समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान के राजनीतिक करियर को प्रभावित करने वाले सबसे चर्चित और विवादित बयानों में से एक पर आज फैसला सुनाया गया है। ये तनखइया है, इनसे मत डरियो…इंशा अल्लाह इनसे जूते साफ कराऊंगा जैसी बातें सरकारी अधिकारी को लेकर कही गई थी लेकिन इसकी गूंज रामपुर से लेकर दिल्ली चुनाव आयोग तक पहुंची। अब सात सालों बाद इस बयान पर रामपुर की एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 16 मई के दिन अपना फैसला सुनाया। 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान दिए गए एक विवादित बयान के मामले में रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने उन्हें दोषी करार दिया है। कोर्ट ने आजम खान को 2 साल की जेल की सजा सुनाई है. इसके साथ ही उन पर 5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
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क्या है ‘जूते साफ कराने’ वाला पूरा मामला?
यह पूरा विवाद साल 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान शुरू हुआ था। उस समय आजम खान रामपुर सीट से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार थे। चुनाव प्रचार के दौरान रामपुर के भोट इलाके में एक रोड शो निकाला जा रहा था। आरोप है कि इसी रोड शो में आजम खान ने वहां के तत्कालीन जिला अधिकारी पर निशाना साधते हुए बेहद तीखी टिप्पणी की थी। वायरल वीडियो में आजम खान को यह कहते सुना गया था कि ‘ये तनखइया हैं, इनसे मत डरियो, उन्हीं के साथ गठबंधन है जो जूते साफ करा लेती हैं, इंशा अल्लाह चुनाव बाद इनसे जूते साफ कराऊंगा। यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था।
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