी समस्याएं भी दिखाई दें, तो जल्द से जल्द डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है। वहीं यदि होंठों का रंग नीला पड़ने लगे या सांस लेने में कठिनाई महसूस हो, तो यह गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है और तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
शरीर के नीले निशान को बारे में जानें
असल में हर नीला निशान किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता है। लेकिन शरीर के हर बदलाव को बदलते मौसम का असर मान लेना भी सही नहीं है। हमारा शरीर अक्सर बड़ी बीमारी के आने से पहले छोटे संकेत नजर आते हैं। इसलिए शरीर में होने वाले असामान्य बदलावों पर ध्यान देना जरुरी है। अगर कोई लक्षण लंबे समय तक बन रहें या बार-बार नजर आ रहे हैं, तो एक बार डॉक्टर को दिखा लें।
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