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काला चना एक सस्ता और पोषण से भरपूर सुपरफूड है, जो सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है। इसमें प्रोटीन, फाइबर, आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और कई जरूरी विटामिन्स–मिनरल्स होते हैं। यही वजह है कि इसे रोजमर्रा की डाइट में शामिल करने की सलाह दी जाती है।
‘नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, काले चने में फाइबर, प्रोटीन और अन्य बायोएक्टिव कंपाउंड्स होते हैं, जो डायबिटीज और हार्ट डिजीज का जोखिम कम करते हैं।
इसलिए ‘जरूरत की खबर‘ में आज काले चने के हेल्थ बेनिफिट्स की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- चने में कौन-कौन से पोषक तत्व होते हैं?
- चने को किस रूप में खाना ज्यादा फायदेमंद है?
एक्सपर्ट: डॉ. अनु अग्रवाल, सीनियर क्लीनिकल डाइटीशियन, फाउंडर- ‘वनडाइटटुडे’
सवाल- चने में कौन-कौन से पोषक तत्व होते हैं?
जवाब- ‘यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर’ (USDA) के मुताबिक, काला चना ‘पोषक तत्वों का खजाना’ है। एक न्यूट्रिएंट-डेंस फूड होने के कारण यह कम मात्रा में भी कई जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराता है। इसमें मौजूद प्रोटीन और फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद करते हैं। 100 ग्राम काले चने की न्यूट्रिशनल वैल्यू नीचे ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्या काबुली चने में भी काले चने के बराबर न्यूट्रिएंट्स होते हैं?
जवाब- दोनों में फाइबर, प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स अच्छी मात्रा में होते हैं। हालांकि इनकी मात्रा में थोड़ा अंतर होता है। इसलिए किसी एक को दूसरे से बेहतर नहीं कहा जा सकता है। दोनों को संतुलित डाइट में शामिल किया जा सकता है।
सवाल- चने के हेल्थ बेनिफिट्स क्या हैं?
जवाब- सारे बेनिफिट्स पॉइंटर में देखिए–
- फाइबर और प्रोटीन से भरपूर होने के कारण चना लंबे समय तक पेट भरा रखता है।
- इससे बार-बार भूख नहीं लगती और ओवरईटिंग से बचाव होता है।
- चने में मौजूद फाइबर गट हेल्थ को बेहतर बनाता है। इससे कब्ज की समस्या कम होती है।
- चने का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जो ब्लड शुगर तेजी से बढ़ने नहीं देता। इससे शुगर मैनेजमेंट में मदद मिलती है।
- चना पोटेशियम-मैग्नीशियम का अच्छा सोर्स है, जो कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करते हैं। इससे हार्ट डिजीज का रिस्क कम होता है।
- चने में आयरन और फोलेट होते हैं, जो रेड ब्लड सेल्स के प्रोडक्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। रोज खाने से एनीमिया का रिस्क कम होता है।
- चना प्लांट-बेस्ड प्रोटीन का अच्छा सोर्स है। यह मसल्स रिपेयर और ग्रोथ में मदद करता है।
- इसमें कैल्शियम, फॉस्फोरस और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स होते हैं, जो हड्डियों और दांतों की मजबूती बनाए रखने में मदद करते हैं।

सवाल- चने को अपनी डाइट में कैसे शामिल कर सकते हैं?
जवाब- चने को कई तरीके से अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं, जैसेकि-
- रातभर भिगोए हुए चने को सुबह नाश्ते में खा सकते हैं।
- चने में प्याज, टमाटर, खीरा, नींबू, हरी धनिया मिलाकर हेल्दी सलाद बना सकते हैं।
- उबले चने में मसाले, नींबू और सब्जियां मिलाकर पौष्टिक चाट बना सकते हैं।
- चने की स्वादिष्ट सब्जी बना सकते हैं।
- चने को अंकुरित करके सलाद/स्नैक के रूप में खा सकते हैं।
- उबले हुए चने को सूप में डालकर पी सकते हैं।
- चने को पुलाव या खिचड़ी में मिला सकते हैं।
- भुने चने को एक हेल्दी स्नैक के रूप में ले सकते हैं।
- चना दाल का चीला बना सकते हैं।
- चने के बेसन से कई डिशेज बनती हैं।
सवाल- चने को किस रूप में खाना ज्यादा फायदेमंद है- भुना हुआ, अंकुरित या उबला हुआ?
जवाब- डॉ. अनु अग्रवाल बताती हैं कि तीनों रूपों में चना पौष्टिक और फायदेमंद होता है।
- अंकुरित चना सबसे ज्यादा पौष्टिक माना जाता है। अंकुरण के दौरान इसमें कुछ विटामिन्स और एंटीऑक्सिडेंट्स की मात्रा बढ़ जाती है। इससे पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर होता है।
- उबला चना पचाने में आसान होता है। यह उन लोगों के लिए अच्छा विकल्प है, जिन्हें गैस या पाचन संबंधी समस्या रहती है।
- भुना चना एक हेल्दी स्नैक है। इसमें प्रोटीन और फाइबर अच्छी मात्रा में बने रहते हैं। यह लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करता है।

सवाल- क्या डायबिटिक लोग भी चना खा सकते हैं?
जवाब- हां, बिल्कुल खा सकते हैं। उसका साइंटिफिक रीजन ऐसे समझिए-
- चने का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) कम होता है। इसमें फाइबर, प्रोटीन भरपूर होता है। इसलिए ये खाने के बाद ब्लड शुगर को तेजी से नहीं बढ़ाता और लंबे समय तक पेट भरा रखता है।
- इसमें मौजूद फाइबर, कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण की गति धीमी करता है। इससे ब्लड शुगर तेजी से स्पाइक नहीं होता।
- यह वेट कंट्रोल में मदद कर सकता है, जो डायबिटीज मैनेजमेंट का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
- हालांकि डायबिटिक लोगों को चने का सेवन संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए।
सवाल- क्या बच्चों को चना दे सकते हैं?
जवाब- हां, चना बच्चों की फिजिकल और मेंटल ग्रोथ में मदद करता है। इसलिए–
- जब बच्चा कुछ ठोस आहार लेने लगे तो उसे चना दिया जा सकता है।
- आमतौर पर 1 साल के बच्चे को चना खिला सकते हैं। लेकिन इसे पूरी रात भिगोकर, अच्छे से पीसकर, फिर दाल या खिचड़ी में मिलाकर ही दें।
- छोटे बच्चों को चना उबालकर या चना दाल के रूप में दिया जा सकता है।
- शुरू में कम मात्रा में दें। अगर बच्चे को गैस, पेट फूलने या एलर्जी जैसी समस्या हो तो डॉक्टर से सलाह लें।
सवाल- क्या ज्यादा चना खाने के कोई नुकसान भी हैं?
जवाब- हां, जरूरत से ज्यादा चना खाने से गैस, पेट फूलना, अपच और पेट दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए चने का सेवन संतुलित मात्रा में ही करें। साथ ही चने के साथ पर्याप्त पानी पीना जरूरी है। इससे चना आसानी से पचता है।
सवाल- किन लोगों काे चना खाने में सावधानी बरतनी चाहिए?
जवाब- वैसे तो चना हर किसी के लिए फायदेमंद है। लेकिन कुछ लोगों को चना कम खाना चाहिए या डाइटीशियन की सलाह से ही खाना चाहिए।

सवाल- एक दिन में कितना चना खा सकते हैं?
जवाब- चने की सही मात्रा व्यक्ति की उम्र, फिजिकल एक्टिविटी, हेल्थ कंडीशन और डाइट पर निर्भर करती है।
- आमतौर पर एक स्वस्थ वयस्क व्यक्ति के लिए रोजाना 30-50 ग्राम सूखा चना (भिगोने या पकाने से पहले) खाना सुरक्षित माना जाता है।
- यह मात्रा भिगोने या उबालने के बाद लगभग एक छोटी कटोरी (लगभग ½ से 1 कप) के बराबर हो जाती है।
- अगर कोई समस्या है तो चने की मात्रा तय करने के लिए डाइटीशियन की सलाह लें।
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