हैरानी की बात यह है कि वह खुद को अजीत डोभाल का अंडरकवर एजेंट बताता था। साथ ही दावा करता था कि उसकी बात सीधे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से होती थी।
10वीं में जिला टॉपर, फिर यूपीएससी की तैयारी
बता दें कि मनीष कुमार खड़गिया जिला का रहने वाला है। उसका जन्म 1975 में हुआ था। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो उनके पिता खगड़िया के KDS कॉलेज में हिंदी के प्रोफेसर थे। मनीष की शुरुआती पढ़ाई जमालपुर-गोगरी इलाके के एक सरकारी स्कूल में हुई थी। साल 1991 में मनीष ने मैट्रिक की परीक्षा में जिले में टॉप किया था। 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह IAS की तैयारी करने के लिए दिल्ली में रहने वाले अपने बड़े भाई के पास चला गया।
पड़ोसियों को भी नहीं हुआ यकीन
लेकिन जब उसके फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ, तो आसपास के पड़ोसियों को भी यकीन नहीं हुआ कि मनीष एक फेक आईएएस ऑफिसर है। पड़ोसियों का मानना था कि उसके पास महंगी टेस्ला की गाड़ी है, जो देशभर में अमुमन कम ही लोगों के पास है, ऐसे में पड़ोसियों को भी यकीन था कि यह आईएएस अफसर या बड़ा कोई अधिकारी है। लेकिन उनका यह भी कहना था कि उन्होंने कभी भी उसके बारे में अखबरों में नहीं पढ़ा कि वो आईएएस अफसर बन गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मनीष के दोस्त ने बताया कि एक बार विवाद के दौरान मनीष ने जमालपुर कचहरी स्थित मिडिल स्कूल के एक शिक्षक को दूर से अपना आईडी कार्ड दिखाया था। उसने खुद को CBI अधिकारी बताते हुए शिक्षक को धमकी भी दी थी।
पुलिस ने की छापेमारी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, खगड़िया पुलिस को सूचना मिली थी कि जमालपुर में रहने वाला मनीष गुप्ता अपनी गाड़ियों पर ‘GOVT OF INDIA’ की प्लेट लगाकर खुद को IAS अधिकारी बताता है। इसी सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने 8 अगस्त की रात उसके घर पर छापेमारी की। पुलिस के पहुंचने के दौरान घर के बाहर दो गाड़ियां खड़ी थीं। दोनों पर सरकारी नंबर प्लेट लगी हुई थी। इसी दौरान घर के बाहर हाफ पैंट और टी-शर्ट पहने एक व्यक्ति टहल रहा था। पुलिस ने जब उससे उसकी पहचान पूछी तो उसने खुद को मनीष गुप्ता बताते हुए कहा कि वह सीनियर IAS अधिकारी है और अजित डोभाल की टीम में काम करता है। उसने पुलिसकर्मियों से यह भी कहा कि वे उसके घर आने की हिम्मत कैसे कर सकते हैं।
फर्जी आईडी कार्ड भी दिखाया
मनीष ने अपने मोबाइल फोन पर पुलिस को अपना आईडी कार्ड भी दिखाया। आईडी कार्ड और उसके आत्मविश्वास को देखकर पुलिसकर्मी भी कुछ देर के लिए असमंजस में पड़ गए। हालांकि, जब अधिकारियों ने आईडी कार्ड की जांच की तो वह फर्जी निकला।
मनीष गुप्ता के घर पर कई घंटो तक छापेमारी चली। इस दौरान वह लगातार वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से बहस करता रहा। वह खुद को बड़ा अधिकारी बताते हुए पुलिसकर्मियों को बार-बार धमकी देता रहा कि वह अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर उन्हें निलंबित करवा देगा।
अंबानी जैसा घर
बता दें कि मनीष गुप्ता की उम्र 41 साल है और वो अविवाहित है। उसने करीब 7000 वर्गफुट जमीन पर मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया जैसा आलीशान मकान बनवाया था। बताया जा रहा है कि घर की बनावट ऐसी थी, जिससे वह आसपास की गतिविधियों पर नजर रख सकता था। पड़ोसी के मुताबिक, मनीष के घर का नाम ‘परमेश्वरी भवन’ है, जिसमें सभी तरह की लग्जरी सुविधाएं मौजूद हैं। मनीष जब से गाजियाबाद से यहां आया था, तब से वह लगातार घर में कुछ ना कुछ मरम्मत के कार्य करवाता था। घर में स्विमिंग पूल और थिएटर भी है। अंदर की सजावट में महंगे इटालियन टाइल्स का इस्तेमाल किया गया है। पूरे परिसर की सुरक्षा के लिए 25 से ज्यादा CCTV कैमरे लगाए गए थे।
क्रेडिट कार्ड हुए बरामद
8 अगस्त को मनीष के घर हुई छापेमारी के दौरान पुलिस को 20 क्रेडिट कार्ड और 8 बैंक खातों से जुड़ी जानकारी मिली। इसके अलावा उसके पास से 5 iPhone और iPad भी बरामद किए गए हैं। इतना ही नहीं मनीष गुप्ता ने अपने महलनुमा घर में बिग बार बना रखा था। इसमें जापान-फ्रांस समेत दुनिया के 22 देशों की 33 प्रीमियम शराब की बोतलें मिली हैं।
पिता प्रोफेसर, कनाडा में रहता है एक भाई
मनीष कुमार गुप्ता का परिवार पढ़ा-लिखा और प्रतिष्ठित बताया जाता है। मनीष के पिता परमेश्वर प्रसाद गुप्ता गोगरी-जमालपुर स्थित KDS कॉलेज में प्रोफेसर थे। परिवार का यहां पुश्तैनी घर भी है। मनीष के बड़े भाई संजय कुमार गुप्ता दिल्ली में प्रोफेसर हैं, जबकि एक अन्य भाई डंपी कुमार कनाडा में रहते हैं। परिवार के अन्य भाई भी अलग-अलग शहरों में निजी कंपनियों में काम करते हैं।
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